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'मेरी साड़ी खींची गई, जांघ पर रखा हाथ...', पुलिस की पूछताछ में टीसीएस केस में पीड़िता ने खोले उत्पीड़न के चौंकाने वाले राज

टीसीएस नासिक यूनिट में कथित धर्मांतरण और कार्यस्थल उत्पीड़न मामले की जांच तेज हो गई है. पुलिस पूछताछ में नए खुलासे सामने आ रहे हैं और कंपनी जांच में सहयोग कर रही है. पीड़िता ने सहकर्मियों पर अनुचित टिप्पणियों, निजी जीवन में दखल और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के गंभीर आरोप लगाए हैं.

'मेरी साड़ी खींची गई, जांघ पर रखा हाथ...', पुलिस की पूछताछ में टीसीएस केस में पीड़िता ने खोले उत्पीड़न के चौंकाने वाले राज
Image Source: IANS
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देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में कथित धर्मांतरण और कार्यस्थल पर उत्पीड़न के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस पूरे प्रकरण को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है और कंपनी प्रबंधन ने सहयोग का आश्वासन दिया है. मामले में पीड़िता की ओर से सामने आए नए आरोपों ने माहौल को और गंभीर बना दिया है.

दरअसल, इस मामले में पुलिस की जांच और पूछताछ तेज़ी से आगे बढ़ रही है. इस दौरान रोजाना नए-नए खुलासे भी हो रहे हैं. इस बीच पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कई गंभीर आरोप लगाए हैं. जिनमें सहकर्मियों द्वारा अनुचित टिप्पणी और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप शामिल हैं. उसका कहना है कि कार्यस्थल पर उसके साथ लगातार असहज व्यवहार किया जाता था और निजी जीवन को लेकर भी टिप्पणियां की जाती थीं. इन आरोपों में फिगर को लेकर तंज, शादीशुदा जीवन पर सवाल और धार्मिक प्रतीकों का कथित मजाक शामिल बताया गया है.

आरोपी रजा पूछता था निजी बातें

पीड़िता के अनुसार ट्रेनिंग के दौरान एक दिन रजा नाम का सहकर्मी उसकी साड़ी खींचने की कोशिश कर रहा था. वह पैंट्री के पास से गुजर रही थी तभी उसे पीछे से कपड़ा खिंचने जैसा महसूस हुआ. पीछे मुड़कर देखने पर उसने रजा मेनन को पाया. महिला के अनुसार उसने तुरंत अपना पल्लू संभाला और वहां से हट गई, जबकि उस व्यक्ति के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी.

आसिफ को लेकर भी किए बड़े खुलासे 

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पीड़िता ने एक अन्य सहकर्मी आसिफ पर भी गंभीर अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं जिसमें शारीरिक स्पर्श और आपत्तिजनक टिप्पणियां शामिल हैं. उसका कहना है कि कई बार वह जबरन उसके पास बैठता था और बिना अनुमति शरीर के विभिन्न हिस्सों को छूने की कोशिश करता था. इसके साथ ही पीड़िता ने यह भी कहा कि उसे ऐसी टिप्पणियां सुननी पड़ती थीं जो उसकी व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाती थीं. इस मामले में अब तक कुल नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और नासिक पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में एक महिला ऑपरेशन मैनेजर भी शामिल बताई जा रही है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.

TCS ने अपने बयान में क्या कहा?

टीसीएस की ओर से कहा गया है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है और आंतरिक स्तर पर भी समीक्षा की जा रही है. इस घटना के सामने आने के बाद कंपनी की कार्यसंस्कृति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और सुरक्षित कार्य वातावरण बेहद जरूरी होता है. कानूनी जानकारों के अनुसार इस तरह के मामलों में डिजिटल और गवाह दोनों तरह के साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित व्यक्तियों पर कार्यस्थल उत्पीड़न और अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल पुलिस सभी बयान और उपलब्ध सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है. कॉरपोरेट जगत में ऑफ़िस में सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित माहौल को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. विशेषकर आईटी सेक्टर में जहां युवा कर्मचारी बड़ी संख्या में काम करते हैं वहां ऐसे मामलों का असर गहरा होता है. कंपनियों के लिए जरूरी हो जाता है कि वे मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली को लागू करें.

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जांच रिपोर्ट का हो रहा इंतजार

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़े कॉरपोरेट संस्थानों में कर्मचारियों की सुरक्षा पर्याप्त है. आने वाले दिनों में पुलिस जांच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे. फिलहाल सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे गंभीर कार्यस्थल मुद्दा बता रहे हैं जबकि कुछ इसे जांच का विषय मानकर पुलिस पर भरोसा जता रहे हैं. कुल मिलाकर यह मामला अब व्यापक चर्चा का विषय बन गया है और हर स्तर पर इसकी निगरानी की जा रही है.

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बताते चलें कि नासिक टीसीएस यूनिट का यह मामला आने वाले समय में कॉरपोरेट सुरक्षा नीतियों पर भी असर डाल सकता है. कंपनियों के लिए यह जरूरी संकेत है कि कार्यस्थल पर अनुशासन और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. इस मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी और तब तक यह जांच के दायरे में रहेगा. ऐसे मामलों से यह समझना जरूरी हो जाता है कि किसी भी संगठन में शिकायत सुनने और तुरंत कार्रवाई करने की व्यवस्था कितनी मजबूत है.

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