मोदी राज में बदली 'कश्मीर' की तस्वीर... कमजोर पड़ा आतंकी नेटवर्क, पाकिस्तान पर भी बढ़ा दबाव, आंकड़े देखकर दंग रह जाएंगे!
जम्मू-कश्मीर को लेकर रक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट सामने आई है. आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती 2021 के 146 से घटकर 2025 में सिर्फ एक रह गई. रिपोर्ट के अनुसार, युवाओं का हिंसा से दूर होकर रोजगार और सरकारी योजनाओं की ओर बढ़ना इस बदलाव की बड़ी वजह है.
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केंद्र की मोदी सरकार ने जब जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाने का फैसला लिया था, तब विपक्षी दलों ने इसका जोरदार विरोध किया था. हालांकि, अब घाटी में बदलते हालात के आंकड़े इस फैसले के बाद की स्थिति की एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं. रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती में लगातार बड़ी गिरावट आई है. साल 2021 में जहां स्थानीय स्तर पर 146 युवाओं की भर्ती हुई थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा घटकर महज एक रह गया. इतना ही नहीं, पिछले पांच वर्षों में 2025 के दौरान घुसपैठ की कोशिशें भी सबसे कम दर्ज की गईं. इस साल सीमा पार से घुसपैठ की केवल छह कोशिशें सामने आईं. आंकड़ों में आया यह बदलाव घाटी में सुरक्षा हालात में हुए परिवर्तन की ओर इशारा करता है.
दरअसल, रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय युवाओं के आतंकवादी संगठनों से जुड़ने के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है. हिंदुस्तान में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में 146 युवा ऐसे संगठनों में शामिल हुए थे, जो 2022 में घटकर 121 रह गए. इसके बाद 2023 में यह संख्या 19, 2024 में चार और 2025 में महज एक रह गई. रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय युवाओं का हिंसा से दूर होकर सरकारी योजनाओं और नीतियों का लाभ उठाने का रुझान बढ़ा है. और अब ये युवा अलग-अलग तरह से रोज़गार कर नए ज़िंदगी की शुरुआत कर रहे है ताकि अपने परिवार का अच्छे से भरण-पोषण कर सके.
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अनुच्छेद 370 के बाद कैसे बदले जम्मू-कश्मीर के हालात
जानकारी देते चलें की अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव देखने को मिला है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं के साथ-साथ घुसपैठ की कोशिशों में भी कमी दर्ज की गई है. नियंत्रण रेखा पर भी पहले के मुकाबले स्थिति अधिक शांत बताई गई है. मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में घुसपैठ की छह कोशिशों को नाकाम किया गया और इस दौरान 12 आतंकवादी मारे गए. इससे पहले 2021 में आठ घुसपैठ की कोशिशें नाकाम करते हुए 12 आतंकवादी मारे गए थे. 2022 में 12 कोशिशों के दौरान 18, 2023 में 18 कोशिशों के दौरान 36 और 2024 में 10 कोशिशों के दौरान 19 आतंकवादी मारे गए. आंकड़ों से साफ है कि हाल के वर्षों में घुसपैठ की कोशिशों में उतार-चढ़ाव के बावजूद 2025 में इनकी संख्या सबसे कम रही.
जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ की कोशिशें बढ़ीं
रिपोर्ट के मुताबिक, नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की घटनाओं में कमी आने के बावजूद जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते घुसपैठ की कोशिशों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं. इस दौरान ड्रग्स की तस्करी के प्रयास भी सामने आए हैं. आंकड़ों के अनुसार, 2024 में नियंत्रण रेखा पर सीजफायर उल्लंघन की सिर्फ दो घटनाएं दर्ज हुई थीं, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 163 हो गई. इनमें से 124 घटनाएं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुईं. हालांकि, इसी अवधि में जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की कोई घटना दर्ज नहीं की गई, जो सुरक्षा हालात में आए बदलाव का एक अहम संकेत माना जा रहा है.
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बहरहाल, आंकड़े बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती और घुसपैठ की कोशिशों में बड़ी गिरावट आई है. हालांकि, जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ और सीजफायर उल्लंघन जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. ऐसे में सुरक्षा के साथ युवाओं को रोजगार और विकास से जोड़ना आगे भी अहम रहेगा.