CJP की कोर कमेटी के विरोध में दो युवाओं की भूख हड़ताल, तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
CJP: मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या, 6 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. दोनो अभिजीत दिपके के घर के बाहर धरना दे रहे थे. उनका आरोप है कि CJP की नई कोर कमेटी बनाते समय जमीनी स्तर पर आंदोलन से जुड़े कई युवाओं और वॉलंटियर्स को नजरअंदाज किया गया है.
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CJP: छत्रपति संभाजीनगर के वालुज MIDC इलाके में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की नई कोर कमेटी को लेकर विवाद बढ़ गया है. गुजरात के अहमदाबाद से आए दो युवा, मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या, 6 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे. दोनो अभिजीत दिपके के घर के बाहर धरना दे रहे थे. उनका आरोप है कि CJP की नई कोर कमेटी बनाते समय जमीनी स्तर पर आंदोलन से जुड़े कई युवाओं और वॉलंटियर्स को नजरअंदाज किया गया है. दोनों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नही बल्कि देशभर के युवाओं का है, इसलिए संगठन के फैसलों में भी सभी राज्यों और जमीनी कार्यकर्ताओं को जगह मिलनी चाहिए.
मनीष और राहुल की भूख हड़ताल सोमवार तक जारी रही, लेकिन लगातार खाना न खाने की वजह से दोनों की तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. मनीष ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें जबरदस्ती अस्पताल लेकर गई. हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने साफ कहा कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है और वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे. दोनों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद विरोध स्थल पर दो नए वॉलंटियर्स पहुंचे. उन्होंने कहा कि वे भी भूख हड़ताल जारी रखेंगे और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे.
'कोर कमेटी में सिर्फ करीबी लोगों को जगह मिली'
मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पाड्या का सबसे बड़ा सवाल CJP की नई कोर कमेटी को लेकर है. उनका आरोप है कि कमेटी बनाने में आंदोलन से जुड़े सभी लोगों की राय नहीं ली गई और अभिजीत दीपके के करीबी लोगों को ही बैठक में बुलाया गया. दोनों युवाओं का कहना है कि उन्होंने पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और वहां दूसरे युवाओं के साथ मिलकर आंदोलन को मजबूत करने की कोशिश की थी. ऐसे में जब आगे की रणनीति बनाने के लिए बैठक हुई, तो उन्हें और कई दूसरे जमीनी वॉलंटियर्स को उससे दूर रखना उन्हें ठीक नहीं लगा.
दोनों की मांग है कि CJP की कोर कमेटी में देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े वॉलंटियर्स को प्रतिनिधित्व दिया जाए. उनका कहना है कि अगर आंदोलन में किसी ने सड़क पर उतरकर, लोगों को जोड़कर और जमीन पर काम करके योगदान दिया है, तो उसे संगठन के फैसलों में भी अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए. वे CJP के भीतर ज्यादा आंतरिक लोकतंत्र चाहते हैं और चाहते हैं कि बड़े फैसले कुछ चुनिंदा लोगों के बीच ही न लिए जाएं.
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'हमें एक और केजरीवाल नहीं चाहिए'
मनीष ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब CJP का आंदोलन शुरू हुआ था, तब इसका कोई एक चेहरा नहीं था. उनके मुताबिक, जंतर-मंतर पर कई युवा और वॉलंटियर्स एक साथ खड़े हुए थ और सभी ने आंदोलन को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाई थी. मनीष का कहना है कि उन्होंने भी दिल्ली के आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था और इसी भरोसे के साथ वह CJP टीम से मिलने के लिए यहां पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मिलने का मौका तक नहीं मिला और न ही रणनीति बैठक में बुलाया गया. मनीष ने इसी बात को लेकर कहा कि आंदोलन को किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द नहीं घूमना चाहिए.उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "हमें एक और केजरीवाल नहीं चाहिए." उनके इस बयान के पीछे उनकी चिंता यही है कि जिस आंदोलन को युवाओं और आम लोगों की आवाज के तौर पर शुरू किया गया था, वह आगे चलकर किसी एक नेता या छोटे समूह के नियंत्रण में न चला जाए.
आंदोलन के भविष्य और नेतृत्व पर उठे सवाल
मनीष और राहुल की भूख हड़ताल ने CJP के अंदर नेतृत्व और फैसले लेने के तरीके को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. दोनों चाहते हैं कि संगठन में अलग-अलग राज्यों के युवाओं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों की आवाज सुनी जाए. उनका कहना है कि अगर आंदोलन वास्तव मे देशभर के युवाओं का है, तो उसकी कमेटी और फैसलों में भी उसी तरह की भागीदारी दिखाई देनी चाहिए.
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सोमवार शाम तक अभिजीत दिपके की ओर से दोनों युवाओं के अस्पताल में भर्ती होने और उनके आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी. अब देखना यह है कि CJP नेतृत्व इन आरोपों पर क्या जवाब देता है और क्या संगठन की कोर कमेटी को लेकर उठ रही आपत्तियों पर बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकाला जाता है. फिलहाल, दोनों युवाओं के अस्पताल पहुंचने के बावजूद उनके समर्थकों ने विरोध जारी रखने की बात कही है, जिससे यह विवाद आगे भी जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं.