सहारनपुर में गरजा 'बाबा' का बुलडोजर... कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को किया जमींदोज; सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट
यूपी के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने शनिवार सुबह ध्वस्त कर दिया. प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसे सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण माना था. वहीं, सहारनपुर जाने की कोशिश कर रहीं कैराना सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया.
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर बड़ा प्रशासनिक बुलडोजार एक्शन देखने को मिला. प्रशासन ने बुलडोजर की मदद से मस्जिद के निर्माण को ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई के दौरान इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ के जवानों की तैनाती रही, जबकि मिश्रित आबादी वाले इलाकों में भी लगातार निगरानी की गई.
दरअसल, प्रशासन के मुताबिक, कलेक्ट्रेट परिसर में बनी यह मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण के तौर पर सामने आई थी. मामले की सुनवाई सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में हुई थी. प्रशासन का दावा है कि सुनवाई के दौरान निर्माण को अवैध पाया गया और इसके बाद मस्जिद कमेटी को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील का मौका भी दिया गया. हालांकि, पहली अपील खारिज हो गई और सिटी मजिस्ट्रेट के मूल आदेश को बरकरार रखा गया.
Saharanpur, Uttar Pradesh: A mosque located within the Collectorate complex in Saharanpur was demolished using a bulldozer pic.twitter.com/N9hLc54lAE
— IANS (@ians_india) September 5, 2026
कार्रवाई से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा
मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को देखते हुए सहारनपुर में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई थी. प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल के अलावा पांच कंपनी पीएसी और आरआरएफ की तैनाती की गई. संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में फुट पेट्रोलिंग के साथ फ्लैग मार्च भी किया गया. सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, ध्वस्तीकरण से पहले सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं. उनका कहना है कि नोटिस देने और अपील की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रशासन ने यह कदम उठाया. अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को भी चेतावनी दी है. प्रशासन का कहना है कि माहौल बिगाड़ने या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने दावा किया कि मामला सिर्फ मस्जिद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कानून और संविधान से जुड़े सवाल भी हैं. मसूद के मुताबिक, प्रशासन जिस जमीन को सरकारी बता रहा है, उसके रिकॉर्ड को लेकर भी विवाद है. उन्होंने कहा कि खसरा रिकॉर्ड के आधार पर जमीन को कलेक्ट्रेट की जमीन बताया गया है, जबकि उनके अनुसार रिकॉर्ड में वहीद खान और याकूब खान के नाम भी दर्ज हैं. मसूद ने यह सवाल भी उठाया कि मस्जिद वक्फ बोर्ड के पास पंजीकृत होने के बावजूद बोर्ड को मामले में पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया. उन्होंने मस्जिद में लंबे समय से नमाज और अन्य गतिविधियां होने का भी दावा किया. हालांकि, प्रशासन की तरफ से इस पूरे मामले में यही कहा गया है कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत निर्माण को अवैध पाया गया और अपील भी खारिज हो चुकी है. ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच जमीन और निर्माण की कानूनी स्थिति इस विवाद का अहम पहलू बनी हुई है.
Delhi: On demolishing of a mosque in Saharanpur, Congress MP Imran Masood says, "Look, it’s not just about the mosque. It’s not just the mosque that has been affected; the law of the country and the Constitution are being violated. You cannot prove that the land belongs to you.… pic.twitter.com/qO1N6UwHJd
— IANS (@ians_india) September 5, 2026
सहारनपुर जाने से पहले सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट
मस्जिद पर कार्रवाई के बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की खबर भी सामने आई. बताया गया कि वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं. इसी दौरान उनके आवास पर पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया. इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और स्थानीय लोगों की आवाज प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं. उनका आरोप है कि इसी वजह से उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई.
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बहरहाल, सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद का मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है. एक तरफ प्रशासन इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्षी नेता जमीन के रिकॉर्ड और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तस्वीर और साफ हो सकती है.