क्रिप्टो-हवाला और ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर ईडी का बड़ा एक्शन, दुबई निवासी निहाल वीएन गिरफ्तार
ईडी ने 3 करोड़ रुपए नकद, साथ ही आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए. इससे पहले इस मामले में मुख्य आरोपी मधुपन एसएस को 17 जनवरी, 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था. वह अभी न्यायिक हिरासत में है.
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ईडी ने क्रिप्टो-हवाला और इंटरनेशनल नारकोटिक्स मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दुबई के रहने वाले निहाल वीएन को गिरफ्तार किया है.
इंटरनेशनल नारको-सिंडिकेट के फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करने की रणनीति के तहत, डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी), गोवा जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत निहाल वीएन को हिरासत में लिया.
ड्रग तस्करी के पूरे नेटवर्क पर ईडी की नजर
ईडी के एक बयान में कहा गया है कि गोवा की एक स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने आरोपी को 28 जुलाई तक सात दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया.
इस कार्रवाई से ध्यान ड्रग ले जाने वाले लोगों से हटकर पूरे ड्रग-ट्रैफिकिंग नेटवर्क, डार्कनेट ऑपरेटर्स, किंगपिन और उनके क्रॉस-बॉर्डर फाइनेंशियल फैसिलिटेटर्स को टारगेट करने पर केंद्रित हो गया है.
पीएमएलए जांच से पता चला कि दुबई से काम करने वाला निहाल वीएन, कई महाद्वीपों में काम करने वाले इंटरनेशनल ड्रग माफियाओं के लिए मुख्य फाइनेंशियल नोड और मनी लॉन्ड्रर के तौर पर काम करता था.
क्रिप्टो और विदेशी मुद्रा के जरिए होती थी मनी लॉन्ड्रिंग
ईडी ने कहा कि उसने भारत में गैर-कानूनी ड्रग बिक्री से हुई कैश और गैर-कानूनी कमाई को प्रोसेस किया और गैर-कानूनी नारकोटिक ड्रग बिजनेस से हुई बड़ी मात्रा में 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' (अपराध से हुई कमाई) को अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी मुद्रा में बदला.
इसमें कहा गया है कि लॉन्ड्रिंग की गई क्रिप्टो और विदेशी मुद्रा को ब्राजील और थाईलैंड में मौजूद इंटरनेशनल कार्टेल और सप्लायर्स को भेजा जाता था, ताकि भारत में तस्करी के लिए लाए जाने वाले हाई-ग्रेड नशीले पदार्थों और सिंथेटिक ड्रग्स की खरीद के लिए फंड मिल सके.
कई क्रिप्टो वॉलेट और ऑफशोर खाते मिले
ईडी ने कहा कि फोरेंसिक और डिजिटल जांच में पहले ही कई गैर-कानूनी क्रिप्टो-वॉलेट, ऑफशोर बैंक अकाउंट और घरेलू शेल एंटिटीज की पहचान की जा चुकी है, जिनका इस्तेमाल 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' को लॉन्ड्र करने के लिए किया जाता था.
इससे पहले, ईडी के पणजी जोनल ऑफिस ने गोवा पुलिस के एंटी-नारकोटिक्स सेल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत गोवा, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा और दिल्ली सहित कई राज्यों में 26 जगहों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था.
गोवा पुलिस ने कमर्शियल मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत मामला दर्ज किया था और एक अच्छी तरह से संगठित अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट का पता चला था.
कई राज्यों में हुई थी छापेमारी
ईडी ने बताया कि कई राज्यों - गोवा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, ओडिशा, और केरल—में बिजनेस-टू-बिनेस (बी2बी) आधार पर नशीले पदार्थों के वितरण का पता लगाया गया.
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ईडी ने 3 करोड़ रुपए नकद, साथ ही आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए. इससे पहले इस मामले में मुख्य आरोपी मधुपन एसएस को 17 जनवरी, 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था. वह अभी न्यायिक हिरासत में है.