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क्या बदलने वाला है लोकसभा का पूरा समीकरण? मिशन 360 पर NDA की नजर, TMC के बाद अब इस दल में बगावत की चर्चा

लोकसभा में संख्याबल बढ़ाने की कोशिशों के बीच एनडीए की नजर अब शिवसेना UBT पर बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसदों में नाराजगी की चर्चा है. फिलहाल पार्टी के लोकसभा में 9 सांसद हैं, जबकि एनडीए दो-तिहाई बहुमत के लक्ष्य की ओर बढ़ने की रणनीति पर काम कर रहा है.

क्या बदलने वाला है लोकसभा का पूरा समीकरण? मिशन 360 पर NDA की नजर, TMC के बाद अब इस दल में बगावत की चर्चा
Image Source: IANS/PMO
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देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है. केंद्र की सत्ता पर काबिज एनडीए गठबंधन अब लोकसभा में अपना संख्याबल और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय नजर आ रहा है. हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट की ओर से 19 सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है. अब खबरें महाराष्ट्र की राजनीति से भी सामने आ रही हैं, जहां उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) में संभावित टूट की अटकलें लगाई जा रही हैं.

विपक्षी दलों के सांसदों पर NDA की नजर

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने के लिए विपक्षी दलों के सांसदों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है. इसी कड़ी में शिवसेना यूबीटी का नाम चर्चा में आ गया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है.

शिवसेना UBT के सांसदों में टूट की चर्चा

फिलहाल लोकसभा में उद्धव ठाकरे की पार्टी के 9 सांसद हैं. दल-बदल कानून के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी समूह को सदस्यता बचाने के लिए आवश्यक संख्या में एक साथ अलग होना होगा. इसी वजह से चर्चा इस बात की है कि यदि पार्टी में टूट होती है तो कम से कम 6 सांसद एक साथ नया राजनीतिक रास्ता चुन सकते हैं. माना जा रहा है कि ऐसे नेताओं के लिए सबसे स्वाभाविक विकल्प एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना हो सकती है, जो पहले ही राज्य में अपनी मजबूत राजनीतिक मौजूदगी दर्ज करा चुकी है.

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महाराष्ट्र में मजबूत होती शिंदे की पकड़

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही एकनाथ शिंदे की राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत मानी जा रही है. उनकी सक्रिय शैली और जनता के बीच पहुंच ने उन्हें राज्य के कई इलाकों में मजबूत आधार दिलाया है. यही वजह है कि पिछले कुछ समय में ठाकरे गुट के कई प्रभावशाली नेता भी शिंदे खेमे की ओर जाते दिखाई दिए हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इससे उद्धव ठाकरे का प्रभाव क्षेत्र सीमित होता नजर आ रहा है.

लोकसभा में 360 के आंकड़े पर टिकी नजर

दूसरी ओर बीजेपी और एनडीए की नजर संसद में एक बेहद अहम आंकड़े पर टिकी हुई है। वर्तमान में लोकसभा की 540 सीटों में से तीन सीटें खाली हैं. ऐसे में दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा 360 सांसदों का माना जा रहा है. यदि एनडीए इस संख्या तक पहुंचता है तो संसद में उसकी राजनीतिक ताकत और प्रभाव दोनों में बड़ा इजाफा हो सकता है.

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TMC की हलचल ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा

इसी बीच टीएमसी में भी राजनीतिक हलचल की खबरों ने इस पूरे घटनाक्रम को और रोचक बना दिया है. बागी नेताओं की ओर से 19 सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद विपक्षी खेमे में बेचैनी बढ़ी है. हालांकि अंतिम तस्वीर क्या होगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा. फिलहाल इतना तय है कि संसद के भीतर संख्या बढ़ाने की यह राजनीतिक कवायद आने वाले समय में देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनने जा रही है.

बहरहाल, एनडीए की यह रणनीति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है. शिवसेना UBT और टीएमसी से जुड़ी अटकलें कितनी हकीकत साबित होती हैं, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा. लेकिन इतना तय है कि लोकसभा में संख्याबल बढ़ाने की इस सियासी कवायद पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.

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