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खून और पानी साथ नहीं बहेंगे- ‘सिंदूर’ की बरसी पर भारत ने रोका रावी का पानी, अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान

भारत ने शाहपुर कंडी बांध के जरिए रावी नदी का वह पानी रोक लिया है जो अब तक पाकिस्तान जा रहा था, ताकि उसका इस्तेमाल अब जम्मू-कश्मीर और पंजाब की प्यास बुझाने और सिंचाई के लिए किया जा सके.

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07 May 2026
( Updated: 07 May 2026
09:10 PM )
खून और पानी साथ नहीं बहेंगे- ‘सिंदूर’ की बरसी पर भारत ने रोका रावी का पानी, अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान
Image Source: IANS
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आजादी के बाद यह पहला ऐतिहासिक मौका है जब रावी नदी के पानी को पूरी तरह रोककर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के विकास के लिए समर्पित किया गया है. सिंधु जल संधि के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए भारत ने शाहपुर कंडी बैराज परियोजना को मुकम्मल किया है. रावी का जो पानी अब तक व्यर्थ बहकर पाकिस्तान चला जाता था, वह अब कठुआ स्थित उझ बैराज में गर्जना कर रहा है. सांबा और कठुआ के कंडी क्षेत्रों में आज किसानों के चेहरे पर खुशी है, क्योंकि अब खेतों की किस्मत मानसून के भरोसे नहीं बल्कि रावी की धारा पर टिकी होगी.

पंजाब और जम्मू-कश्मीर के लिए खुशखबरी

बता दें कि इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से सिंचाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आने तय हैं. इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की लगभग 32,000 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का लाभ मिलेगा, वहीं, पंजाब की 5,000 हेक्टेयर जमीन के लिए भी बारहमासी पानी उपलब्ध होगा.

206 मेगावाट बिजली का भी होगा उत्पादन

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सिंचाई के साथ ही यह प्रोजेक्ट 206 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी करेगी, जिससे क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती मिलेगी. उझ बैराज जो पहले केवल बरसात के 2-3 महीनों तक ही सक्रिय रहता था, अब नई नहर के माध्यम से साल भर पानी से लबालब रहेगा.

पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार ने उठाए कड़े कदम

गौरतलब हो कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने जल नीति में कठोर रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करना शुरू किया है. अब केवल रावी, सतलुज और ब्यास ही नहीं, बल्कि चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर भी भारत अपनी लंबित परियोजनाओं को तेजी के साथ आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. 

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भारत की वॉटर डिप्लोमेसी से पाकिस्तान में गहराया जल संकट

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भारत की यह 'वॉटर डिप्लोमेसी' पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. अब तक भारत के हिस्से का अतिरिक्त पानी मुफ्त में इस्तेमाल करने वाले पाकिस्तान को अब गंभीर जल संकट और कृषि चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. भारत के लिए यह कदम खाद्य सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सामरिक शक्ति का एक बेजोड़ संगम है.

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