मुस्लिम महिलाओं के हाथों से बना प्रसाद रामलला को लगता है भोग, ‘रामजी पेड़ा’ बना सुपरहिट, देश-विदेश में भी होती है सप्लाई
इन पेड़ों की एक और खास बात है, जो इसे और भी खास बना देती है. तैयार होने के बाद इन्हें पहले अयोध्या भेजा जाता है, जहां भगवान राम को भोग लगाया जाता है. इसके बाद ही इन पेड़ों को देश और विदेश में सप्लाई किया जाता है.
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Muslim women is offered to Ram Lalla Ramji Peda: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से इन दिनों एक बेहद खास और दिल छू लेने वाली कहानी सामने आ रही है. यहां मुस्लिम महिलाएं मिलाकर राम जी पेड़ा बना रही हैं, जो सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब पसंद किया जा रहा हैं , यह सिर्फ एक मिठाई नहीं , बल्कि मेहनत , एकता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका हैं. इन पेड़ों की खास बात यह हैं कि इन्हें पूरी तरह देसी तरीके से बनाया जाता हैं. बड़े -बड़े बर्तनों में लकड़ी के चूल्हे पर दूध , गुड़ और शुद्ध देसी घी डालकर घंटो पकाया जाता हैं. इस पारंपरिक तरीके की वजह से पेड़े में एक अलग ही सोंधी खुशबु और गहरा स्वाद आता हैं , जो लोगों को बार -बार इसे खाने के लिए मजबूर कर देता हैं.
देसी स्वाद और सेहत का अनोखा मेल
“राम जी पेड़ा” की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल होता है. इसी वजह से इसे लोग शुगर-फ्री या ज्यादा हेल्दी विकल्प के तौर पर भी पसंद कर रहे हैं. आजकल जब लोग सेहत को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं, तब यह पेड़ा उनके लिए एक बेहतर विकल्प बन गया है.
लकड़ी के चूल्हे पर पकने से इसमें जो प्राकृतिक खुशबू आती है, वह मशीनों से बनी मिठाइयों में नहीं मिलती. यही कारण है कि इसकी मांग धीरे-धीरे देश से निकलकर विदेशों तक पहुंच गई है.
एक युवा की सोच ने बदली सैकड़ों महिलाओं की जिंदगी
इस पूरी पहल के पीछे मनीष मिश्रा का बड़ा योगदान है. उन्होंने गांव की गरीब और बेरोजगार महिलाओं को एक मौका दिया - उन्हें पेड़ा बनाने की ट्रेनिंग दी, जरूरी सामान उपलब्ध कराया और फिर उन्हें बिजनेस करने का तरीका भी समझाया.
शुरुआत छोटी थी, लेकिन धीरे-धीरे यह काम बढ़ता गया और आज करीब 500 महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं. इनमें मुस्लिम महिलाएं भी बराबर की भागीदारी निभा रही हैं. यह नजारा अपने आप में एक खूबसूरत मिसाल है, जहां धर्म से ऊपर उठकर लोग साथ मिलकर काम कर रहे हैं और अपने परिवार का सहारा बन रहे हैं.
अयोध्या से जुड़ी आस्था, फिर दुनिया तक सफर
इन पेड़ों की एक और खास बात है, जो इसे और भी खास बना देती है. तैयार होने के बाद इन्हें पहले अयोध्या भेजा जाता है, जहां भगवान राम को भोग लगाया जाता है. इसके बाद ही इन पेड़ों को देश और विदेश में सप्लाई किया जाता है.
यह प्रक्रिया सिर्फ एक व्यापार नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ी भावना को भी दर्शाती है. यही वजह है कि लोग इसे सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि श्रद्धा से जुड़ा प्रसाद मानते हैं.
दो दिन में तैयार, विदेशों तक पहुंच
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ऑर्डर मिलते ही महिलाएं पूरी लगन के साथ काम में जुट जाती हैं. करीब दो दिनों में ही कई किलो पेड़ा तैयार कर लिया जाता है. फिर इन्हें खास तरीके से मटकों में पैक किया जाता है, ताकि स्वाद और खुशबू बरकरार रहे. आज यह “राम जी पेड़ा” रूस और यूरोप जैसे देशों तक पहुंच रहा है.यह न सिर्फ बस्ती की पहचान बन रहा है, बल्कि भारत की पारंपरिक मिठाइयों और हुनर को भी दुनिया के सामने पेश कर रहा है.
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