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‘एक रात, जब ईसीजी भी नसीब नहीं था…’ डॉक्टर ने बताई UP में बदलते मेडिकल सिस्टम की तस्वीर, शेयर किया बड़ा किस्सा

UP में आज छोटे शहरों में भी हार्ट से जुड़ी बड़ी बीमारियों का इलाज हो रहा है. NIC-2026 में एक डॉक्टर ने एक घटनाक्रम बताते हुए बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था के बारे में जीवंत उदाहरण दिया.

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11 Apr 2026
( Updated: 11 Apr 2026
04:57 PM )
‘एक रात, जब ईसीजी भी नसीब नहीं था…’ डॉक्टर ने बताई UP में बदलते मेडिकल सिस्टम की तस्वीर, शेयर किया बड़ा किस्सा
Photo- Screengrab/@myogiadityanath
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लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया का सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ का आयोजन किया गया. जहां CM योगी आदित्यनाथ ने भी संबोधन किया. इस समिट में डॉक्टर शरत चंद्रा ने UP में बदलते मेडिकल ढांचे और स्वास्थ्य व्यवस्था का जीवंत उदाहरण साझा किया. 

NIC-2026 सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के भीड़ भरे सभागार में जब डॉ. शरत चंद्रा ने बोलना शुरू किया, तो उनका स्वर सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि एक बेटे का भी था जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की सीमाओं को बहुत करीब से महसूस किया था. उन्होंने साल 2005 की एक घटना साझा की. 

साल 2005 की घटना शेयर की 

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डॉ. शरत चंद्रा ने बताया कि दिसंबर 2005 की एक रात करीब 10 बजे चंदौसी स्थित उनके घर से पिता का फोन आया कि बेटा सीने में दर्द हो रहा है, क्या करूं? एक डॉक्टर बेटे के रूप में उन्होंने सहज ही कहा- पापा, कहीं पास में जाकर ईसीजी करा लीजिए. पिता ने कहा कि इस समय रात में ईसीजी कहां हो पाएगा, सुबह ही कराएंगे. डॉ. चंद्रा ने कहा कि उस रात सिर्फ मेरे पिता ही नहीं, मैं भी जागता रहा. अगले दिन ईसीजी सामान्य आया, लेकिन वह रात उनके मन में एक सवाल छोड़ गई कि क्या हमारे पास समय पर इलाज की व्यवस्था है? 

उन्होंने कहा कि आज, दो दशक बाद, उसी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ता. ‘हृदय सेतु’ जैसे प्रयासों ने बड़े संस्थानों जैसे एसजीपीजीआई, KGMU और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को जिला अस्पतालों से जोड़ दिया है. 

छोटे शहरों में भी अब बड़े इलाज संभव

डॉ. शरत चंद्रा ने बताया पहले जहां एंजियोप्लास्टी जैसे इलाज केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, वहीं अब सुल्तानपुर, जौनपुर, बहराइच, गोंडा और बस्ती जैसे जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध है. अब मरीज को केवल दूरी नहीं, बल्कि समय से भी लड़ना नहीं पड़ता. 

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अपने संबोधन के अंत में डॉ. चंद्रा ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, यह भरोसे का बदलाव है. एक समय था जब रात में ECG भी संभव नहीं था, और आज वही प्रदेश जीवन बचाने के लिए हर पल तैयार खड़ा है. यही बदला हुआ उत्तर प्रदेश है, यही उत्तम प्रदेश है.

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