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‘कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे…’, जिनपिंग के दिल्ली दौरे से पहले भारत का सख़्त रुख, अरुणाचल मुद्दे पर चीन को चेताया
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की हरकत पर भारत ने सख्त रुख़ अपनाया है. शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे से पहले ये स्टैंड लेकर बीजिंग के सामने लक्ष्मण रेखा खींच दी है और चेता दिया है कि घुसपैठ कतई स्वीकार्य नहीं है.
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NSA अजित डोभाल के हाल में ही हुए उच्च स्तरीय बीजिंग दौरे के बाद भारत ने अरुणाचल प्रदेश में कथित चीनी सेना की घुसपैठ को लेकर चीन को चेतावनी दी है. ये डेवलपमेंट ऐसे समय में आई है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आने वाले हैं.
भारत ने अरुणाचल पर चीन को चेताया
अरुणाचल मुद्दे पर भारत ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि उसकी सेना को दो टूक संदेश दिया है कि ऐसी हरकतें कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों की बहाली केवल भारत की जिम्मेदारी नहीं, चीन को भी उसके लिए पहल करनी होगी. इतना ही नहीं भारतीय पक्ष की ओर से चेता दिया गया कि भविष्य में इस तरह की हरकतें दोबारा ना हो.
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अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन के बीच पहली कोर कमांडर लेवल की बैठक
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इसी बीच भारत और चीन की सेनाओं के बीच रविवार को अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े मुद्दों को लेकर महत्वपूर्ण सैन्य वार्ता हुई. दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर कोर कमांडर स्तर की इस पहली बैठक में हिस्सा लिया. सेना के पूर्वी सेक्टर में इस स्तर की यह पहली बैठक है.
LAC मुद्दे पर चीन के साथ हाई लेवल टॉक
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यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब क्षेत्र में भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर कुछ मुद्दे अब भी बने हुए हैं. माना जा रहा है कि 6 सितंबर को हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने क्षेत्र में जारी मुद्दों पर चर्चा की. वार्ता में मुद्दों को सुलझाने की दिशा में बातचीत की गई. बैठक भारतीय क्षेत्र में स्थित वाचा सीमा बैठक स्थल पर आयोजित की गई. इस सैन्य वार्ता में भारतीय पक्ष का नेतृत्व तीसरी कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया ने किया.
चीनी सेना की घुसपैठ पर भारतीय सेना ने बदली अपनी रणनीति
अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा और सैन्य जिम्मेदारियों को भारतीय सेना की दो प्रमुख कोर संरचनाएं संभालती हैं. इनमें तेजपुर स्थित चौथी कोर और रंगापाहर स्थित तीसरी कोर शामिल हैं. इस क्षेत्र में चीनी सैनिकों की ओर से अपनाए जा रहे रुख को लेकर भारतीय सेना ने बेहद दृढ़ और स्पष्ट रुख अपनाया है. भारतीय के इस रुख ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह सुरक्षा और ऑपरेशनल हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी. अलग-अलग धारणाएं कई बार सीमा पर गश्त, सैनिकों की गतिविधियों और इलाके में मौजूदगी को लेकर विवाद की स्थिति पैदा करती हैं.
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दरअसल, अब तक भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ताएं मुख्य रूप से लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक स्थल पर होती रही हैं. यहां वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों सेनाओं के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. इस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिक हताहत हुए थे. गलवान घटना के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की.
गलवान झड़प के बाद भारत ने की चीनी सीमाओं पर व्यापक तैनाती
साथ ही पर्वतीय युद्ध के लिए अपनी सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया. भारत ने चीन की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के किसी भी प्रयास का कड़ा जवाब दिया था. वहीं अब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने और शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है.
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डोभाल के चीन दौरे के बाद भारत का स्टैंड क्लियर!
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा के बाद दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी. इसी व्यापक प्रक्रिया के बीच अरुणाचल प्रदेश में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठक होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष पूर्वी सेक्टर में की समस्याओं को सैन्य स्तर की सीधी बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस बीच कुछ ही दिन पहले भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने तीसरी कोर मुख्यालय का दौरा किया था. रंगापाहर स्थित तीसरी कोर पहुंचने पर उन्हें क्षेत्र में सैन्य तैयारियों, ऑपरेशनल स्थिति और युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की थी.
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सेना की यह तीसरी कोर अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के संवेदनशील हिस्सों की निगरानी और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और चीन के साथ सीमा विवाद को देखते हुए यहां सैनिकों की परिचालन तैयारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. 2020 के गलवान संकट के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में अपनी सैन्य तैनाती और परिचालन रणनीति में व्यापक बदलाव किए थे.
भारत ने स्ट्राइक कोर में किया बड़ा बदलाव!
चीन की ओर से बड़ी संख्या में सैनिकों को आगे बढ़ाकर वास्तविक नियंत्रण रेखा की मौजूदा स्थिति को बदलने के प्रयास के जवाब में भारत ने भी अपनी सैन्य क्षमता और तैनाती को मजबूत किया. पर्वतीय युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपनी स्ट्राइक कोर की जिम्मेदारियों का पुनर्संतुलन भी किया था. इसका उद्देश्य ऊंचाई वाले इलाकों में तेजी से सैनिकों की तैनाती, बेहतर युद्ध क्षमता और किसी भी आकस्मिक स्थिति का प्रभावी ढंग से जवाब देने की क्षमता को मजबूत करना था.
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भारत-चीन सीमा विवाद सबसे संवेदनशील मुद्दा
अरुणाचल प्रदेश में अब कोर कमांडर स्तर की सीधी बातचीत शुरू होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र भारत-चीन सीमा विवाद के सबसे संवेदनशील हिस्सों में शामिल है. रविवार की बैठक से दोनों पक्षों के बीच जमीनी स्तर पर संवाद का एक नया सैन्य माध्यम खुला है. इसके जरिए स्थानीय स्तर के विवादों और एलएसी पर बनी अलग-अलग धारणाओं से पैदा होने वाली समस्याओं को बातचीत के माध्यम से नियंत्रित करने की कोशिश की जा सकती है.
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इससे पहले पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि चीन के साथ सीमा विवाद के मुद्दे पर अब भी असहमति बनी हुई है. हालांकि उन्होंने कहा था कि द्विपक्षीय रिश्तों को सीमा पर विवाद के हवाले नहीं किया जा सकता है.