×
जिस पर देशकरता है भरोसा

जंग का असर: अमेरिका, UAE समेत कई देशों में तेल कीमतों में लगी आग, भारत में जस के तस हैं दाम, जानें वजह

US Iran के बीच छिड़े वॉर और होर्मुज पर नाकेबंदी के चलते कई देशों में तेल कीमतें आसमान छू रही हैं. इनमें अमेरिका, UAE, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान भी है, लेकिन भारत में अभी तक कीमतें स्थिर हैं.

Author
21 Apr 2026
( Updated: 21 Apr 2026
06:20 PM )
जंग का असर: अमेरिका, UAE समेत कई देशों में तेल कीमतों में लगी आग, भारत में जस के तस हैं दाम, जानें वजह
Source-IANS
Advertisement

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नाकेबंदी और मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते कई देशों में तेल और गैस के दाम ऊंचाईयां छूने लगे, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं. 

रिपोर्ट के मुताबिक, कई देशों में ईंधन की कीमतों में 85 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है. एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, कोटक की ओर से जारी आंकड़ों में भारत और अन्य विकसित और उभरते देशों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है.  जहां इस साल अब तक कई देशों में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ी हैं, जबकि भारत में ऐसा नहीं हुआ. 

कहां-कहां बढ़ीं डीजल की कीमतें? 

डीजल की बात करें तो भू-राजनीतिक तनावों के चलते हाल के महीनों में कई देशों में इसकी कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है.देशों के हिसाब से देखें तो, UAE में डीजल की कीमतें करीब 85 प्रतिशत बढ़ीं. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में 65 प्रतिशत और 62 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, कनाडा, पाकिस्तान, फ्रांस, श्रीलंका और ब्रिटेन में कीमतें 35 से 53 प्रतिशत तक बढ़ीं. 

Advertisement

इसके अलावा, चीन और ब्राजील जैसे देशों में बढ़ोतरी थोड़ी कम रही, जबकि रूस में डीजल की कीमतें केवल 1 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा बढ़ीं.

इसके उलट, भारत में डीजल की कीमत जनवरी के स्तर पर ही 87.6 रुपए प्रति लीटर बनी हुई है, यानी इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, भले ही अमेरिका-ईरान तनाव जारी है.

पेट्रोल की कीमतों पर क्या हुआ असर? 

पेट्रोल की कीमतों में भी ऐसा ही रुझान देखने को मिला. पड़ोसी पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम सबसे ज्यादा, यानी 44 प्रतिशत बढ़े. इसके बाद अमेरिका (42 प्रतिशत) और यूएई (36 प्रतिशत) का स्थान रहा. 

वहीं, कनाडा, श्रीलंका और चीन में पेट्रोल की कीमतें 34 प्रतिशत तक बढ़ीं, जबकि ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और फ्रांस में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी हुई. 

Advertisement

कम बढ़ोतरी वाले देशों में ब्राजील और रूस शामिल हैं, जहां कीमतें क्रमशः 7 प्रतिशत और 1 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा बढ़ीं. भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमतें जनवरी के स्तर पर 94.7 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई हैं, यानी उपभोक्ताओं के लिए कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. 

भारत में स्थिर कीमतों के पीछे क्या है कारण? 

भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर रहना यह दिखाता है कि सरकारी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (ओएमसी) की कीमत निर्धारण व्यवस्था ने कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की है. वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ा है. 

Advertisement

रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार ऐसा हुआ है कि ईंधन कीमतों के डीरेगुलेशन (Deregulation) के बाद सरकारी तेल कंपनियां रिफाइनरियों से पेट्रोल, डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) और केरोसीन को कम कीमत पर खरीद रही हैं, ताकि खुदरा कीमतों को स्थिर रखने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. 

यह भी पढ़ें- पाकिस्तान की 1.5 अरब डॉलर डील पर बड़ा ब्रेक, सऊदी के इशारे पर पीछे हटा पाक, अफ्रीकी देश को बेचने वाला था हथियार

एक अन्य रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ने कहा कि अगर पेट्रोल-डीजल की कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहती है, तो भारत की तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 18 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 35 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो सकता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी से मार्केटिंग घाटा लगभग 6 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाता है. 

यह भी पढ़ें

With IANS Input

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें