×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ‘प्रचंड’ उड़ान, कॉकपिट से वीरों को किया सलाम, को-पायलट बनने वालीं पहली प्रेसिडेंट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ के साथ प्रचंड हेलिकॉप्टर में उड़ान भरी थी. उड़ान के दौरान उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों और पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज का हवाई जायजा लिया.

Author
27 Feb 2026
( Updated: 27 Feb 2026
09:34 AM )
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ‘प्रचंड’ उड़ान, कॉकपिट से वीरों को किया सलाम, को-पायलट बनने वालीं पहली प्रेसिडेंट
Photo/Social Media
Advertisement

भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक कीर्तिमान स्थापित करते हुए स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में एक विशेष उड़ान भरी. वे हेलिकॉप्टर प्रचंड में बतौर को-पायलट उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति हैं. 

दरअसल शुक्रवार 27 फरवरी को राष्ट्रपति राजस्थान के जैसलमेर में मौजूद रहीं. यहां वह भारतीय वायुसेना के प्रमुख युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति’ की साक्षी बनीं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यहां पहुंचने पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में यह विशेष उड़ान भरी. इस दौरान वह फ्लाइंग हेलमेट और फ्लाइट ड्रेस में नजर आईं. 

पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज का हवाई जायजा लिया 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह करीब 10.15 बजे ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ के साथ हेलिकॉप्टर में उड़ान भरी थी. हेलिकॉप्टर में 25 मिनट उड़ान के दौरान राष्ट्रपति ने सीमावर्ती क्षेत्रों और पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज का हवाई जायजा लिया. गौरतलब है कि ‘प्रचंड’ हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक तकनीक से लैस है. इसे विशेष रूप से कठिन युद्ध परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया है. यह ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी उड़ान भर सकता है. 

देश के नाम कॉकपिट से संदेश 

Advertisement

जैसलमेर के सोनार दुर्ग के ऊपर ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर में उड़ान भरते हुए राष्ट्रपति ने रेडियो के माध्यम से देश के नाम संदेश दिया. उन्होंने कहा- मैं आज प्रचंड हेलिकॉप्टर में उड़ान भर रही हूं. प्रचंड हेलिकॉप्टर आत्मनिर्भरता का प्रबल प्रतीक है. मैं इस समय जैसलमेर के प्रसिद्ध किले के ऊपर से उड़ान भर रही हूं. मैं देश के वीर सैनिकों को गर्व के साथ धन्यवाद देती हूं. मेरा सभी को प्यार भरा नमस्कार, जय हिंद, जय भारत. 

‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में राष्ट्रपति की यह उड़ान स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की प्रगति का प्रतीक मानी जा रही है. राष्ट्रपति की यह उड़ान दो ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टरों के समूह के रूप में संचालित की गई. 

Advertisement

दूसरे हेलिकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह सवार रहे. भारतीय वायुसेना द्वारा द्वारा आयोजित ‘वायु शक्ति 2026’ अभ्यास में विभिन्न लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और उन्नत हथियार प्रणालियां अपनी मारक क्षमता और सटीकता का प्रदर्शन कर रही हैं. यह अभ्यास देश की वायु शक्ति, सामरिक तैयारी और पेशेवर दक्षता को प्रदर्शित करने का प्रमुख मंच है. वहीं ऐसे सैन्य प्लेटफार्म से राष्ट्रपति की यह ऐतिहासिक उड़ान सशस्त्र बलों के मनोबल को और सुदृढ़ करेगी. यह स्वदेशी रक्षा उत्पादन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है. 

INS वाघशीर पर सवार हुईं थीं महामहिम

इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु दिसंबर में भारतीय नौसेना की स्वदेशी रूप से निर्मित कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी INS वाघशीर पर सवार हुई थीं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे से यह यात्रा शुरू की थी. राष्ट्रपति की वह यात्रा भारतीय नौसेना की क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के रक्षा निर्माण कार्यक्रम का सशक्त प्रतीक थी. उस विशेष अभियान में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी राष्ट्रपति के साथ मौजूद थे. 

राष्ट्रपति को नौसेना की इस पनडुब्बी की परिचालन क्षमता, स्टील्थ फीचर्स और हथियार प्रणालियों से अवगत कराया गया.  साथ ही उन्हें भारतीय नौसेना के अंडरवॉटर वॉरफेयर नेटवर्क के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई थी. यह सॉर्टी कई मायनों में ऐतिहासिक है. 

Advertisement

दरअसल यह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का कलवरी क्लास की पनडुब्बी पर यह पहला दौरा था. भारतीय इतिहास में ऐसा करने वाली वह दूसरी राष्ट्रपति हैं. उनसे पहले पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने एक पनडुब्बी पर सॉर्टी की थी. वहीं अक्टूबर महीने के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वायुसेना के लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में उड़ान भरी थी. इसके साथ ही उन्होंने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था. राष्ट्रपति, 29 अक्टूबर को हरियाणा के अंबाला स्थित वायुसेना स्टेशन का पहुंची थी. 

राफेल में भरी थी उड़ान 

यहां उन्होंने वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में सॉर्टी यानी उड़ान भरी. इस दौरान राष्ट्रपति ने फाइटर पायलट सूट औरअन्य सभी आवश्यक उपकरण भी पहने थे. गौरतलब है यह कोई पहला अवसर नहीं था जब कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भारतीय वायुसेना के किसी फाइटर जेट में सवार हुई हों. इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी. 

यह भी पढ़ें- 'मेरा स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक था...', पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया बड़ा खुलासा, बताया इस्तीफे का असली कारण

Advertisement

उस समय उन्होंने भारतीय वायुसेना के पायलटों के साथ अनुभव साझा करते हुए वायुसेना की दक्षता, अनुशासन और समर्पण की सराहना की थी. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल, सुखोई-30, नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर और अब स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में राष्ट्रपति की यह उड़ान भारतीय सेनाओं की आधुनिकता, क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के रक्षा प्रयासों का प्रतीक है. 

यह भी पढ़ें

राष्ट्रपति मुर्मु ने जब प्रचंड हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी तो वहां वायुसेना प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. इस सॉर्टी के माध्यम से राष्ट्रपति ने भारतीय वायुसेना के पराक्रम, तकनीकी दक्षता और वायुशक्ति को सैल्यूट किया. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें