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स्कैमर्स का गेम ओवर! WhatsApp को डिवाइस ID ब्लॉक करने का आदेश, डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सरकार सख्त

WhatsApp: सरकार ने अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे WhatsApp पर इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का फैसला लिया है. अच्छी बात यह है कि सरकार ने अब इस पर सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए है, ताकि आम लोगों को इस जाल से बचाया जा सके.

स्कैमर्स का गेम ओवर! WhatsApp को डिवाइस ID ब्लॉक करने का आदेश, डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सरकार सख्त
Image Source: Social Media
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WhatsApp: आजकल एक नया साइबर ठगी का तरीका बहुत तेजी से फ़ैल रहा है, जिसे डिजिटल अरेस्ट स्कैम कहा जाता है. इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकार बताकर आपको डरते है और यही डर उनका सबसे बड़ा हथियार होता है. अच्छी बात यह है कि सरकार ने अब इस पर सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए है, ताकि आम लोगों को इस जाल से बचाया जा सके. 

सरकार का बड़ा कदम क्या है?

सरकार ने अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे WhatsApp पर इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध डिवाइस IDs को ब्लॉक करने का फैसला लिया है. यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि साइबर अपराधी बार-बार नए अकाउंट बना लेते हैं, लेकिन अगर उनके डिवाइस को ही ब्लॉक कर दिया जाए, तो वे दोबारा आसानी से वापसी नहीं कर पाएंगे. इसके अलावा:

1.फर्जी ऐप्स और खतरनाक APK फाइल्स की पहचान करके उन्हें ब्लॉक किया जाएगा.
2.डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा कुछ समय तक सुरक्षित रखने पर जोर है, ताकि जांच में मदद मिल सके.
3.सेफ्टी फीचर्स को और मजबूत बनाने की योजना है.

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डिवाइस ID आखिर होता क्या है?

इसे आप अपने फोन की पहचान- जैसे हर इंसान का आधार नंबर होता है, वैसे ही हर मोबाइल या गैजेट की अपनी एक यूनिक पहचान होती है. कुछ आम डिवाइस IDs:
IMEI नंबर -  आपके फोन की मोबाइल नेटवर्क पर पहचान
MAC एड्रेस - Wi-Fi और नेटवर्क के लिए पहचान
सीरियल नंबर - कंपनी द्वारा दिया गया यूनिक नंबर
Advertising ID - ऐप्स और विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल होता है
अगर ये IDs ब्लॉक हो जाएं, तो वही डिवाइस फिर से स्कैम के लिए इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है.

डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे करता है काम?

इस स्कैम का तरीका बहुत चालाकी भरा होता है और पूरी तरह आपके डर पर आधारित होता है. आपको अचानक कॉल या वीडियो कॉल आती है फिर सामने वाला खुद को पुलिस या एजेंसी का अधिकारी बताता है - आप पर कोई गंभीर आरोप लगाता है (जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, पार्सल में ड्रग्स आदि) फिर कहता है कि आप “डिजिटल अरेस्ट” में हैं फिर आपको कैमरे के सामने रहने और कहीं न जाने का आदेश देता है , इसके बाद शुरू होता है असली खेल-आपसे बैंक डिटेल्स, OTP या पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है. एक बात हमेशा याद रखें,  भारत में “ऑनलाइन गिरफ्तारी” जैसा कोई कानून या प्रक्रिया नहीं है।कोई भी पुलिस या एजेंसी आपको वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं कर सकती. अगर कोई ऐसा कह रहा है, तो समझ लीजिए वह ठग है.

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ठग आपको कैसे फंसाते हैं?

ये लोग बहुत चालाक होते हैं और अलग-अलग तरीके अपनाते हैं:

1.फर्जी सिम कार्ड से कॉल
2.नकली नोटिस या सरकारी लेटर
3.पार्सल स्कैम (आपके नाम से पार्सल में गलत चीजें मिलीं)
4.वीडियो कॉल पर नकली पुलिस ऑफिस दिखाना
इन सबका मकसद सिर्फ एक होता है, आपको डराकर जल्दबाजी में गलती करवाना.

कैसे बचें? 

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1. घबराएं नहीं
अगर कोई आपको धमका रहा है, तो पहले शांत रहें। ठग चाहते हैं कि आप बिना सोचे फैसला लें.

2. अनजान कॉल पर भरोसा न करें
कोई भी अधिकारी आपको सीधे WhatsApp कॉल पर केस की जानकारी नहीं देगा.

3. अपनी जानकारी बिल्कुल शेयर न करें
OTP
बैंक डिटेल्स
आधार/पैन
परिवार की जानकारी, ये सब मांगा जा रहा है मतलब 100% स्कैम है.

4. पैसे ट्रांसफर करने से साफ मना करें
कोई भी जांच एजेंसी आपसे पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती.

5. तुरंत शिकायत करें
नजदीकी पुलिस स्टेशन जाएं.
साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें.
“संचार साथी” जैसे पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें.

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