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शराब और वन भूमि घोटाले में आरोपी IAS विनय चौबे को राहत, सरकार ने खत्म किया निलंबन

शराब घोटाला और हजारीबाग में वन विभाग वन भूमि घोटाले से संबंधित मामले में जमानत मिलने के बाद रिहा हुए आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे ने गुरुवार को कार्मिक विभाग में योगदान दे दिया है.

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10 Sep 2026
( Updated: 10 Sep 2026
05:06 PM )
शराब और वन भूमि घोटाले में आरोपी IAS विनय चौबे को राहत, सरकार ने खत्म किया निलंबन
Image Credit: IANS
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झारखंड सरकार ने शराब घोटाला और हजारीबाग के वन भूमि घोटाले के आरोपी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विनय कुमार चौबे का निलंबन समाप्त कर दिया है. शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उन्हें 2025 में गिरफ्तार किया था. इसके बाद चौबे को निलंबित किया गया था. बाद में उन्हें वन भूमि घोटाले में भी आरोपी बनाया गया था.  

विनय चौबे का निलंबन समाप्त

अदालत से विभिन्न मामलों में नियमित जमानत मिलने और उनके जेल से बाहर आने के बाद सरकार ने निलंबन की अवधि की समीक्षा की तथा इसे समाप्त करने का आदेश जारी किया. निलंबन समाप्त होने के बाद उन्होंने कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में योगदान दे दिया है.

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शराब घोटाले में क्या हैं विनय कुमार चौबे पर आरोप?

विनय कुमार चौबे पर राज्य की पिछली शराब नीति के क्रियान्वयन के दौरान सरकारी राजस्व को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने और निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप हैं. एसीबी की जांच के मुताबिक, उन्होंने मैनपावर उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसियों के साथ कथित रूप से मिलकर एक आपराधिक साजिश रची, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को नुकसान हुआ.

इस मामले में पूछताछ के बाद एसीबी ने चौबे को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.

जमीन म्यूटेशन से जुड़े मामलों में भी आरोपी

विनय कुमार चौबे के खिलाफ जमीन के म्यूटेशन से संबंधित दो अन्य प्राथमिकी भी दर्ज की गई हैं. जांच एजेंसियों के आरोपों के अनुसार, पद और प्रभाव का कथित दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन के म्यूटेशन को मंजूरी दिलाई गई. एक अन्य मामले में आरोप है कि उनके करीबी लोगों और रिश्तेदारों के नाम पर नियमों की कथित अनदेखी करते हुए कीमती जमीनों का म्यूटेशन कराया गया.

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इन मामलों में अदालत से नियमित जमानत मिलने के बाद चौबे जेल से बाहर आए. फिलहाल चौबे ने कार्मिक विभाग में योगदान दे दिया है. हालांकि, सरकार की ओर से उन्हें नई जिम्मेदारी या नियमित पदस्थापना दिए जाने का आदेश अभी जारी होना बाकी है. मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही होगा.

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