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TMC सांसद नदीमुल हक से जुड़े ठिकानों पर ED की छापेमारी, दिल्ली-रांची और कोलकाता में 7 जगहों पर कार्रवाई

3 सितंबर को ईडी अधिकारियों ने कोलकाता में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया. यह एक प्राइवेट कंपनी की ओर से कथित तौर पर 290 करोड़ रुपए के बैंक-लोन धोखाधड़ी से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा था.

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07 Sep 2026
( Updated: 07 Sep 2026
12:58 PM )
TMC सांसद नदीमुल हक से जुड़े ठिकानों पर ED की छापेमारी, दिल्ली-रांची और कोलकाता में 7 जगहों पर कार्रवाई
Image Credit: IANS
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद नदीमुल हक से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है. ईडी से जुड़े सूत्रों ने सोमवार सुबह जानकारी दी कि एजेंसी ने दिल्ली, रांची और कोलकाता में सात अलग-अलग जगह पर कार्रवाई की है.

TMC सांसद से जुड़े ठिकानों पर ED की छापेमारी

यह मामला सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली सामग्री के प्रकाशन/प्रसार से जुड़े आरोपों से संबंधित है. इसमें गैर-कानूनी लेन-देन, बिना हिसाब-किताब वाले नकद लेन-देन और संदिग्ध स्रोतों से फंडिंग के आरोप भी शामिल हैं. इसी सिलसिले में ईडी ने विधाननगर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर दर्ज किया था.

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गौरतलब है कि हाल ही में ईडी मनी-लॉन्ड्रिंग के कई मामलों को लेकर पश्चिम बंगाल में फिर से सक्रिय है. इससे पहले, ईडी की एक टीम रविवार सुबह से उत्तरी कोलकाता में शेयर ट्रेडिंग और मनी मार्केट के काम से जुड़े एक बिजनेस परिवार के घर पर तलाशी अभियान चलाया. इस छापेमारी में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के जवानों के बजाय ईडी टीम के साथ कोलकाता पुलिस के जवान मौजूद थे.

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290 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड की भी जांच

पता चला है कि केंद्रीय एजेंसी के पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय के ईडी अधिकारियों की एक टीम पहले फूलबागान पुलिस स्टेशन पहुंची थी, जिसके अधिकार क्षेत्र में बिजनेस परिवार का घर आता है. वहां जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ईडी के अधिकारियों और फूलबागान थाने की पुलिस टीम कांकुरगाछी में स्थित 'शिवम' भवन पहुंची.

वहीं, 3 सितंबर को ईडी अधिकारियों ने कोलकाता में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया. यह एक प्राइवेट कंपनी की ओर से कथित तौर पर 290 करोड़ रुपए के बैंक-लोन धोखाधड़ी से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा था.

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प्राइवेट कंपनी ने झारखंड में 66 एमडब्ल्यू का पावर प्लांट लगाने के लिए बैंकों से लोन लिया था. आरोप है कि लोन की रकम को ग्रुप की दूसरी कंपनियों और निजी इस्तेमाल के लिए 'डायवर्ट' कर दिया गया था.

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