ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा, रेस में एंडी बर्नहैम सबसे आगे, 10 साल में 5 प्रधानमंत्रियों ने छोड़ा पद
ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने ब्रिटेन के पीएम के पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक अगले प्रधानमंत्री की रेस में बर्नहैम का नाम सबसे आगे चल रहा है. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 10 साल में 6 प्रधानमंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा है.
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मंगलवार को इस्तीफे का ऐलान कर दिया है. ब्रिटिश मीडिया के अनुसार, यूके की विदेश सचिव येवेट कूपर ने सोमवार को स्टार्मर को पद छोड़ने के लिए कहा था. स्टार्मर बीते 10 सालों में ब्रिटेन के पीएम पद से इस्तीफा देने वाले सातवें व्यक्ति हैं.
कीर स्टार्मर ने पद से दिया इस्तीफा
स्काई न्यूज के अनुसार, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि वह लेबर पार्टी के नेता का पद छोड़ देंगे. उन्होंने यह मान लिया है कि उनकी पार्टी अब यह नहीं मानती कि वह अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हैं.
स्टार्मर के सबसे सीनियर मंत्रियों में से एक कूपर ने पिछले हफ्ते के अंत में स्टार्मर को प्राइवेट तौर पर यह मैसेज दिया. समर्थकों से बात करते हुए कीर स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने जो भी फैसले लिए, वे देश को सबसे पहले रखने की इच्छा से लिए थे. उन्होंने कहा, "मैंने अपनी पार्टी से जवाब सुना है और मैं उस जवाब को खुशी-खुशी स्वीकार करता हूं."
अगले प्रधानमंत्री के चयन तक कार्यवाहक PM रहेंगे स्टार्मर
स्टार्मर ने सत्ता का सही तरीके से बदलाव सुनिश्चित करने का वादा किया है. वह लेबर पार्टी के अगले नेता और प्रधानमंत्री के आने तक इस पद की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे. उन्होंने कहा कि उनके बाद आने वाले को ऐसा ब्रिटेन विरासत में मिलेगा जो दो साल पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत और सही होगा. कीर स्टार्मर ने पार्टी की कमान संभालने के दौरान छह साल तक अपने दोस्तों, साथ काम करने वालों, डाउनिंग स्ट्रीट के स्टाफ और सिविल सर्विस को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया.
कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी का खत्म कर दिया था सूखा
महज दो वर्ष पहले कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी को बंपर चुनावी जीत दिलाई थी; पार्टी को 174 सीटों के साथ बहुमत मिला. उस समय इसे लेबर के लिए एक निर्णायक राजनीतिक वापसी माना गया था. इसके बावजूद उनका कार्यकाल कई विवादों और नीतिगत बदलावों के कारण लगातार दबाव में रहा.
कौन से मुद्दे स्टार्मर को पड़े भारी?
कई नीतिगत यू-टर्न्स और विवादों का सामना उनकी सरकार को करना पड़ा. बुजुर्गों के लिए विंटर फ्यूल भुगतान से जुड़े फैसले और वॉशिंगटन में पीटर मैंडेलसन को ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने का निर्णय सबसे ज्यादा विवाद का सबब बना. इन घटनाओं ने स्टार्मर की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े किए और पार्टी के भीतर असंतोष को बढ़ाया.
हाल के जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है जबकि प्रधानमंत्री स्टार्मर की व्यक्तिगत लोकप्रियता भी गिरी. इसी बीच, रिफॉर्म यूके दल लगातार 300 से अधिक राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में बढ़त बनाए हुए है, जिससे राजनीतिक परिदृश्य और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है.
पार्टी के कई सांसदों का मानना है कि यदि नेतृत्व में बदलाव नहीं किया गया, तो आगामी चुनावों में लेबर पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है और 'रिफॉर्म यूके' के नेता नाइजल फैराज के सत्ता में आने की संभावना बढ़ सकती है. इसी वजह से पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज होती जा रही है. इसमें एंडी बर्नहैम का नाम सबसे ऊपर है.
एंडी बर्नमैन पीएम पद की रेस में सबसे आगे
मई में भी स्टार्मर पर दबाव था लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था लेकिन इस बार बात कुछ अलग है. हाल ही में उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड निर्वाचन क्षेत्र में हुए उपचुनाव में अच्छी खासी जीत हासिल की. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने टक्कर में खड़े रिफॉर्म यूके के कैंडिडेट को पराजित किया, वो भी ऐसे समय में जब लेबर पार्टी की साख लगातार गिर रही है. इससे पहले वे ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में कार्यरत थे जो ब्रिटेन के सबसे बड़े और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों में से एक है.
56 वर्षीय बर्नहैम को अब लेबर पार्टी के भीतर एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है, जो ब्रिटेन की आर्थिक दिशा को नए सिरे से परिभाषित करने की क्षमता रखते हैं. उनके समर्थक उनके दृष्टिकोण को "मैनचेस्टरिज्म" नाम दे रहे हैं, जो मैनचेस्टर के तीव्र आर्थिक विकास और शहरी पुनर्निर्माण के अनुभवों पर आधारित एक मॉडल है.
इस विचारधारा का उद्देश्य ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पुनर्गठित करना है, जो वर्षों से धीमी वृद्धि, अस्थिर नीतियों और सार्वजनिक वित्त पर दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है. बर्नहैम के समर्थकों का मानना है कि मैनचेस्टर के सफल विकास मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करके आर्थिक असमानताओं को कम किया जा सकता है और क्षेत्रीय विकास को गति दी जा सकती है.
पाकिस्तानी मूल की शबाना महमूद का नाम भी चर्चा में!
बर्नमैन के अलावा ब्रिटेन की वर्तमान गृह मंत्री (Home Secretary) शबाना महमूद (Shabana Mahmood) के भी नाम की पीएम की रेस के लिए चर्चा में है. हालांकि उनकी दावेदारी कितनी दमदार है, ये आने वाले समय में पता चलेगा. महमूद ने सितंबर 2025 में यह पद संभाला था. वे लेबर पार्टी की वरिष्ठ नेता और बर्मिंघम लेडीवुड से सांसद हैं.
ऋषि सुनक ने पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी!
स्टार्मर के इस्तीफे की सुगबुगाहट ब्रिटेन के पूर्व कंजर्वेटिव प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के एक लेख से लगी थी, जिसमें उन्होंने संडे टाइम्स में प्रकाशित लेख के माध्यम से लेबर नेता एंडी बर्नहैम को महत्वपूर्ण राजनीतिक सलाह दी थी. सुनक ने अपने अनुभवों के आधार पर सत्ता, नेतृत्व और राजनीतिक वैधता को लेकर कई विचार साझा किए.
उन्होंने चेतावनी दी कि उनके आसपास के लोग उन्हें प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने के लिए राजनीतिक दबाव, मंत्रियों के इस्तीफे और अन्य तरीकों का सहारा ले सकते हैं, लेकिन बर्नहम को “डिफॉल्ट” स्थिति में प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए.
सुनक ने अपने 2024 के आम चुनाव में लेबर नेता कीर स्टार्मर से मिली हार का भी परोक्ष रूप से संदर्भ दिया, जिसमें कंजर्वेटिव पार्टी को अपने संसदीय इतिहास की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद, वे अभी भी रिचमंड और नॉर्थएलर्टन से सांसद के रूप में कार्यरत हैं.
लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गहरी अनिश्चितता बनी हुई है. पार्टी नियमों के अनुसार, किसी भी नेतृत्व चुनौती के लिए कम से कम 20 प्रतिशत सांसदों का समर्थन आवश्यक है, यानी लगभग 81 सांसदों की सहमति जरूरी है. स्वास्थ्य मंत्री रहे वेस स्ट्रीटिंग ने भी नेतृत्व की दौड़ में शामिल होने की इच्छा जताई है, लेकिन उनके समर्थन को लेकर संशय बना हुआ है, क्योंकि कई सांसद संभावित विजेता के पक्ष में झुकते दिख रहे हैं.
सत्ता के लिए नहीं, बेहतर ब्रिटेन के लिए संभाली थी जिम्मेदारी: स्टार्मर
इसी बीच कीर स्टार्मर ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए ब्रिटिश पीएम ने अपने भाषण में कहा कि दो वर्ष पहले देश के प्रधानमंत्री के रूप में इस मार्ग पर कदम रखना उनके जीवन का सबसे गौरवपूर्ण क्षण था. समर्थकों से बात करते हुए, स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने जो भी फैसले लिए, वे देश को सबसे पहले रखने की इच्छा से लिए थे. उन्होंने कहा, "मैंने अपनी पार्टी से जवाब सुना है और मैं उस जवाब को खुशी-खुशी स्वीकार करता हूं."
Watch: On his resignation as leader of the governing Labour Party, Prime Minister of the United Kingdom Keir Starmer says, "Walking up this street two years ago was the proudest moment of my life. A new Labour government. The first in 14 years. A page in our country's history… pic.twitter.com/ZybiBZ7cpb
— IANS (@ians_india) June 22, 2026
पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा, "दो साल पहले प्रधानमंत्री का पद संभालने मेरी जिंदगी का सबसे गर्व का पल था. 14 वर्षों बाद एक नई लेबर सरकार सत्ता में आई. वर्षों की निराशा और मायूसी के बाद हमारे देश के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हुआ. हमें लाखों लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने का अवसर मिला और यही वजह थी कि मैं राजनीति में आया था."
स्टार्मर ने लेबर पार्टी को कोसा!
उन्होंने कहा कि यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. उन्होंने कहा, "छह साल पहले मुझे ऐसी लेबर पार्टी विरासत में मिली थी, जो राजनीतिक, आर्थिक और नैतिक रूप से लगभग दिवालिया हो चुकी थी. मुझे बार-बार कहा गया कि मेरी पार्टी खत्म हो गई है, हम इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं और आम चुनाव में बहुमत हासिल करना तो दूर, सत्ता में वापसी भी नामुमकिन है. लेकिन हमने उन सभी को गलत साबित कर दिया."
स्टार्मर ने कहा, "पार्टी से एंटीसेमिटिज्म (यहूदी-विरोधी भावना) के जहर को बाहर निकालना, अर्थव्यवस्था, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर जनता का भरोसा फिर से हासिल करना और ऐसी पार्टी का निर्माण करना जो गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज के साथ खड़ी हो, यह बदलाव की कठिन प्रक्रिया का हिस्सा था. इसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि ब्रिटेन को बेहतर बनाना था. ऐसा ब्रिटेन, जहां हर व्यक्ति को सम्मान मिले, हर किसी की अहमियत हो और समृद्धि व अवसर केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहकर सभी के लिए उपलब्ध हों."
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महज दो वर्ष पहले स्टार्मर ने लेबर पार्टी को बंपर चुनावी जीत दिलाई थी. लेबर पार्टी को 174 सीटों के साथ बहुमत मिला. उस समय इसे लेबर के लिए एक निर्णायक राजनीतिक वापसी माना गया था. हालांकि, उनका कार्यकाल कई विवादों और नीतिगत बदलावों के कारण लगातार दबाव में रहा.