एक साल में चार बार ट्रांसफर, इस बार तो 50 दिन भी पूरे नहीं कर पाईं, IAS नेहा मारव्या का छलका दर्द
. नेहा मारव्या के मुताबिक, उनको एक साल में चार बार ट्रांसफर लेटर मिल चुके हैं. उनका आरोप है कि उन्होंने अपने महकमें के अधिकारियों की शिकायत की थी, इसके बाद उन पर ही कार्रवाई हो गई.
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मध्य प्रदेश कैडर की IAS ऑफिसर नेहा मारव्या सिंह इन दिनों खासा चर्चा में हैं. वजह है उनका एक पोस्ट, जिसमें उन्होंने अपने साथ अन्याय होने का दावा करते हुए बहस को जन्म दे दिया है. नेहा मारव्या ने एक के बाद एक तबादलों से परेशान होकर महकमे के खिलाफ इमोशनल नोट शेयर किया है.
जिसमें उन्होंने बताया कि नई जगह जॉइनिंग करने के 50 दिन बाद ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया. नेहा मारव्या के मुताबिक, उनको एक साल में चार बार ट्रांसफर लेटर मिल चुके हैं. लगातार तबादलों के बाद वे तनावपूर्ण दौर से गुजर रही हैं. IAS अफसर नेहा मारव्या का ये दर्द उस वक्त सामने आया जब उन्होंने व्हॉट्सएप पर बने IAS अधिकारियों के एक चैट ग्रुप में अपना दर्द शेयर किया.
IAS ऑफिसर नेहा मारव्या ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए क्या कहा?
लेडी ऑफिसर ने अपने नोट में एसोसिएशन पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने और एकतरफा व्यवहार का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, ‘मेरा तबादला इसलिए किया गया क्योंकि जिन कर्मचारियों का कंट्रोल मेरे पास नहीं बल्कि विभाग के पास है, उन्होंने मेरे खिलाफ बगावत कर दी. वे मेरी डेस्क पर हाथ पटककर मुझे तबादला करवाने की धमकी दे रहे हैं.’
नई जगह से 50 दिनों में तबादला
अपने नोट में अफसर नेहा ने IAS एसोसिएशन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने पूछा, क्या एसोसिएशन का काम सिर्फ जन्मदिन की बधाई देना है? 5 सितंबर 2026 की तबादला सूची में अपना नाम दोबारा देखकर मैं बहुत परेशान हूं. नई जगह जॉईन करने के 50 दिनों के अंदर ही मेरा फिर ट्रांसफर कर दिया गया है.’
उनका कहना है कि हर बार ट्रांसफर को उन्होंने सम्मानपूर्वक स्वीकार किया है, लेकिन बार-बार ऐसा होने पर वह हतोत्साहित महसूस करने लगी हैं.
नेहा मारव्या सिंह ने दावा किया कि उन्होंने महकमें के कई अधिकारियों के खिलाफ दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज की थी. उन्होंने अधिकारियों के लापरवाह रवैये पर सवाल उठाए थे. इसके बाद उन्हें लगातार ट्रांसफर की धमकियां मिल रही थीं. उन्होंने अफसोस जताते हुए लिखा, लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन की बजाय उन्हीं का ट्रांसफर कर दिया गया. जो बेहद दुख भरा है.
नेहा मारव्या ने सवाल उठाए कि इस कदम से महकमें के अंदर और अधिकारियों के बीच क्या मैसेज जाएगा? उन्होंने कहा, क्या एक IAS अधिकारी इतना कमजोर है उसके अधीन काम करने वाले कर्मचारी भी उसके खिलाफ बगावत करेंगें और ट्रांसफर करवाने में सफल हो जाएंगे. लेडी अफसर ने दावा किया कि हर बार 2,3 महीने में ही उनका ट्रांसफर हो जाता है. जबकि इस पीरियड में वे केवल अपने कामकाज को भी ठीक से नहीं समझ पातीं. वे अपने मैसेज के आखिर में लिखती हैं, ‘हर बार साजिश करने वाले जीत जाते हैं और वो असफल हो जाती हैं. आज वे निशाने पर हैं कल कोई दूसरा IAS अधिकारी निशाने पर होगा.’
एमपी की IAS अफसर नेहा मारव्या का ये मैसेज अब केवल एक व्हाट्सएप ग्रुप तक सीमित नहीं है, इसकी चर्चा प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों तक हो रही है.
कौन हैं नेहा मारव्या सिंह?
नेहा मारव्या सिंह 2011 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी हैं. उन्होंने मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) और इलाहाबाद से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 15 साल के करियर में उनके कई तबादले हुए हैं. जनवरी 2025 में 14 साल की सेवा के बाद उन्हें पहली फील्ड पोस्टिंग मिली जब उन्हें डिंडोरी का कलेक्टर बनाया गया, लेकिन करीब 8 महीने बाद हटा दिया गया. उसके बाद आदिम जाति/जनजातीय मामलों से जुड़े पदों पर रहीं.
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सितंबर 2026 तक उनका एक साल में चौथी बार तबादला किया गया. वे आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाओं की संचालक और MAPCET के अतिरिक्त प्रभार पर थीं. जहां ज्वॉइन किए सिर्फ करीब 50 दिन हुए थे. अब उन्हें मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम का प्रबंध संचालक (अपर सचिव समकक्ष) बनाया गया है.
नेहा मारव्या से जुड़े विवाद
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IAS अफसर के नोट पर कुछ लोग महकमे और सरकार पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ उन्हीं की कार्यशैली को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं. नेहा मारव्या का नाम कई विवादों से भी जुड़ा है.
साल 2017 में उन्होंने शिवपुरी जिला पंचायत CEO रहते हुए तत्कालीन कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव की सफारी गाड़ी का बिल पास करने से इंकार कर दिया था. यह विवाद काफी सुर्खियों में रहा था. वहीं, एक कर्मचारी ने लंबित समस्याओं के कारण इच्छा मृत्यु की धमकी दी थी, जिस पर नेहा ने पीड़ित के खिलाफ FIR दर्ज कराई. वहीं, खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के कार्यक्रम के लिए अनुमति न देने को लेकर भी मतभेद हुआ था.