‘हमारे सामने आए तो खैर नहीं…’, हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान को दी धमकी, कहा- अगली बारी तुम्हारी
हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान को यमन से दूर रहने की चेतावनी दी है. कहा है कि अगर सऊदी की ओर से सामने आए तो तुर्की और पाक, दोनों पर हमले होंगे.
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पाकिस्तान ने अपने फायदे और चंदे की चाह में सऊदी अरब को कथित इस्लामिक नाटो का ख़्वाब बेचा और तुर्की के साथ मिलकर मक्का समझौता किया. 7 अगस्त को हुए मक्का एग्रीमेंट के बाद ये ढोल पीटा गया कि अगर एक देश पर हमला होता है तो दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा. इस समझौते के बाद से सऊदी पर हूती विद्रोही और ईरान कई बार हमले कर चुका है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से ईरान को दी गई गीदड़भभकी और सऊदी की चेतावनी के अलावा कुछ नहीं हो सका.
इसी बीच सऊदी की तरफ़ से बहुत उछल रहे हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. हूतियों ने पाक को भी हमले की धमकी दे दी है. ऐसे वक्त में जब सऊदी चौतरफा हमले का शिकार है, वो हूती जैसे विद्रोही से लड़ नहीं पा रहा है, उस वक्त पाकिस्तान की आलोचना हो रही है कि वो सऊदियों की मदद के लिए आगे नहीं पा रहा है और नियम का हवाला दे रहा है कि ये सैन्य तनाव समझौते के पहले से है और लड़ाई एक देश से नहीं बल्कि नॉट स्टेट एक्टर के बीच है तो वो इसमें दख़ल नहीं दे सकता है. इसी बीच उसकी निष्क्रियता पर उसकी खूब आलोचना हो रही है.
पाकिस्तान ने सऊदी को ख्वाब बेचा, नींद उसी की उड़ गई!
ऐसे में कूटनीतिक और सैन्य हलकों में चर्चा शुरू हुई है कि सऊदी अरब में तुर्की और पाकिस्तान की सेना की तैनाती हो सकती है. इसके बाद हूती विद्रोहियों ने भी दोनों देशों को तगड़ी चेतावनी दी है और अंजाम भुगतने की धमकी दी है.
हूती विद्रोहियों के नेता अल बुखैती ने दो टूक कहा कि यमन अभी भी रक्षात्मक रुख़ अख़्तियार किए हुए है, फिर भी अगर इस्लामाबाद और अंकारा उन पर हमले के लिए सामने आते हैं तो पलटवार किया जाएगा और उनपर भी सीधा हमला होगा. अगर पाकिस्तान और तुर्की भी इस जंग में सैन्य रूप से उतरते हैं तो उनके लिए ठीक नहीं होगा, यमन में किसी भी विदेशी ताकत का दखल स्वीकार नहीं किया जाएगा.
पाकिस्तान ने सऊदी अरब को मक्का समझौते के लिए कैसे मनाया?
आपको बता दें कि पाकिस्तान से यूएई ने अपने पुराना कर्जा, 3 बिलियन डॉलर मांग लिए. इसके बाद पाकिस्तान का पहले से ही खाली खजाना कंगाल हो गया. ऐसे में उसे काफी पैसे की ज़रूरत थी. इसके लिए उसने फिर से अपनी दुधारू गाय सऊदी की ओर रुख़ किया. पाकिस्तान जानता था कि सऊदी, ईरान के हमले के बाद से घायल है, अपनी रक्षा तक नहीं कर पा रहा है. उसे अमेरिका से रक्षा की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हो पाई. इसी बीच आसिम मुनीर ने मोहम्मद बिन सलमान को नाटो की तरह एक अलायंस का ख़्वाब बेचा. इसमें इस्लामिक एंगल और परमाणु हथियार तक देने की बात कथित तौर पर की. हालांकि इसके बाद ईरान और हूती के ताबड़तोड़ हमले गाहे-बगाहे सऊदी पर हो रहे हैं, लेकिन तुर्की और पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है कि करें तो करें क्या. पहले से ही बदहाल इकोनॉमी को हूती से लड़ाई के बाद तुर्की और क्यों बर्बाद करना चाहेगा.
हूतियों ने पाकिस्तान को दी बीच में टांग ना अड़ाने की धमकी
आपको बताएं कि अमेरिका ने पाकिस्तान को ईरान के साथ वार्ता में पोस्टमैन या मैसेंजर की भूमिका दी, लेकिन उसने शांति दूत या मध्यस्थ के रूप में क्रेडिट लूटने की कोशिश की. यानी कि मक्का समझौता के फेल होने और क्रेडिट लूटने की कोशिश भी फेल हो गई. और अब हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान को तगड़ी धमकी दे दी है.
यमन मामले में दूसरी बार फंसा पाकिस्तान
ये दूसरा मौका है जब पाकिस्तान हूती और यमन वाले मुद्दे पर घिरा हुआ है. इससे पहले 2015 में भी सऊदियों ने पाकिस्तान से यमन में सेना भेजने की मांग की थी, लेकिन तत्कालीन नवाज़ शरीफ की सरकार ने संसद का फैसला बताकर यमन में फौज भेजने से इनकार कर दिया था. अब दूसरी बार है जब फिर से सऊदी अरब की ओर से उम्मीद की जा रही है कि पाकिस्तान अपनी सेना भेजेगा. अगर ऐसा होता है तो उसे ईरान से भी एक अलग मोर्चे पर लड़ाई लड़नी होगी और हूती भी उसे नहीं छोड़ेंगे. ना वो अंतरराष्ट्रीय संधि का ख़याल करेंगे ना ही कोई प्रोटोकॉल का पालन करेंगे.
पाकिस्तान ने ईरान और अमरेका के बीच युद्धविराम पर समझौता करवाने और क्रेडिट लूटने की पूरी कोशिश की थी लेकिन उसका कोई भी प्रयास सफल नहीं हो पाया. इसके बाद पाकिस्तान की शांतिदूत की छवि बनाने वाली कोशिश फेल हो गई. मक्का समझौता करके उसने एक बार फिर अपनी विदेश नीति दिखाने की कोशिश की लेकिन यह भी फेल ही होता नजर आ रहा है.
हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर फिर किया हमले का दावा
यमन के हूती समूह ने कहा है कि उसने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और लाल सागर के तट पर स्थित बड़े औद्योगिक और ऊर्जा केंद्र यानबू को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं. इसे दोनों पक्षों के बीच टकराव और अधिक बढ़ने की आशंका हो गई है. हूती के नियंत्रण वाले अल-मसीरा टीवी पर जारी एक बयान में हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारिया ने कहा कि इन हमलों में 'बड़ी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन' का इस्तेमाल किया गया.
सारिया के मुताबिक, पहले ऑपरेशन में रियाद के उन ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें उन्होंने 'संवेदनशील ठिकाने' बताया. दूसरे ऑपरेशन में यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको की एक फैसिलिटी पर हमला किया गया. सारिया ने दावा किया कि दोनों ऑपरेशन सफल रहे. उन्होंने कहा कि जिन जगहों को निशाना बनाया गया, वहां भीषण आग लग गई.
हूतियों ने रियाद और यानबू को बनाया निशाना
हूती का यह बयान शनिवार को रियाद में दो बार धमाकों की आवाज सुनाई देने के बाद आया. दूसरी घटना के बाद राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास धुआं उठता दिखाई दिया. कुछ उड़ानों में देरी भी हुई.
सऊदी अधिकारियों ने इससे पहले रियाद के लिए हवाई हमले के खतरे का अलर्ट जारी किया था. बाद में उन्होंने बताया कि खतरा टल गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में हूती और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ने के बाद राजधानी रियाद के लिए इस तरह का यह पहला अलर्ट था.
हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल का किया इस्तेमाल
बाद में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने रियाद को निशाना बनाकर दागी गई हूती की एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया. गठबंधन ने यह भी कहा कि उसने बैश, ताइफ, फरसान और यानबू पर हमलों को नाकाम कर दिया. गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इन हमलों में 'आम नागरिकों और नागरिक ठिकानों' को निशाना बनाया गया. उन्होंने आगे ऐसे हमलों को रोकने के लिए 'उचित कदम' उठाने की बात कही.
वहीं, हूती प्रवक्ता सारिया ने इस आरोप से इनकार किया कि उनके समूह ने जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि रियाद पर हमले यमन में हूती के कब्जे वाले इलाकों पर सऊदी अरब के तेज होते हवाई हमलों के जवाब में किए गए.
सारिया ने कहा कि हूती जवाबी कार्रवाई जारी रखेंगे. उन्होंने इसे जैसे को तैसा वाली रणनीति बताया और कहा कि जब तक सऊदी हवाई हमले बंद नहीं होते और यमन पर लगी पाबंदियां नहीं हटाई जाती, तब तक उनकी जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी.
जुलाई से जारी है सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य टकराव
सऊदी अरब की राजधानी पर यह हमला यमन के हूती समूह और सऊदी अरब के बीच बढ़ते टकराव की ताजा घटना है. मौजूदा टकराव की शुरुआत जुलाई के मध्य में हुई थी, जब यमन की सशस्त्र सेनाओं ने हूती के नियंत्रण वाले सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया था. इसका मकसद ईरान के एक यात्री विमान को वहां उतरने से रोकना था. इस विमान में हूती का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल सवार था, जो खामनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों में शामिल होने के बाद ईरान से लौट रहा था.
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हूती समूह ने इन हमलों के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया. सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का एक प्रमुख सहयोगी है. इसके बाद हूती ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए.
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अब पाकिस्तान और तुर्की पर सबकी नज़र!
इसके बाद हूती समूह ने 20 जुलाई को बाब अल-मंदब स्ट्रेट से सऊदी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने का ऐलान किया. तब से समूह ने सऊदी तेल टैंकरों और सऊदी अरब में मौजूद तेल सुविधाओं पर कई हमले करने का दावा किया है.
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यमन में संघर्ष की शुरुआत 2014 के आखिर में हुई थी, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में दखल दिया था.