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सऊदी अरब और लाल सागर में हूतियों ने बरपाया कहर...हवा में उड़ा इस्लामिक नाटो, मक्का एग्रीमेंट का क्या होगा?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की का इस्लामिक नाटो का ख्वाब हवा में उड़ गया है. हूती विद्रोहियों ने सऊदियों पर ऐसा हमला बोला है कि मक्का एग्रीमेंट के अस्तित्व पर ही सवाल उठ गया है. पूछा जा रहा है कि अब इसका क्या होगा?
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लाल सागर में गुजर रहे व्यापारिक जहाजों और सऊदी अरब के शहरों पर हूती समूहों ने बड़ा हमला किया है. यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने मंगलवार को कहा कि हूती समूह की ओर से सऊदी अरब पर किए गए हमले 'खतरनाक रूप से तनाव बढ़ाने वाले' हैं.
हूतियों का सऊदी पर बड़ा हमला!
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक पोस्ट में गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि हूती समूह की बढ़ती सैन्य गतिविधियां और सऊदी अरब, उसकी राष्ट्रीय संपत्तियों, नागरिकों तथा वहां रहने वाले लोगों को निशाना बनाने की कोशिशें 'आक्रामक और गैर-जिम्मेदाराना रवैये' को दर्शाती हैं.
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ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी को फिर बनाया निशाना!
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सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अल-मलिकी ने कहा कि हालिया हमलों में आभा, खमीस मुशैत, जाजान और नज्रान शहरों के नागरिक और आर्थिक महत्व वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया. इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 73 नागरिक घायल हुए हैं. उन्होंने कहा कि ये हमले सऊदी अरब की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और वहां के नागरिकों व निवासियों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा करते हैं.
अल-मलिकी ने कहा कि गठबंधन की संयुक्त सेना कमान हूती समूह को रोकने, खतरे के स्रोतों का जवाब देने और उनके खतरे को समाप्त करने के लिए जरूरी सैन्य कदम उठाएगी.
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सऊदी ठिकानों, कंपनियों को निशाना बना रहे हूती विद्रोही
दूसरी ओर, हूती समूह ने मंगलवार को दावा किया कि उसने सऊदी अरब में कई ठिकानों पर हमला किया है. हूती संचालित मीडिया आउटलेट 'अंसारुल्लाह' के अनुसार, हमलों में अभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, किंग खालिद एयर बेस और सरकारी तेल कंपनी अरामको की अभा और जजान स्थित सुविधाएं शामिल थीं.
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का एग्रीमेंट के जरिए खूब हल्ला मचाया कि वो इसके जरिये वे अपने पड़ोसियों पर दबाव बना पाएंगे, लेकिन सारे ख्वाब हवा हो गए. एक विद्रोही संगठन हूती ने तीन देशों की फौज और खोखले दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं.
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अब मक्का एग्रीमेंट का क्या होगा?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मक्का डिफेंस एग्रीमेंट को नाटो की तरह एक नए सामूहिक सुरक्षा ढांचे के तौर पर देखा जा रहा है. ऐसा इसलिए भी सऊदी और तुर्की, दोनों को ही ईरान के खित्ते में बढ़ते प्रभाव, ताकत और खतरे से सुरक्षा चाहिए. साझा खतरे ने सऊदी अरब और तुर्की जैसे प्रतिद्वंदी देशों को एका साथ ला दिया. जबकि पाकिस्तान को पैसा चाहिए, जहां से मिलेगा, वहां जाएगा. जहां तक सऊदी की बात है तो उसके पास पेट्रो डॉलर यानी कि अकूत पैसा और रणनीतिक लोकेशन है, जबकि तुर्की के ऑटोमन अंपायर के वक्त से क्षेत्र की बड़ी और आधुनिक सेना है, ड्रोन टेक्नोलॉजी में भी वो लीडिंग पोजिशन में है. जबकि पाकिस्तान परमाणु हथियारों से लैस ऐसा देश है जो इसे पैसे के लिए गिरवी रखने के लिए तैयार है..
इस लिहाज से इस समझौते में सामूहिक रक्षा का सिद्धांत रखा गया है. यानी किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा. लेकिन अब सवाल उठ रहे हें कि ईरान के हमले और हूती विद्रोहियों के बार-बार के हमले के बाद यह एग्रीमेंट कहां जाएगा, इसका क्या होगा. यही इस गठबंधन की असली परीक्षा है.
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हवा में उड़ा इस्लामिक नाटो का ख्वाब?
बड़ा सवाल ये है कि अब कथित इस्लामिक नाटो यानी कि मक्का समझौते का क्या होगा? क्योंकि सऊदी अरब ऐसे ही दो रक्षा समझौते कर चुका है, जिसके बारे में ढोल पीटा गया कि अगर एक पर हमला होगा तो दूसरे पर भी हमला माना जाएगा. सबसे पहले पाकिस्तान के साथ म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट किया गया और फिर बीते 7 अगस्त को मक्का पैक्ट के जरिए तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी ने इस्लामिक नाटो वाले अलायंस की का ऐलान किया. इसके प्रभाव में आने के बाद से ईरान और उसके यमनी प्रॉक्सी हूती विद्रोही कई बार सऊदी पर हमले कर चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान-तुर्की की चूं तक नहीं निकली है.
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अब देखना यह है कि क्या तुर्की और पाकिस्तान इस हमले को सिर्फ सऊदी अरब और हूतियों के बीच का संघर्ष मानेंगे? या मक्का समझौते के सामूहिक रक्षा सिद्धांत को जमीन पर उतारेंगे? इससे एक दिन पहले, सोमवार को हूती समूह ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया था कि उसने युद्ध प्रभावित यमन के कई प्रांतों में हवाई हमले और क्रूज मिसाइल हमले किए हैं. उसी दौरान सरकारी बलों और हूती लड़ाकों के बीच संघर्ष कई मोर्चों पर फैलता जा रहा था.