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अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल से छीनी लोहिया ट्रस्ट की कमान, अब खुद बने अध्यक्ष

ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव को सौंपने से जुड़े फैसले पर शिवपाल यादव समेत सभी आठ सदस्यों ने अपनी मुहर लगा दी थी. इसके साथ ही सपा मुखिया अब लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर ट्रस्ट दोनों के अध्यक्ष बन गए हैं.

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14 Sep 2026
( Updated: 14 Sep 2026
07:33 PM )
अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल से छीनी लोहिया ट्रस्ट की कमान, अब खुद बने अध्यक्ष
Image Credit: IANS
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समाजवादी पार्टी (सपा) में शायद सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. ऐसा इसलिए कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव को हटाकर अब खुद लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष बन गए हैं. जबकि पिछले 10 सालों से लोहिया ट्रस्ट की कमान शिवपाल यादव के हाथ में थी. लेकिन, इस फैसले के साथ अब इस ट्रस्ट पर अखिलेश यादव का कंट्रोल होगा. 

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लोहिया ट्रस्ट पर अखिलेश यादव का कब्जा

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दरअसल, लोहिया ट्रस्ट समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के बीच काफी अहम रहा है. 2017 से ही शिवपाल यादव इस ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालते आ रहे थे, लेकिन अब इसका नियंत्रण पूरी तरह से अखिलेश यादव के पास होगा. 

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले हुई ट्रस्ट की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि अखिलेश यादव को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी जाए. बैठक में शामिल शिवपाल यादव समेत सभी लोगों ने इस फैसले पर अपनी सहमति जताई थी. 

कौन-कौन हैं लोहिया ट्रस्ट के सदस्य?

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव को सौंपने से जुड़े फैसले पर शिवपाल यादव समेत सभी आठ सदस्यों ने अपनी मुहर लगा दी थी. इसके साथ ही सपा मुखिया अब लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर ट्रस्ट दोनों के अध्यक्ष बन गए हैं.

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2017 की कलह से अब तक बदली सपा की तस्वीर

2017 में पारिवारिक विवाद के दौरान मुलायम सिंह यादव ने ट्रस्ट की जिम्मेदारी प्रोफेसर रामगोपाल यादव से हटाकर शिवपाल यादव को सौंप दी थी. हालांकि, लोहिया ट्रस्ट का गठन सपा की नींव पड़ने से भी काफी पहले हो चुका था. इसलिए सपा की विरासत में इस ट्रस्ट का काफी महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. इस ट्रस्ट का काम समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाना यानी प्रचार-प्रसार करना और पार्टी के लिए फंड जुटाना है. 

ट्रस्ट में अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, दीपक मिश्रा, आदित्य यादव, राम नरेश यादव इटावा, राम सेवक यादव, वीरपाल यादव बरेली और राजेश यादव सदस्य हैं.

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विधानसभा चुनाव से पहले फैसले के सियासी मायने

राजनीतिक जानकारों की मानें तो अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा अब उस दौर से बहुत आगे निकल चुकी है, जब पार्टी की कमान और परिवार से जुड़े अलग-अलग संस्थानों को लेकर शक्ति के अलग-अलग केंद्र दिखाई देते थे. लोहिया ट्रस्ट का पूरा नियंत्रण अखिलेश यादव को मिलने के बाद पार्टी और उससे जुड़े संस्थानों की पूरी कमान केंद्रीकृत होती दिख रही है.

वहीं, अखिलेश यादव के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. खासकर राज्य में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले इस घटना को सियासी तराजू में तौलकर देखा जा रहा है. इस मुद्दे पर सियासी चर्चा का एक बड़ा कारण अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच उभरते मतभेद भी हैं. 

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2017 में भी सपा के भीतर बड़ी पारिवारिक कलह हुई थी, तब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच के मतभेद खुलकर सामने आ गए थे. यहां तक कि अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच होती सार्वजनिक बहस को भी लोगों ने देखा था.

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