जिस NALSAR यूनिवर्सिटी में हुआ था CJI का विरोध, वहां दिखाई गई उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री, भड़की BJP
हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री दिखाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. ABVP के बाद BJP नेताओं ने विरोध दर्ज करवाया और हनुमान अंश दिखाने की मांग की.
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हैदराबाद की NALSAR (नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च) यूनिवर्सिटी में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री दिखाए जाने का मामला विवादों में है. पहले ABVP ने इस पर आपत्ति जताई थी, अब BJP ने भी विरोध करते हुए यूनिवर्सिटी में हनुमान अंश दिखाने की मांग की.
न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत करते हुए BJP नेता मनमीत सिंह ने कहा, JNU के पूर्व छात्र और तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद ने 2016 में दंगे कराने की कोशिश की. NALSAR यूनिवर्सिटी में उसे ही दिखाया गया.
BJP ने उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री दिखाने पर उठाए सवाल
मनमीत सिंह ने कहा कि NALSAR में 'आर्ट डॉक्यूमेंट्री' प्ले करने के नाम पर एक इवेंट ऑर्गनाइज किया गया था. इसकी जानकारी इमेल से छात्रों को दी गई थी, जबकि विश्वविद्यालय के डीन की ओर से कहा गया कि इसकी अनुमति नहीं ली गई थी. वहां पर उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई.
उन्होंने कहा कि उमर खालिद के बारे में दुनिया जानती है कि इसने 2016, 2017 में दिल्ली में क्या-क्या किया था. मनमीत सिंह ने कहा, ‘तेलंगाना में कांग्रेस सरकार में ऐसा किया जा रहा है. मेरा कहना है कि वहां पर 'हनुमान अंश' फिल्म दिखाई जाए.’
वहीं, BJP नेता विनूषा ने कहा, ‘हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में कुछ छात्रों ने उमर खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई, जिसके बाद ABVP ने विरोध किया. क्या इन छात्रों को पता है कि उमर खालिद कौन है? क्या उन्हें पता है कि उसने अफजल गुरु का समर्थन किया था, जिसे संसद हमले के मामले में दोषी ठहराया गया था? खबर है कि 2013 में अफजल गुरु की याद में एक कार्यक्रम हुआ था, जिसमें ‘भारत तेरे टुकड़े-टुकड़े करेंगे’ और ‘हर घर से अफजल निकलेगा’ जैसे नारे लगाए गए थे.’
यूनिवर्सिटी को राजनीति का मंच बनाने का आरोप
BJP नेता विनूषा ने आरोप लगाया कि NALSAR को राजनीति का मंच बनाया जा रहा है. उन्होंने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. विनूषा ने कहा,
‘यूनिवर्सिटी ऐसी जगहें होनी चाहिए जहां युवा दिमाग नए विचार विकसित कर सकें और राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे सकें. हालांकि उन्हें ऐसी राजनीति का मंच नहीं बनना चाहिए.’
BJP नेता ने लॉ छात्रों पर सवाल उठाते हुए कहा, क्या इन छात्रों को पता है कि उमर खालिद पर दिल्ली दंगों के मामले में मुकदमा चल रहा है? क्या वे उन लोगों के परिवारों और रिश्तेदारों को जवाब दे सकते हैं जिनकी दिल्ली दंगों में जान चली गई? अदालतें अपना काम कर रही हैं, और ये लॉ के छात्र हैं जो कानूनी व्यवस्था को समझते हैं. देश में 3.7 लाख से ज्यादा विचाराधीन कैदी हैं. उन्होंने उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री दिखाने का फैसला क्यों किया?
विनूषा ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन के मामले के बारे में पता है, जिन पर झूठे आरोप लगाए गए और उन्हें जेल में डाल दिया गया था. एक ऐसी घटना जिसका भारत के क्रायोजेनिक इंजन प्रोग्राम पर असर पड़ा था?
विनूषा ने पूछा, क्या छात्रों को सम्मानित आर्मी ऑफिसर कर्नल पुरोहित के बारे में पता है, जिन्होंने एक ऐसे मामले में नौ साल से ज्यादा जेल में बिताए जिसमें उन्हें आखिरकार राहत मिली? इन लोगों को आखिरकार न्याय मिला. ये छात्र लॉ के छात्र हैं और उन्हें कानूनी व्यवस्था का महत्व समझना चाहिए, उन्हें व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहिए और आतंकवाद का समर्थन नहीं करना चाहिए.
NALSAR में हुआ था CJI के कार्यक्रम का विरोध
बीते दिनों NALSAR यूनिवर्सिटी काफी चर्चा में रही थी. वजह है यहां दीक्षांत समारोह में छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के चीफ गेस्ट बनने का विरोध जताया था. इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था. असल में छात्रों की नाराजगी चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी को लेकर थी. जिसमें उन्होंने NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई में की थी. छात्रों का तर्क है कि CJI सूर्यकांत ने लाठीचार्ज के वीडियो देखने से मना करते हुए कथित तौर पर कहा था कि उनके पास वीडियो देखने का समय नहीं है. NALSAR के करीब 450 छात्रों ने CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह 2026 का चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध किया था.
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इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था. हालांकि CJI ने BCI के इस सर्कुलर पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई को रोकने के लिए कहा था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, ‘यह मेरे और छात्रों के बीच का मामला है. इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी. बार काउंसिल इसमें दखल देने वाला कौन होता है? BCI की दखलअंदाजी बिल्कुल अनावश्यक है. यह छात्रों और मेरे बीच संवाद है. वे कौन होते हैं इस मुद्दे को उठाने वाले? हालांकि बाद में ये मुद्दा तो शांत हो गया था लेकिन अब NALSAR यूनिवर्सिटी पर उमर खालिद की महिमामंडन करने के आरोप लग रहे हैं.