NIA कोर्ट ने बेंगलुरु के अल-हिंद ISIS टेरर केस में शामिल सैयद फसीउर रहमान को सुनाई सजा, हुई 7 साल की कठोर कैद
NIA की एक स्पेशल कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़े आतंकी साजिश के मामले में आरोपी सैयद फसीउर रहमान को दोषी ठहराते हुए 7 साल की कठोर कैद और 48,000 रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई है.
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक विशेष कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से जुड़े आतंकी साजिश मामले में आरोपी सैयद फसीउर रहमान को दोषी ठहराते हुए 7 साल की कठोर कैद और 48 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है.
सैयद फसीउर रहमान को सुनाई गई सजा!
यह मामला मूल रूप से कर्नाटक पुलिस ने 10 जनवरी 2020 को बेंगलुरु में दर्ज किया था और एनआईए ने 23 जनवरी 2020 को इसे अपने हाथ में लेकर अल-हिंद आईएसआईएस केस के तौर पर फिर से दर्ज किया था. अब तक एनआईए ने 20 आरोपियों के खिलाफ 3 चार्जशीट दाखिल की हैं. इससे पहले, अक्टूबर 2025 में शुरू हुए ट्रायल के दौरान अपना अपराध कबूल करने के बाद हनीफ खान को 14 जुलाई को दोषी ठहराया गया था.
NIA की जांच के अनुसार, इस साजिश का मास्टरमाइंड मामले का मुख्य आरोपी महबूब पाशा था, जिसने बेंगलुरु के गुरुप्पनापाल्या स्थित अपने घर पर कई बैठकें की थीं. इन बैठकों में आरोपियों ने सांप्रदायिक दंगे भड़काने और प्रतिबंधित आईएसआईएस आतंकवादी संगठन के राष्ट्र-विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए टारगेटेड किलिंग करने की योजना बनाई थी.
क्या है अल हिंद-ISS टेरर केस?
दोषी ठहराए गए सैयद फसीउर रहमान को साजिश की बैठकों में शामिल पाया गया था और उसने अल-हिंद समूह के सदस्यों की जंगल-कैंप ट्रेनिंग के लिए एक स्पोर्ट्स शोरूम से टेंट और चाकू खरीदे थे. इस साजिश का मकसद आईएसआईएस/दाएश विलायत (प्रांत) स्थापित करना था.
एजेंसी ने कहा कि लगातार चल रही जांच के हिस्से के तौर पर एनआईए उस ऑनलाइन हैंडलर का पता लगाने की कोशिश कर रही है, जिसने इस साजिश में शामिल मॉड्यूल को स्थापित करने की योजना बनाई थी और साजिश रची थी.
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इससे पहले, 13 अगस्त को कर्नाटक के कलबुर्गी में पाकिस्तान और आतंकी संगठन आईएसआईएस से कथित संबंधों के आरोप में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था. आरोपियों की पहचान मोहम्मद समीर और सलमान के रूप में हुई.
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पुलिस के अनुसार, दोनों कथित तौर पर व्हाट्सएप कॉल और फेसबुक के माध्यम से पाकिस्तान की अंतर-सेवा खुफिया (आईएसआई) और आईएसआईएस के साथ नियमित संपर्क में थे. संदिग्धों को अंतर-राज्यीय सोशल मीडिया निगरानी अभियान के तहत हिरासत में लिया गया, जिसके दौरान कथित राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए उनके खातों पर नजर रखी गई.