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योगी राज में उत्तर प्रदेश बना देश का सबसे बड़ा 'एक्सप्रेसवे नेटवर्क', 2029 तक राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने का वादा दोहराया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य को डबल इंजन सरकार की सौगात मिली है. ऐसे में सीएम योगी की दूर की सोच ने उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य बना दिया है. साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3 एक्सप्रेसवे थे, लेकिन आज यह प्रदेश सिर्फ 8 सालों के अंदर 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्यों में शामिल है. इस बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट मूवमेंट तीन गुना हो गया है और पूरे इलाके में इकॉनमिक ग्रोथ तेज हुई है.

योगी राज में उत्तर प्रदेश बना देश का सबसे बड़ा 'एक्सप्रेसवे नेटवर्क', 2029 तक राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने का वादा दोहराया
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यूपी की योगी सरकार देश भर में एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ाकर इतिहास रच रही है. सीएम योगी ने राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और रोड डेवलपमेंट को मजबूत करने पर खास जोर दिया है. वहीं सरकार ने साल 2029 तक उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने का अपना वादा फिर से दोहराया है. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि इंडस्ट्रियल ग्रोथ और राज्य में इन्वेस्टमेंट लाने के लिए सड़कों का “सुनहरा नेटवर्क” बनाना जरूरी है. 

देश का सबसे बड़ा 'एक्सप्रेसवे नेटवर्क' वाला राज्य बना यूपी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य को डबल इंजन सरकार की सौगात मिली है. ऐसे में सीएम योगी की दूर की सोच ने उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य बना दिया है. साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3 एक्सप्रेसवे थे, लेकिन आज यह प्रदेश सिर्फ 8 सालों के अंदर 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्यों में शामिल है. इस बढ़ोतरी से ट्रांसपोर्ट मूवमेंट तीन गुना हो गया है और पूरे इलाके में इकॉनमिक ग्रोथ तेज हुई है. आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे की संख्या साल 1949-50 में जीरो थी, जो साल 2016-17 में बढ़कर 3 और 2025-26 तक 22 हो गई है, यानी सिर्फ 8 सालों में योगी सरकार ने एक्सप्रेसवे का नेटवर्क खड़ा किया है, इनमे कई प्रोजेक्ट चल रहे और कुछ प्रस्तावित हो चुके हैं. सरकार रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान दे रही है.

नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर भी तैयार किया जा रहा 

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यूपी की योगी सरकार गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे मुख्य एक्सप्रेसवे तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर भी तैयार कर रही है, जो हर जिले के हेडक्वार्टर को जोड़ने वाला एक राज्यव्यापी रोड ग्रिड बन रहा है.

नेशनल हाईवे राज्य की तरक्की में अहम भूमिका निभा रहे

बता दें कि एक्सप्रेसवे के बाद यूपी सरकार नेशनल हाईवे पर खास जोर दे रही है. राज्य की तरक्की में यह अहम भूमिका निभा रहे हैं. उत्तर प्रदेश विकास और कामयाबी की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. साल 2004-05 और 2023-24 के बीच (ताजा आंकड़ों के अनुसार) राज्य का नेशनल हाईवे नेटवर्क 5,599 किलोमीटर से दोगुना बढ़कर कुल 12,292 किलोमीटर का हो गया है. ऐसे में देखा जाए, तो भारत के कुल नेशनल हाईवे की लंबाई में उत्तर प्रदेश का हिस्सा 2016-17 में सिर्फ 7.48 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गया है.

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आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत प्रयास 

सड़कों का विस्तार प्रदेश के अंदर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे योगी सरकार के मजबूत प्रयासों को दिखाता है. इससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में आना-जाना आसान हो गया है, जिससे व्यापार, शिक्षा और हेल्थकेयर ज्यादा आसान हो गए हैं. इससे राज्य के अलग-अलग इलाकों में आर्थिक विकास में तेजी आई है. इसके अलावा नेशनल हाईवे की लंबाई में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. इससे न सिर्फ इंटरस्टेट कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, बल्कि माल ढुलाई भी बिना रुकावट आसान हुई है.

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का नेटवर्क 77,425.14 किलोमीटर बढ़ा 

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सीएम योगी के नेतृत्व में पिछले 8 सालों में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण विकास और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में जबरदस्त तरक्की की है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 2013-14 में सड़कों की कुल लंबाई 51,549.23 km थी, जो साल 2016-17 में सिर्फ 56,846.93 km तक ही हो पाई, लेकिन उसके बाद राज्य में बीजेपी की सरकार आने के बाद सड़कों के विस्तार की रफ्तार तेजी से बढ़ी है. मुख्यमंत्री योगी की नीतियों को अच्छे से लागू करने और उन्हें जोड़ने से साल 2024-25 तक सड़कों की कुल लंबाई बढ़कर 77,425.14 km हो गई, इससे न केवल पूरे राज्य में ग्रामीण कनेक्टिविटी में सुधार हुआ बल्कि 2023-24 तक यह वृद्धि दर 41 प्रतिशत तक पहुंच गई. 

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