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गोमांस और मॉब लिंचिंग पर मदनी का बयान, गाय को मिले राष्ट्रीय पशु का दर्जा

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग उठाई है. उन्होंने कहा कि देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा भी देती है.

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20 May 2026
( Updated: 20 May 2026
03:04 PM )
गोमांस और मॉब लिंचिंग पर मदनी का बयान, गाय को मिले राष्ट्रीय पशु का दर्जा
Image Credits: X/@ArshadMadani007
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की मांग उठाई है. उन्होंने कहा कि देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा भी देती है. ऐसे में यह समझ से परे है कि सरकार आखिर किस राजनीतिक मजबूरी के कारण गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से बच रही है. 

गाय को 'राष्ट्रीय पशु' का दर्जा दिया जाना चाहिए

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में अरशद मदनी ने लिखा, "गाय को 'राष्ट्रीय पशु' का दर्जा दिया जाना चाहिए. देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा भी देती है. ऐसे में यह समझ से परे है कि आखिर कौन-सी राजनीतिक मजबूरी है, जिसके कारण सरकार गाय को 'राष्ट्रीय पशु' का दर्जा देने से बच रही है? गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग (भीड़ हिंसा), बेगुनाह इंसानों की हत्या, नफरत की राजनीति और मुसलमानों को बदनाम करने का यह खेल अब बंद होना चाहिए. हमें खुशी होगी यदि गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि न किसी इंसान की जान जाए और न धर्म के नाम पर राजनीति हो."

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उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि कुछ राज्यों में खुलेआम गोमांस बेचा जाता है, लेकिन वहां इसके खिलाफ न कोई विरोध होता है और न ही किसी प्रकार की मॉब लिंचिंग देखने को मिलती है. जबकि जहां मुसलमानों की आबादी है, वहां गाय के नाम पर खून बहाया जाता है. यह श्रद्धा नहीं, बल्कि दोहरा मापदंड और राजनीतिक खेल है. समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि जब देश एक है, तो कानून भी एक होना चाहिए. लेकिन देश में पशु वध से संबंधित कानून सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं हैं.

देश में कई राज्यों में खुलेआम खाया जाता गोमांस 

मदनी ने कहा कि देश में कई ऐसे राज्य हैं जहां खुलेआम गोमांस खाया जाता है और वहां इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है. यहां तक कि एक केंद्रीय मंत्री अपने एक इंटरव्यू में यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे बीफ खाते हैं. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, वहां भी यह सब हो रहा है. और इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि जो लोग देशभर में गाय के नाम पर भीड़ हिंसा कर इंसानों की जान ले लेते हैं, वे भी इस मुद्दे पर पूरी तरह खामोश हैं.

उन्होंने आगे कहा कि हम तो यह चाहते हैं कि गाय को 'राष्ट्रीय पशु' का दर्जा देकर इस विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाए. इसके लिए जो भी कानून बनाया जाए, उसे देश के सभी राज्यों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू किया जाए. इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि न्याय की मांग भी यही है.

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