पीएम मोदी के ख़िलाफ़ अभद्र भाषा बोलने वालों पर भड़के अनुपम खेर, विरोधियों को ऐसे दिया मुंहतोड़ जवाब
बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर ने भी एक वीडियो जारी किया है, लेकिन उन्होंने अपने वीडियो में प्रदर्शन के दौरान लोगों द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी के लिए इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर निराशा ज़ाहिर की है.
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नीट पेपर लीक को लेकर चल रहा CJP का विरोध प्रदर्शन 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद ख़त्म हो गया. जिसके बाद से ही कई बॉलीवुड हस्तियों ने अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट कर छात्रों का समर्थन किया था.
पीएम के लिए अभद्र भाषा पर बोलने पर भड़के अनुपम
अब इस मामले पर बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर ने भी एक वीडियो जारी किया है, लेकिन उन्होंने अपने वीडियो में प्रदर्शन के दौरान लोगों द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी के लिए इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर निराशा ज़ाहिर की है.
‘यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है’
अनुपम खेर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा, “आंदोलन समाप्त हो गया, बहुत सी बातें स्पष्ट हो गईं. ये भी साबित हो गया की छात्र जब अपनी बात पूरी ईमानदारी और दृढ़ता से रखते हैं तो लोकतंत्र उन्हें सुनता है. शायद ये संवाद पहले हो सकता था, शायद तब परिस्थितियां यहां तक नहीं पहुंचतीं. लेकिन आखिरकार समाधान निकला और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है.”
‘मोदी जी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया’
अनुपम खेर ने वीडियो में आगे कहा,”अब समय है कि हम आगे बढ़ें, देश किसी एक आंदोलन पर नहीं रुक सकता. देश को भविष्य की ओर बढ़ना हो होता है. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक बात ने हम सबको भीतर तक दुखी किया है. शायद सबको नहीं पर मुझे जरूर किया है. कैमरे के सामने सार्वजनिक मंचों पर जिस तरह से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के लिए अपमानजनक और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसे देखकर मन व्यथित हुआ.”
‘यही तो लोकतंत्र की आत्मा है’
एक्टर ने आगे कहा, “ये केवल किसी एक व्यक्ति का प्रश्न नहीं है ये उस संस्कृति का प्रश्न है, जिसे हम आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ कर जाना चाहते हैं. हम किसी भी नेता से असमर्थ हो सकते हैं, उनकी नीतियों की कठोर से कठोर आलोचना कर सकते हैं उनसे सवाल पूछ सकते हैं. यही तो लोकतंत्र की आत्मा है.”
‘जरूरी नहीं कि हम उनके हर निर्णयों से सहमत हों’
अनुपम खेर ने वीडियो में आगे कहा, “लेकिन जब तर्क समाप्त हो जाते हैं और गालियां शुरू हो जाती हैं, तो बहस नहीं बचती सिर्फ शोर बजता है. नरेंद्र मोदी पिछले 30 सालों से सार्वजानिक जीवन में देश की जनता ने उन्हें हर बार अपना विश्वास दिया है. उन्होंने अपना पूरा जीवन सार्वजानिक जीवन में लगाया है. यह जरूरी नहीं कि हम उनके हर निर्णयों से सहमत हों.”
‘हर उम्र के लोग इस गिरती हुई भाषा का हिस्सा बने’
एक्टर ने आगे कहा, “लेकिन किसी भी निर्वाचित प्रधानमंत्री के पद की गरिमा का सम्मान करना मेरे ख्याल से हम सबका कर्तव्य है. दुख इस बात का नहीं है कि उनका विरोध हुआ. लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है. दुख इस बात का है कि विरोध की भाषा इतनी छोटी हो गई है और यह केवल युवाओं तक ही सीमित नहीं था. हर उम्र के लोग इस गिरती हुई भाषा का हिस्सा बने.”
क्यों हो रहा था विरोध प्रदर्शन?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सदस्य परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारी लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी समस्याओं, जिसमें नीट-यूजी पेपर लीक जैसे मामले भी शामिल हैं, वहीं प्रदर्शनकारी लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी कर रहे थे, हालांकि अब शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है.