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पाकिस्तान की 1.5 अरब डॉलर डील पर बड़ा ब्रेक, सऊदी के इशारे पर पीछे हटा पाक, अफ्रीकी देश को बेचने वाला था हथियार

Pakistan: पाकिस्तान की करीब 1.5 अरब डॉलर की हथियार डील फिलहाल रोक दी गई है. यह डील सूडान को लड़ाकू विमान और हथियार सप्लाई करने से जुड़ी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ने से रोक दिया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पूरे मामले में सऊदी अरब की भूमिका सबसे अहम रही, जिसने इस समझौते पर रोक लगाने का इशारा किया.

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21 Apr 2026
( Updated: 21 Apr 2026
11:14 AM )
पाकिस्तान की 1.5 अरब डॉलर डील पर बड़ा ब्रेक, सऊदी के इशारे पर पीछे हटा पाक, अफ्रीकी देश को बेचने वाला था हथियार
Image Source: Mohammed bin Salman x post/ Shehbaz Sharif1 x Post/Canva
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Pakistan Weapon Deal Rejected: अफ्रीका के संघर्ष से जुडी एक बड़ी डिफेंस डील अचानक सुर्खियों में आ गई है, जिसमें पाकिस्तान की करीब 1.5 अरब डॉलर की हथियार डील फिलहाल रोक दी गई है. यह डील सूडान को लड़ाकू विमान और हथियार सप्लाई करने से जुड़ी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ने से रोक दिया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पूरे मामले में सऊदी अरब की भूमिका सबसे अहम रही, जिसने इस समझौते पर रोक लगाने का इशारा किया. 

कैसे रुकी यह बड़ी डील?

जानकारी के अनुसार यह डील पहले लगभग फाइनल स्टेज में पहुंच चुकी थी और इसमें सऊदी अरब की मध्यस्थता भी शामिल थी. लेकिन अचानक हालात बदल गए. सऊदी अरब ने न सिर्फ इस समझौते को आगे न बढ़ाने का सुझाव दिया, बल्कि सूडान को मिलने वाली वित्तीय मदद पर भी रोक लगाने की बात कही. इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से इस डील को फिलहाल रोक दिया गया.

सऊदी अरब की बदली रणनीति

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रिपोर्टों में कहा गया है कि मार्च महीने में रियाद में हुई एक अहम बैठक के बाद सऊदी अरब ने अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना शुरू किया. इसी के बाद उसने अफ्रीका में चल रहे कुछ सैन्य और राजनीतिक समझौतों से दूरी बनाने का संकेत दिया. यहां तक कि लीबिया से जुड़ी एक बड़ी डिफेंस डील, जिसकी कीमत करीब 4 अरब डॉलर बताई जा रही है, उस पर भी अब सवाल खड़े हो गए हैं.

पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव

सूत्रों के अनुसार सऊदी अरब ने साफ तौर पर पाकिस्तान को यह संकेत दिया कि मौजूदा हालात में इस डील को आगे बढ़ाना सही नहीं होगा, खासकर तब जब इसकी फंडिंग भी अब पीछे हट चुकी है. इससे पाकिस्तान के रक्षा और कूटनीतिक दायरे में एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह समझौता आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से अहम था.

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सूडान का संघर्ष और बड़े देश

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सूडान का लंबे समय से चल रहा गृहयुद्ध है, जहां सेना और अर्धसैनिक बल “रैपिड सपोर्ट फोर्सेस” के बीच टकराव जारी है. इस संघर्ष ने देश को गंभीर मानवीय संकट में डाल दिया है. आरोप यह भी हैं कि इस लड़ाई में बाहरी ताकतें अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रही हैं. सऊदी अरब जहां सूडान की सेना के साथ माना जाता है, वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर रैपिड सपोर्ट फोर्सेस को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं, हालांकि UAE इन दावों को लगातार खारिज करता रहा है.

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इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि अब सूडान का संघर्ष सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कई क्षेत्रीय ताकतों की रणनीतियां जुड़ गई हैं. सऊदी अरब के रुख में आए इस बदलाव ने न सिर्फ पाकिस्तान की डील को रोक दिया, बल्कि पूरे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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