अभिषेक बनर्जी पर हमला, ममता का BJP पर पलटवार... क्या बंगाल की इस घटना ने INDIA गठबंधन को फिर एकजुट कर दिया?
पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के बाद सियासत गरमा गई है. टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने हैं, जबकि कई विपक्षी दल अभिषेक के समर्थन में उतर आए हैं.
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद शनिवार का दिन उस समय अचानक सुर्खियों में गई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमले की खबर सामने आई. दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में हुई इस घटना ने सिर्फ राज्य की राजनीति को नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी गर्मा दिया. अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे, लेकिन इसी दौरान उनके कार्यक्रम स्थल और काफिले पर कथित तौर पर ईंट, पत्थर और अंडे फेंके गए.
घटना के तुरंत बाद टीएमसी ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला कराने का आरोप लगाया, जबकि बीजेपी ने आरोपों को खारिज करते हुए हिंसा की निंदा की. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक असर यह देखने को मिला कि लंबे समय से अलग-अलग सुर में बोल रहे विपक्षी दल अचानक एक मंच पर नजर आने लगे.
अब शुरू होगा राजनीति का नया अध्याय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक नेता पर हुए हमले तक सीमित नहीं है. इसकी गूंज राष्ट्रीय राजनीति में भी सुनाई दे रही है. पिछले कुछ महीनों में INDIA गठबंधन के कई सहयोगी दलों के बीच दूरी बढ़ती दिखाई दे रही थी. कई मुद्दों पर अलग-अलग बयान भी सामने आए थे. लेकिन अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (उद्धव गुट) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों ने खुलकर उनके समर्थन में बयान दिए. इससे यह संकेत मिला कि विपक्षी राजनीति में अभी भी ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का महत्व कम नहीं हुआ है. सत्ता का समीकरण चाहे जैसा हो, लेकिन विपक्षी खेमे में उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता बनी हुई है.
अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?
घटना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अभिषेक बनर्जी ने इसे साधारण विरोध नहीं, बल्कि जानलेवा हमला बताया. उन्होंने दावा किया कि पूरी घटना कैमरों में रिकॉर्ड हुई है और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी. उनका आरोप था कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक हुई. उन्होंने कहा कि सुरक्षा अधिकारियों ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार जानकारी दी थी, लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त पुलिस बल मौके पर नहीं पहुंचा. अभिषेक का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती. उन्होंने यह भी दावा किया कि हमले के दौरान उनकी आंख में चोट लगी. उनके मुताबिक, यदि उन्होंने हेलमेट नहीं पहना होता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी. हालांकि उनके हौसले कमजोर नहीं हुए और उन्होंने साफ कहा कि वे इस मुद्दे को अदालत तक लेकर जाएंगे.
ममता बनर्जी ने भी साधा निशाना
घटना के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, 'शासक हत्यारे बन गए हैं, बीजेपी को शर्म आनी चाहिए.'. टीएमसी नेताओं ने भी लगातार आरोप लगाया कि यह हमला सुनियोजित था. पार्टी का कहना है कि विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. वहीं पार्टी के वरिष्ठ सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और केंद्र सरकार से जवाब मांगा.
विपक्षी दलों ने क्यों दिखाई एकजुटता?
इस घटना के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को हिंसा में बदलना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है. राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र और जनादेश पर हमला बताया. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी घटना की निंदा की और कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में कमी गंभीर सवाल खड़े करती है. शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने सांसदों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. वहीं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा को घेरा. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय बाद किसी एक मुद्दे पर विपक्षी दलों की इतनी व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली है. यही वजह है कि इस घटना को सिर्फ बंगाल की राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
बीजेपी ने क्या कहा?
टीएमसी के आरोपों के बीच बीजेपी नेताओं ने भी घटना की निंदा की. बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को यह समझने की जरूरत है कि जनता में नाराजगी क्यों बढ़ रही है. केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. उनका कहना था कि बंगाल की राजनीति को हिंसा से मुक्त करना समय की जरूरत है.
बंगाल की राजनीति में क्या होगा असर?
पश्चिम बंगाल लंबे समय से राजनीतिक हिंसा के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है. चुनावी दौर हो या उसके बाद का समय, हिंसा के आरोप अक्सर सामने आते रहे हैं. ऐसे में अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल पर बहस छेड़ दी है.
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बहरहाल, इस घटना की जांच और राजनीतिक बयानबाजी दोनों जारी हैं. लेकिन इतना साफ है कि इस मामले ने विपक्षी राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है. साथ ही यह भी दिखाया है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी आज भी विपक्षी राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रही है. आने वाले दिनों में यह विवाद सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़ा मुद्दा बन सकता है.