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टीचर के थप्पड़ से 6 साल के मासूम की मौत! क्या स्कूल में छात्रों को पीटने पर हो सकती है सजा? जानें प्रावधान

परिजनों के मुताबिक, बच्चे को पहले से कोई बीमारी नहीं थी. न कोई मेडिकल हिस्ट्री थी. परिवार का आरोप है कि बच्चे के बेहोश होने के आधे घंटे तक उसे अस्पताल नहीं ले जाया गया था.

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21 Aug 2026
( Updated: 21 Aug 2026
04:52 PM )
टीचर के थप्पड़ से 6 साल के मासूम की मौत! क्या स्कूल में छात्रों को पीटने पर हो सकती है सजा? जानें प्रावधान
Image Source- Representative Image/AI/Grok
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आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के एक स्कूल में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक टीचर के थप्पड़ मारने के बाद 6 साल के मासूम की मौत हो गई. आरोप है कि टीचर की बेरहमी और डर के कारण छात्र की मौत हो गई. 

मामला विशाखापत्तनम के वन टाइम इलाके का है. जहां दावा किया गया कि 6 साल के बच्चे की हार्ट अटैक से स्कूल में ही मौत हो गई. स्कूल का जो CCTV सामने आया है उसमें देखा गया कि बच्चे को टीचर ने कपड़े पकड़कर खींचा और फिर थप्पड़ जड़ दिया. इसके बाद वह टीचर की गोद में ही गिर पड़ा और फिर नहीं उठा? 

स्कूल मे बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

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मासूम की मौत के पीछे महज एक थप्पड़ नहीं है बल्कि इसके पीछे का दर्द और डर है. दावा किया जा रहा है कि बच्चे की मौत किसी चोट या पिटाई से नहीं बल्कि मेंटल टॉर्चर, दहशत और अपमान था. टीचर का टॉर्चर करना उसके मन को गहरा आघात दे गया. 

परिजनों के मुताबिक, बच्चे को पहले से कोई बीमारी नहीं थी. न कोई मेडिकल हिस्ट्री थी. परिवार का आरोप है कि बच्चे के बेहोश होने के आधे घंटे तक उसे अस्पताल नहीं ले जाया गया था. टीचर की पिटाई के बाद ज्यादा तनाव और घबराहट में बच्चे की मौत हो गई. 

शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने क्या कहा? 

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इस दुखद घटना पर आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने हैरानी और दुख जताया है. उन्होंने कहा, एक शिक्षिका की मार से छह वर्षीय बच्चे की मौत बेहद दुखद है. उन्होंने मामले की कड़ी जांच और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा, टीचर और संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है. पीड़ित परिवार को जो क्षति हुई है उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'हमारी सरकार हर संभव तरीके से आपके साथ खड़ी रहेगी.’ माना जा रहा है टीचर ने मासूम को होमवर्क पूरा न करने पर पीटा था.

इस घटना ने फिर एक बार उस बहस को ताजा कर दिया है कि शिक्षण संस्था में बच्चों के साथ कितनी सख्ती रखनी चाहिए? ऐसे में ये जानना भी बहुत जरूरी है कि स्कूलों में बच्चों को सजा देने को लेकर क्या नियम है? 

क्या-क्या प्रतिबंधित है?

थप्पड़, छड़ी/डंडे से मारना, चिकोटी काटना, बाल खींचना
असुविधाजनक मुद्रा में खड़ा करना जैसे बेंच पर, दीवार के सहारे, बैग सिर पर रखना
मानसिक प्रताड़ना जैसे अपमानित करना, गाली देना, भेदभाव करना, डराना
जबरन कुछ खिलाना/पिलाना या बंद कमरे में रखना

क्या और किस केस में हो सकती है सजा?

थप्पड़ मारने, कान खींचने, छड़ी से मारने पर BNS की धारा 115 (2) के तहत 1 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

टीचर के पीटने से बच्चे की हड्डी टूटती है या स्थायी नुकसान होता है तो BNS की धारा 117 (2) के तहत 7 साल तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

टीचर के टॉर्चर के कारण बच्चा सुसाइड कर लेता है तो BNS की धारा 106 के तहत 10 साल तक की जेल या आजीवन कारावास हो सकता है.

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टीचर की मारपीट गंभीर हो, जिससे बच्चे की जान को खतरा हो तो  BNS की धारा 109 के तहत 10 साल तक की जेल या आजीवन कारावास हो सकता है.

अगर टीचर की लापरवाही या हिंसा के कारण बच्चे की मौत हो जाए जाए तो BNS की धारा 105 के तहत 10 साल तक का कारावास, जो परिस्थितियों के आधार पर बढ़ सकता है.

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विशाखापत्तनम की इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस जांच की दिशा में बढ़ चुकी है. अधिकारी CCTV फुटेज की जांच कर रहे हैं. यह भी देखा जा रहा है कि बच्चे को पहले से कोई बीमारी थी या नहीं. 

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