राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा मोड़! चंपत राय बनेंगे गवाह या सह आरोपी? जल्द होगा फैसला
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय की भूमिका जांच के केंद्र में है. पुलिस उन्हें मुख्य गवाह बना सकती है, जबकि जांच में सहयोग नहीं मिलने या साक्ष्यों के आधार पर उन्हें सह आरोपी भी बनाया जा सकता है.
Follow Us:
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है. इस मामले की जांच अब ऐसे चरण में पहुंच गई है, जहां श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है. जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चंपत राय इस मामले में मुख्य गवाह बनेंगे या फिर उन्हें सह आरोपी बनाया जाएगा. उम्मीद है कि आने वाले दिनो में इसकी तस्वीर साफ़ हो सकती है.
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अब तक चंपत राय ने पुलिस और एसआईटी को पूरा सहयोग दिया है. उन्होंने पूछताछ के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेज साझा किए हैं और जांच अधिकारियों के सवालों के जवाब भी दिए हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि यदि उनका सहयोग इसी तरह जारी रहता है, तो माना जा रहा है कि अभियोजन पक्ष उन्हेंकुछ दिनों में प्रमुख गवाह के तौर पर भी पेश कर सकता है.
जांच में क्यों अहम है चंपत राय की भूमिका?
पुलिस और एसआईटी की अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि चढ़ावा चोरी से जुड़े करीब 80 लाख रुपये चंपत राय ने ही संबंधित अधिकारियों को सौंपे थे. इसी घटनाक्रम के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया. शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्णमोहन की शिकायत पर आठ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ रामजन्मभूमि कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया. पुलिस पहले ही शिकायतकर्ता कृष्णमोहन का बयान दर्ज कर चुकी है. वहीं चंपत राय से भी रुपयों की बरामदगी और पूरे घटनाक्रम को लेकर कई दौर की पूछताछ की जा चुकी है. एसआईटी ने भी उनसे विस्तार से जानकारी ली है. इससे पहले पुलिस की 39 घंटे की पूछताछ में आरोपी टिन्नू यादव ने भी कई बड़े नाम को लेकर महत्वपूर्ण बातें पुलिस को बताई है. ऐसे में पुलिस उस आधार पर भी अपनी जाँच को आगे बढ़ा रही है.
वायरल वीडियो के बाद बढ़ी चर्चा
जांच के दौरान एक वीडियो भी चर्चा का विषय बना, जिसमें दावा किया गया कि 5 जून को चंपत राय पुलिस टीम के साथ चढ़ावा चोरी की जांच के लिए निकले थे. वीडियो में उन्हें एक झोला लेकर जाते हुए भी देखा गया. इसी आधार पर जांच एजेंसियां उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण मान रही हैं. माना जा रहा है कि अदालत में उनका बयान आरोपों की पुष्टि करने में अहम साबित हो सकता है. कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हो, तो उसे अदालत में गवाही देनी पड़ सकती है. हालांकि किसी व्यक्ति को आरोपी बनाया जाएगा या नहीं, इसका फैसला जांच में मिले सबूतों के आधार पर हो सकता है. इसका अंतिम निर्णय जांच में मिले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होता है.
कब सामने आया चढ़ावा चोरी का मामला?
जानकारी के मुताबिक, मंदिर के दानपात्रों में जमा चढ़ावे की गणना के दौरान बाथरूम में कुछ रुपये मिलने के बाद पूरे मामले पर संदेह गहराया. इसके बाद चंपत राय सक्रिय हुए और पुलिस के साथ मिलकर संदिग्ध लोगों की तलाश शुरू की गई. जांच के दौरान लगभग 80 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई. शुरुआत में ट्रस्ट की ओर से इस मामले को ज्यादा गंभीर नहीं बताया गया था. बाद में विवाद बढ़ने पर चंपत राय ने स्वयं राज्य सरकार से एसआईटी जांच कराने की सिफारिश की. एसआईटी की जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम तथ्य सामने आए, जिससे पूरे मामले की जांच तेज हो गई.
यह भी पढ़ें
बताते चलें कि अब सभी की नजर एसआईटी और पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है. इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि चंपत राय इस मामले में मुख्य गवाह की भूमिका निभाएंगे या फिर जांच एजेंसियां उन्हें सह आरोपी के रूप में शामिल करने का निर्णय लेंगी. फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा.