80 मिनट की बातचीत में बढ़ गया तनाव! ट्रंप की चेतावनी पर भड़का ईरान, बीच में छोड़ दी बैठक; जानें पूरा मामला
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में पहले दौर की वार्ता हुई. बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी नेताओं मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ व अब्बास अराघची शामिल हुए.
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मिडिल ईस्ट में पिछले कई महीनों से जारी तनाव को कम करने की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई पहली उच्चस्तरीय बैठक उम्मीदों के मुताबिक सफल नहीं रही. दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने संघर्ष खत्म करने और आपसी मतभेद कम करने पर चर्चा की, लेकिन बातचीत के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए जिन्होंने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया.
कौन-कौन हुआ बैठक में शामिल?
दरअसल, रविवार को आयोजित इस बैठक में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हुए, जबकि ईरान का प्रतिनिधित्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया. यह वार्ता हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के बाद आयोजित की गई थी. माना जा रहा था कि यह बैठक चार महीने से जारी क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, लेकिन शुरुआत से ही कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद दिखाई दिए.
लेबनान को लेकर ईरान ने जताई कड़ी आपत्ति
बैठक शुरू होने से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ अलग-अलग बातचीत की. इसके बाद ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका के साथ आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह समझौते की शर्तों को कितनी गंभीरता से लागू करता है. विशेष रूप से लेबनान में इजरायली सैन्य गतिविधियों को लेकर ईरान ने अपनी चिंता खुलकर व्यक्त की. ईरान का आरोप है कि अमेरिका अब तक संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावी सीजफायर लागू कराने में सफल नहीं हुआ है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि जमीन पर हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं. यही मुद्दा वार्ता के दौरान सबसे बड़ा विवाद बनकर सामने आया.
ट्रंप के बयान से बिगड़ा माहौल
करीब 80 मिनट तक चली इस बैठक में प्रतिबंधों में राहत, ईरान की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. हालांकि बातचीत उस समय अचानक तनावपूर्ण हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर ईरान से लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को नियंत्रित करने की बात कही. ईरान ने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताया और नाराजगी जताई. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ समय के लिए बैठक छोड़कर बाहर चला गया. हालांकि बाद में बातचीत फिर शुरू हुई. बैठक के बाद मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिका को अपने सार्वजनिक बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है.
अमेरिका ने क्या कहा?
दूसरी ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पूरे घटनाक्रम को सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया. उनका कहना था कि कठिन वार्ताओं में मतभेद और तनाव असामान्य नहीं होते. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी टीम को ईरान के साथ संबंध सुधारने के लिए नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के निर्देश दिए हैं. तनाव का असर केवल बैठक कक्ष तक सीमित नहीं रहा. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित सांकेतिक हैंडशेक और संयुक्त तस्वीर खिंचवाने से भी इनकार कर दिया. इससे साफ संकेत मिला कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है.
इजरायल का रुख भी बना चिंता का कारण
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी संकेत दिया कि दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य मौजूदगी फिलहाल जारी रहेगी. उनका कहना है कि इजरायल अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने तक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा.
तेल बाजार पर दिखा तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दिया. निवेशकों की चिंता बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया. ब्रेंट क्रूड का भाव 81 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया और एक ही दिन में इसमें एक डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई.
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बहरहाल, दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हुई है. यदि दोनों देश अपने मतभेद कम करने में सफल होते हैं तो मिडिल ईस्ट में स्थिरता की नई उम्मीद पैदा हो सकती है. लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि शांति की राह अभी भी आसान नहीं है.