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कॉर्पोरेट सेक्टर से सीधे जुड़े यूपी के गरीब-बेरोजगार…योगी सरकार की नीति का कमाल, हर परिवार में एक नौकरी पक्की… अडानी समूह, TATA, SBI ने भी दिखाई दिलचस्पी

रियायत नहीं अवसर, नारा नहीं नीति…योगी सरकार की जीरो पॉवर्टी नीति की पूरे देश में चर्चा हो रही है. सीएम योगी की सोच के मुताबिक यह देश में पहली बार हो रहा है जब किसी सरकार ने गरीबों को कॉर्पोरेट सेक्टर से प्रत्यक्ष तौर पर जोड़ा है. अगर सब कुछ धरातल पर उतरा और मिशन मोड में काम किया गया तो हर परिवार में कम से कम एक 18,400 रूपए की नौकरी पक्की मिलेगी.

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21 Jul 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:17 AM )
कॉर्पोरेट सेक्टर से सीधे जुड़े यूपी के गरीब-बेरोजगार…योगी सरकार की नीति का कमाल, हर परिवार में एक नौकरी पक्की… अडानी समूह, TATA, SBI ने भी दिखाई दिलचस्पी
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उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की है. यह पहल "जीरो पावर्टी अभियान" के तहत चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य गरीबों को सिर्फ सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सीधे नौकरी से जोड़ना है. इस योजना में ट्रेनिंग देने के साथ-साथ बड़ी कंपनियों में रोजगार भी सुनिश्चित किया जाएगा.

300 परिवारों से होगी पहले चरण की शुरुआत

इस योजना के पहले चरण में प्रदेश के 300 बेहद जरूरतमंद परिवारों के मुखिया को चिन्हित किया गया है. इन्हें विभिन्न क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि ये सीधे प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों से जुड़ सकें. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें नौकरी की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा क्योंकि कंपनियां खुद आगे आकर इन्हें नियुक्त करेंगी. योगी सरकार ने इस दिशा में एक ऐतिहासिक काम किया है. जानकारी के मुताबिक शायद देश में ये पहली बार हो रहा जब कोई सरकार गरीबों के लिए भी मल्टीनेशनल कंपनियों के द्वार खोल रही है. अधिकारियों के मुताबिक यह देश में पहली बार है जब कोई सरकार प्रत्यक्ष रूप से गरीबों को कॉर्पोरेट सेक्टर से जोड़ने जा रही है.

राज्य सरकार उन्हें सीधे टॉप कंपनियों में प्लेस कराएगी. इनमें होटल ताज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एल एंड टी लिमिटेड, अडानी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. अधिकारियों के मुताबिक यह देश में पहली बार है जब कोई सरकार प्रत्यक्ष रूप से गरीबों को कॉर्पोरेट सेक्टर से जोड़ने जा रही है.

बड़ी-बड़ी कंपनियों से सीधा जुड़ाव

सरकार का दावा है कि इस पहल को देश की कई प्रतिष्ठित कंपनियों का समर्थन मिल रहा है. टाटा समूह, एसबीआई, एलएंडटी लिमिटेड और अडानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों ने भी इसमें रुचि दिखाई है और ये कंपनियां प्रशिक्षित युवाओं को सीधा रोजगार देने के लिए तैयार हैं.

गरीबों को राहत नहीं अवसर की जरूरत: योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि गरीबों को सिर्फ राहत की जरूरत नहीं, बल्कि अवसरों की जरूरत है. उन्हें अगर अवसर मिलें तो कोई भी परिवार आत्मनिर्भर बन सकता है. सरकार की सोच है कि दया नहीं, अवसर दें. ताकि कमजोर वर्ग खुद पर गर्व कर सके.

कम से कम ₹18,400 की नौकरी गारंटीड

राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जिन परिवारों को प्रशिक्षण मिलेगा, उन्हें कम से कम 18,400 रुपये प्रति माह वेतन वाली नौकरी दी जाएगी. यह सिर्फ एक जॉब ऑफर नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन देने की एक कोशिश है.

360 डिग्री मॉडल के तहत कौशल-व्यक्तित्व विकास पर भी ज़ोर

यह योजना पारंपरिक स्किल ट्रेनिंग से अलग है. इसमें केवल तकनीकी जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व विकास, जैसे संचार कौशल, मूल अंग्रेजी भाषा, कस्टमर हैंडलिंग, सफाई, हाउसकीपिंग, गेस्ट अटेंडेंट जैसे विषयों पर भी ट्रेनिंग दी जाएगी. यानी प्रतिभागी हर दृष्टिकोण से निजी कंपनियों के लिए तैयार होंगे.

कौशल विकास मिशन को सौंपी गई ज़िम्मेदारी

इस अभियान की ज़िम्मेदारी उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को दी गई है. पहले चरण के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा. इसके लिए 1,000 से ज्यादा प्रशिक्षण संस्थानों को चिन्हित किया जा रहा है, जो विभिन्न क्षेत्रों में ट्रेनिंग देंगे.

आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गरीबों को दया नहीं, अवसर की ज़रूरत है. अगर उन्हें सही मौका मिले, तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं. यह योजना किसी रियायत या खैरात की तरह नहीं, बल्कि उन्हें समाज के विकास में भागीदार बनाने की सोच के साथ तैयार की गई है.

कंपनियों ने दिखाई दिलचस्पी
अधिकारियों के अनुसार इस पहल को न सिर्फ देश के, बल्कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और कंपनियों का भी समर्थन मिल रहा है. अब तक 40 से अधिक बड़ी कंपनियां इसमें भागीदारी की इच्छा जता चुकी हैं.

नीतियों में तब्दील हुआ सीएम योगी का नारा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा कहते हैं कि जब तक समाज का सबसे पिछड़ा व्यक्ति आगे नहीं बढ़ता, विकास अधूरा रहता है. इस योजना में भी वही दर्शन झलकता है. यह नारा अब नीतियों में तब्दील हो चुका है.

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