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आयुर्वेद की ऋतुचर्या, बीमारियों से बचने का आसान उपाय

शरद ऋतु (मिड सितंबर से मिड नवंबर तक) में पित्त बढ़ता है, जिससे त्वचा और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इस समय मीठा, कड़वा और ठंडक देने वाला भोजन लेना अच्छा रहता है. ज्यादा तेल-मसाले और धूप से बचना चाहिए.

आयुर्वेद की ऋतुचर्या, बीमारियों से बचने का आसान उपाय
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आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ रहने का सबसे आसान और प्राकृतिक तरीका है मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और खानपान को बदलना. इसे ही ऋतुचर्या कहा जाता है. भारतीय कैलेंडर को सूरज की चाल की दिशा के आधार पर साल को छह ऋतुओं में बांटा गया है और हर ऋतु का शरीर पर अलग असर पड़ता है. अगर हम मौसम के हिसाब से अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव कर लें, तो कई बीमारियों से आसानी से बच सकते हैं. 

हेमंत और शिशिर ऋतु 

सर्दियों यानी हेमंत (मिड नवंबर से मिड जनवरी तक) और शिशिर (मिड जनवरी से मिड मार्च तक) ऋतु में पाचन शक्ति मजबूत रहती है, इसलिए इस समय पौष्टिक और थोड़ा भारी भोजन लिया जा सकता है. घी, दूध, गुड़, तिल, बाजरा, गेहूं और गरम तासीर वाले खाद्य पदार्थ शरीर को ताकत देते हैं. इस मौसम में शरीर की अच्छे से तेल मालिश करना, गुनगुने पानी से नहाना और नियमित व्यायाम करना बहुत फायदेमंद रहता है. लेकिन बहुत ठंडी, सूखी और हल्की चीजें खाने से बचना चाहिए.

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वसंत ऋतु (मिड मार्च-मिड मई)

जब वसंत ऋतु (मिड मार्च से मिड मई तक) आती है, तो शरीर में जमा कफ बढ़ने लगता है, जिससे सर्दी-खांसी, एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इस समय हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए. जौ, पुराना चावल, मूंग दाल, शहद, और हल्का गर्म पानी अच्छा रहता है. तला-भुना, ज्यादा मीठा और भारी भोजन कम करें. रोज थोड़ा व्यायाम, सूखी मालिश और गुनगुने पानी से स्नान लाभकारी होता है.

ग्रीष्म ऋतु (मिड मई – मिड जुलाई)

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ग्रीष्म ऋतु (मिड मई से मिड जुलाई तक) में शरीर की ताकत कम होने लगती है और पानी की कमी जल्दी होती है. इसलिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ जैसे छाछ, नारियल पानी, फलों का रस और सादा पानी पिएं. हल्का, मीठा और ठंडक देने वाला भोजन लें. बहुत मसालेदार, तला-भुना खाना और ज्यादा मेहनत से बचें. ढीले-ढाले कपड़े पहनें और धूप से बचाव करें.

वर्षा ऋतु (मिड जुलाई – मिड सितंबर)

वर्षा ऋतु (मिड जुलाई से मिड सितंबर) के मौसम में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए इस समय बासी, तला-भुना और भारी भोजन से बचना चाहिए. उबला हुआ या गुनगुना पानी पीना बेहतर है. खट्टा और नमकीन स्वाद थोड़ा लिया जा सकता है, लेकिन संयम जरूरी है. बारिश में भीगने से बचें और साफ-सफाई का खास ध्यान रखें.

शरद ऋतु (मिड सितंबर – मिड नवंबर)

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शरद ऋतु (मिड सितंबर से मिड नवंबर तक) में पित्त बढ़ता है, जिससे त्वचा और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इस समय मीठा, कड़वा और ठंडक देने वाला भोजन लेना अच्छा रहता है. ज्यादा तेल-मसाले और धूप से बचना चाहिए.

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