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मीडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान के हालात पर छलका मंदाना करीमी का दर्द, बोलीं-मैं भी महसा अमीनी हो सकती थी

मीडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान के हालात पर ईरानी एक्ट्रेस मंदाना करीमी का दर्द छलका है. एक्ट्रेस ने ईरान की महिलाओं और लोगों पर हो रहे अत्याचारों की गहरी पीड़ा भी व्यक्त की.

मीडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान के हालात पर छलका मंदाना करीमी का दर्द, बोलीं-मैं भी महसा अमीनी हो सकती थी
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ईरान में जन्मीं और भारतीय सिनेमा में अपना नाम बना रही एक्ट्रेस मंदाना करीमी ने हाल ही में ईरान की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर अपनी राय रखी. उन्होंने ईरान के हालात को लेकर गहरा दुख जताया है. 

ईरान के हालात पर छलका मंदाना करीमी का दर्द

एक्ट्रेस ने ईरान की महिलाओं और लोगों पर हो रहे अत्याचारों की गहरी पीड़ा भी व्यक्त की. उन्होंने कहा, "मैंने ये बातें सिर्फ सुनी नहीं हैं, बल्कि अपनी जिंदगी में जी हैं. मेरा जन्म ईरान में हुआ था और मैं 18 साल की उम्र तक वहीं रही हूं. करीब चार साल पहले तक मेरे पास ईरान का पासपोर्ट भी था. इसलिए ये मेरे अपने अनुभव है, कोई सुनी-सुनाई कहानी नहीं. 

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‘मेरे कई दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया’

मंदाना करीमी ने कहा, "जब मैं ईरान छोड़कर बाहर आई, तब मुझे वहां की असल स्थिति का पता चला. मेरे कई दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ लोगों को तो फांसी तक दे दी गई है. 8 जनवरी को हुई सामूहिक हत्याएं बेहद दर्दनाक थीं. मैं चाहती हूं कि आप इसे हमारे नजरिए से भी देखें. एक ईरानी महिला के तौर पर, जिसने वो जिंदगी जी है, मुझे पता है कि ये शासन कितना क्रूर हो सकता है.”

’48 साल से पूरा ईरान इस शासन से आजादी की कोशिश कर रहा है’

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उन्होंने आगे कहा कि पिछले 48 साल से पूरा ईरान इस शासन से आजादी की कोशिश कर रहा है. 8 और 9 जनवरी को लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन शासन ने एक ही दिन में कई लोगों को मार दिया.उन्होंने कहा, "वहां के लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी और कुछ लोगों को मदद भी मिली. “

 ‘सिर्फ यह मत पूछिए कि लोग युद्ध क्यों चाहते हैं’

 मंदाना करीमी यहीं नहीं रुकीं उन्होंने आगे कहा, "इसलिए मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि इसे इस नजर से भी देखिए. सिर्फ यह मत पूछिए कि लोग युद्ध क्यों चाहते हैं, बल्कि यह समझने की कोशिश कीजिए कि वे इस समय क्या महसूस कर रहे हैं. लोग यह क्यों कहते हैं कि इजराइल और अमेरिका ईरान पर हमला करे या देश को तबाह कर दे.”

‘मैं भी महसा अमीनी में से एक हो सकती थी’

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उन्होंने आगे कहा, "ईरान की महिलाओं ने जो दर्द सहा है, वह कल्पना से भी परे है.” मंदाना ने अपनी खुशकिस्मती बताई कि वे 18 साल की उम्र में वहां से निकल आईं. वो कहती हैं, " हर दिन जब मैं अपने दोस्तों और परिवार से वहां की तस्वीरें और खबरें देखती हूं, तो मुझे लगता है कि मैं कितनी खुशकिस्मत थी कि 18 साल की उम्र में वहां से निकल आई, क्योंकि मैं भी महसा अमीनी में से एक हो सकती थी, जो 8 जनवरी को सड़कों पर निकले थे और फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौटे और इतना ही नहीं, उनके माता-पिता को तो यह भी नहीं पता कि उनके बच्चों की लाश कहां है.”

कौन थी महसा अमीनी?

महसा अमीनी ईरान की एक 22 साल कुर्द मूल की महिला थीं, जिनकी 2022 में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. एक्ट्रेस  ने अपनी बात को खत्म करते हुए कहा कि कई महिलाएं मुझसे सवाल पूछती हैं, "तुम कैसी महिला हो? तुम्हें उन बच्चों की परवाह नहीं जो स्कूल पर हुए हमले में मारे गए?"

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तो मैं उनसे पूछती हूं, "जब मैं जनवरी, फरवरी और मार्च में सड़कों पर लोगों से अपील कर रही थी कि ईरान की आवाज बनो, तब आप कहां थीं? तब आप सब चुप थीं और अब अचानक सबकी राय बन गई है. इसलिए नहीं, धन्यवाद.”

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