Assam Flood: बह गए आशियाने, लाखों लोग बेघर, 68 की मौत, असम में बाढ़ से मची तबाही की तस्वीरें
जिंदगी देने वाला पानी जब सैलाब की तस्वीर में आया तो सब कुछ ठहर गया. मौजूदा समय में असम में कुछ ऐसे ही हालात हैं, जहां बाढ़ के कारण घर डूब गए, कई लोगों की मौत हो गई और लाखों लोग बेघर हैं.
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Flood In Assam: मॉनसूनी बारिश जहां गर्मी से राहत देती है वहीं यह आफत भी बन जाती है. देश के कई इलाकों में भारी बारिश ने जनजीवन बेहाल कर दिया. असम में तो बाढ़ के कारण जिंदगी मानों ठहर सी गई है. जिंदगी देने वाला पानी जब सैलाब की तस्वीर में आया तो तबाही मच गई. असम के कई जिले अभी बाढ़ की चपेट में है. जिससे लोगों के घर डूब गए, सामान बह गया और जिंदगी बेपटरी हो गई.
असम में बाढ़ के कारण 68 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हैं. कहीं नदी के कटाव में कई मकान भरभराकर गिर गए, तो कहीं लैंडस्लाइड में भारी नुकसान हो गया. हालांकि बाढ़ का पानी कम तो हो रहा है लेकिन तस्वीरें अभी भी खराब हालातों की तस्दीक कर रही हैं.
तस्वीर असम के शिवसागर ज़िले में आई भीषण बाढ़ के बाद की है. यहां निमाइजन गांव में लोग बाढ़ के पानी के बीच एक जुगाड़ू नाव पर मोटरसाइकिल ले जा रहे हैं.
शिवसागर में बाढ़ में कई वाहन बह गए. तस्वीर में तीन वाहन नजर आ रहे हैं. जिसमें एक गाड़ी पलटी हुई है, वहीं, गहरे किचड़ में एक गाड़ी धंस गई है.
शिवसागर के ग्रामीण इलाके में बाढ़ का पानी पार करने के लिए लोग केले के तनों से बनी अस्थायी नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सिमोलुगुरी में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ में एक घर मलबे में तब्दील हो गया. इसके बाद लोग मलबे के बीच अपना सामान ढूंढते हुए नजर आए.
जिन सड़कों पर गाड़ियां रफ्तार भरती थीं, वो अब पानी से भरी हैं. ऐसे में नाव ही लोगों के आने जाने और सुरक्षित ठिकानों पर अपनों को पहुंचाने का साधन बन गई है.
असम के गुवाहाटी में भारी बारिश के बाद एक रिहायशी इलाके में कमर तक पानी भर गया. लोग गहरे पानी से होकर गुजर रहे हैं.
गुवाहाटी में भारी बारिश के बाद, स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (SDRF) के जवान बाढ़ प्रभावित इलाके से लोगों को निकालने के लिए नाव का इस्तेमाल कर रहे हैं.
असम के कई इलाकों में हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि लोगों की आजीविका के साधन भी खत्म हो गए. लगातार बारिश के कारण बाढ़ का पानी गांवों में घुस गया. इससे लोगों को अपने घर, मवेशियों और सामान को बचाने का भी समय नहीं मिल पाया.
खात पत्थर के नामटियाल दारिकापार गांव के परिवारों ने बेबसी से देखा कि कैसे बाढ़ के पानी ने उनकी वर्षों की मेहनत से जुटाई गई हर चीज को बर्बाद कर दिया. सामान बचाने के लिए उन्होंने उसे ऊंची जगहों पर पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव वाले पानी ने लगभग सब कुछ बहा दिया.
हाईवे पर रात गुजार रहे लोग
न्यूज एजेंसी IANS से बात करते हुए लोगों ने बताया, बेघर परिवार नेशनल हाईवे के किनारे बने अस्थायी शिविरों में एक और रात गुजार रहे हैं. उनके घर अभी भी पानी में डूबे हुए हैं और उन्हें यह पता नहीं है कि वे कब तक अपने घर वापस लौट पाएंगे.
इस आपदा के कारण लोगों को रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. भोजन, साफ पीने का पानी, कपड़े और दवाइयों की कमी हो गई है. जिन परिवारों में बुजुर्ग और बीमार लोग हैं, उनके लिए हालात और भी कठिन हैं, क्योंकि उन्हें जरूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं.
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने क्या कहा?
इस बीच, 27 जुलाई को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में आई हालिया बाढ़ सामान्य मानसून बाढ़ जैसी नहीं थी. यह बाढ़ बहुत ज्यादा बारिश के कारण आई, जिससे उन इलाकों में भी भारी नुकसान हुआ, जिन्हें आमतौर पर बाढ़ से सुरक्षित माना जाता है.
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CM हिमंत ने कहा कि जैसे-जैसे बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है. सरकार ने अपना ध्यान बहाली और पुनर्वास पर केंद्रित कर दिया है. उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान एहतियात के तौर पर रोकी गई बिजली आपूर्ति को शिवसागर, जोरहाट, चराइदेव, धुबरी और बोंगाईगांव सहित कई ज़िलों में व्यापक सुरक्षा जांच के बाद चरणों में बहाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हम जल्द से जल्द ज़रूरी सेवाओं को बहाल करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हर प्रभावित समुदाय सामान्य स्थिति में लौट आए. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बाढ़ के बाद पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाएगी और क्षतिग्रस्त स्कूलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की मरम्मत की जाएगी.
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(Photo and Input By IANS)