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अब पेपर लीक माफियाओं की खैर नहीं, लोकसभा से पारित हुआ बिल, फास्ट ट्रैक कोर्ट, सुनवाई की डेडलाइन सहित कई प्रावधान

लोकसभा से पेपर लीक को रोकने वाला बिल पास हो गया है. भारी हंगामे के बीच लोक परीक्षा संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित हुआ. इसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट, तय समय के अंदर सुनवाई सहित सख़्त से सख़्त सजा के कई प्रावधान किए गए हैं. यानी कि अब पेपर माफियाओं की खैर नहीं होगी.

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28 Jul 2026
( Updated: 29 Jul 2026
03:22 PM )
अब पेपर लीक माफियाओं की खैर नहीं, लोकसभा से पारित हुआ बिल, फास्ट ट्रैक कोर्ट, सुनवाई की डेडलाइन सहित कई प्रावधान
Image Source: IANS
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पेपर लीक की घटनाओं पर रोक की दिशा में मोदी सरकार को बड़ी सफलता मिली है. भारी हंगामे के बीच लोकसभा से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित हो गया. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोक सभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्‍तुत किया था. सदन में दो दिनों तक करीब 10 घंटे की चर्चा में कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित हुई. इतना ही नहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार और RSS को घेरा और आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों-प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आरोप कथित तौर पर आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था.

लोकसभा में इस संसोधन विधेयक पर चर्चा के लिए पक्ष-विपक्ष में सहमति बनने के बाद विभिन्न पार्टियों के सांसदों ने इस बिल पर अपनी बात रखी. कांग्रेस से गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी, बीजेपी से बांसुरी स्वराज जितेंद्र सिंह, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, दयानिधि मारन, श्रीकांत शिंदे सहित दूसरी पार्टियों के सांसदों ने भाग लिया. शुरुआत में इस बिल पर बहस के लिए 6 घंटे का समय तय किया गया था, जिसे सरकार की ओर से मांग और सहमति पर लोकसभा स्पीकर ने बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया.

लोकसभा से पेपर लीक रोकथाम वाला बिल पारित

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आपको बताएं कि इस संशोधन विधेयक को पेश करने का उद्देश्य लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों को और मजबूत करना है. इसके तहत त्वरित जांच, विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से त्‍वरित सुनवाई, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति, अपीलों का समयबद्ध निपटान और अधिक कठोर दंड प्रावधानों की व्यवस्था की गई है, ताकि लोक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और संगठित गड़बड़ियों को प्रभावी तरीके से रोका जा सके.

हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक होने और परीक्षा से जुड़ी संगठित गड़बड़ियों की घटनाओं को देखते हुए, मौजूदा कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए ये प्रस्तावित संशोधन लाए गए हैं. इनका उद्देश्य अधिक जवाबदेही तय करना, ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त रोक लगाना और लोक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना है.

पेपर लीक के आरोपी पर जुर्माना की राशि बढ़ी, सजा अवधि भी बढ़ाई गई

इस विधेयक में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है. इसके तहत जेल की सजा को कम से कम तीन वर्ष, जिसे पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, के मौजूदा प्रावधान से बढ़ाकर कम से कम पांच वर्ष, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही, अधिकतम जुर्माना भी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है. दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये कानून बन जाएगा.

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इस अधिनियम के तहत अपराधों में शामिल पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं के लिए, विधेयक में अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने और उन्‍हें कोई भी लोक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित करने की अवधि को चार वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रस्ताव है.

सेवा प्रदाता कर्मियों के लिए भी कड़े सजा के प्रावधान

इस विधेयक में सेवा प्रदाताओं के प्रबंधकीय कर्मियों के लिए कड़ी सजा का भी प्रस्ताव है. इसमें कम से कम पांच वर्ष और अधिक से अधिक दस वर्ष तक की जेल की सजा और अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने का प्रावधान है.

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इस संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए जेल की कम से कम सजा को पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, करने और अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है.

डेडलाइन के अंदर सुनवाई हो पाएगी

यह विधेयक केंद्र सरकार को यह अधिकार भी देता है कि वह इस अधिनियम के तहत अपराधों की जांच का कार्य इस उद्देश्य के लिए गठित विशेष कार्य बल को सौंप सकता है. त्‍वरित जांच और सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विधेयक में एक नई धारा 12क अंत:स्‍थापित करने का प्रस्ताव है. इसमें दो माह के भीतर जांच पूरी करने, इस अधिनियम के तहत अपराधों की दैनिक सुनवाई के लिए सत्र न्‍यायालय को विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के तौर पर नामित करने, आरोप पत्र दाखिल होने की तारीख से तीन माह के अंदर सुनवाई पूरी करने और प्रत्येक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान है.

इस विधेयक में एक नई धारा 12ख अंत:स्‍थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिसमें यह प्रावधान है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के किसी निर्णय, आदेश या सजा के खिलाफ अपील तीस दिनों की अवधि के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष की जा सकती है और जहां संभव हो, तीन माह के भीतर उसका निपटान किया जाना चाहिए.

पेपर लीक करने वालों को अब 5 महीने में मिलेगी सजा: जितेंद्र सिंह 

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वहीं इस बिल पर लोकसभा में बोलते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित परीक्षा घोटालों और अन्य अनुचित गतिविधियों पर पहले से अधिक प्रभावी ढंग से रोक लगाना है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी. 

जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के लिए लाया गया है. उन्होंने बताया कि 2024 का कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन अब उसे और मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई. प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सरकार यह संशोधन लेकर आई है ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके.

उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही हैं. अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग परीक्षाओं में पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, हालांकि पहले इस तरह की सख्त कार्रवाई नहीं होती थी जैसी अब की जा रही है.

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जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती परीक्षा पेपर लीक से लेकर 2012 के एम्स प्रवेश परीक्षा पेपर लीक तक कई बड़े मामले कांग्रेस सरकार के समय सामने आए. उन्होंने कहा कि इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने एक लीकप्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार करने का फैसला किया.

जितेंद्र सिंह ने बताया कि 1992 में कांग्रेस सरकार के दौरान एक समिति ने केंद्रीय परीक्षा समिति बनाने की सिफारिश की थी. इसके बाद 2010 में भी एक समिति ने यही सुझाव दिया, लेकिन कांग्रेस और यूपीए सरकारों ने इन सिफारिशों को लागू नहीं किया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) का गठन किया और 2024 में पहली बार इस विषय पर व्यापक कानून बनाया, जिसे जून 2024 में लागू किया गया.

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बिल में फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था: जितेंद्र सिंह

केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था है. इसके तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी. इसके बाद ट्रायल कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाएगा. यानी घटना होने से लेकर फैसले तक अधिकतम पांच महीने का समय लगेगा.

उन्होंने बताया कि यदि कोई पक्ष फैसले के खिलाफ अपील करना चाहता है तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी. साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में डबल बेंच से नहीं होगी.

जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधेयक पेश होने के साथ ही कानून मंत्रालय ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.

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उन्होंने यह भी बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. इसके अलावा राधाकृष्णन समिति की कुल 46 सिफारिशों में से 35 सिफारिशें सरकार पहले ही लागू कर चुकी है.

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