7 साल, 36 देश, 274 भगोड़े अपराधी...पाताल से भी ढूंढ-ढूंढकर लाए जा रहे भारत के दुश्मन, ₹18,874 करोड़ की संपत्ति भी जब्त
केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए 2019 से अब तक 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाने में बड़ी सफलता हासिल की है। यानी कि खुफिया सूचनाओं, आधुनिक तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के एक्शन के कारण पाताल से भी देश के दुश्मन वापस लाए जा रहे हैं.
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भारत के दुश्मन अब देश में तो क्या विदेश में भी सेफ नहीं है. दुनिया के किसी कोने में हों अपराधी सरकार उन्हें खोज-खोजकर वापस ला रही है. केंद्र सरकार ने इसके लिए कई देशों के साथ जो प्रत्यर्पण संधि की थी और कई करार किए उसका फायदा अब मिलता दिख रहा है. आपको बता दें कि महज 6 साल के अंदर 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को देश वापास लाया गया है बल्कि 17,874 करोड़ रुपए की संपत्ति भी जब्त की गई है.
2019 से अब तक 6 देशों से 274 भगोड़े वापस लाए गए
सरकार का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों के कारण अब विदेशों में शरण लेकर कानूनी कार्रवाई से बच पाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है.
केंद्र सरकार ने भगोड़ों को देश लाने को बनाया राष्ट्रीय प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया. सरकार की ओर से वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति बनाई गई. गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ बताया.
केंद्र सरकार 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लेकर आई और 2020 के बाद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को 'मिशन मोड' में आगे बढ़ाया गया. इससे कार्रवाई केवल संगठनों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक कार्रवाई का दायरा बढ़ा.
तीन आपराधिक कानून लागू किए, जिसमें भगड़ों को लेकर भी विशेष प्रावधान
वर्ष 2024 में केंद्र सरकार ने तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू किया, जिनमें भगोड़ों से संबंधित विशेष प्रावधान किए गए. पहली बार, बीएनएस की धारा 355 और 356 में 'अनुपस्थिति में मुकदमा' का प्रावधान रखा गया जिससे भगोड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी ट्रायल से लेकर अभियोजन तक संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी.
2022 में भारत ने इंटरपोल जनरल असेंबली की भी मेजबानी की
2022 में भारत ने 90वीं इंटरपोल जनरल असेंबली की मेजबानी की, जिसमें गृहमंत्री अमित शाह ने वैश्विक पुलिसिंग में कम्युनिकेशन, कोलैबोरेशन और कोऑपरेशन का संदेश दिया. भारत और वैश्विक एजेंसियों के बीच समन्वय, संपर्क और संवाद बढ़ाने के लिए गृहमंत्री की ओर से जनवरी, 2025 में 'भारतपोल' लॉन्च किया गया. 'भारतपोल' ने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एकीकृत कर एक इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया.
इसके तहत, राज्य और केन्द्रीय एजेंसियों के 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस पोर्टल से जुड़कर सूचना का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित कर रहे हैं. इसके कारण सीबीआई और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच इन्फार्मेशन शेयरिंग के रेस्पॉन्स टाइम में भारी कमी आई है.
केंद्र ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून भी सख्ती से किया लागू
केंद्र सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) को सख्ती से लागू किया है. पीएमएलए के सख्ती से लागू होने से सरकार ने वर्ष 2019 से 2026 तक भगोड़ों की कुल 17,874 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की. 2019 से 2026 तक 18,762 करोड़ रुपए की सफल वापसी की गई. इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है.
CBI का भी ग्लोबल ऑपरेशन सेंटर शुरू
सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को पकड़ने के लिए विशेष ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर स्थापित किया. यह केंद्र इंटरपोल के माध्यम से दुनियाभर की पुलिस से रियल-टाइम समन्वय करता है. सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए हर राज्य व केंद्रीय जांच एजेंसी में सीबीआई ने इंटरपोल संपर्क अधिकारी नियुक्त किए हैं.
इंटरपोल की ओर से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में वृद्धि हुई है. वर्ष 2022 में 40, वर्ष 2023 में 100, वर्ष 2024 में 107, वर्ष 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 रेड कार्नर नोटिस जारी हुए हैं. भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल चलाया गया. इसके तहत इंटरपोल के सहयोग से छिपे हुए अपराधियों की सैटेलाइट, सर्विलांस, डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर लोकेशन स्थापित की गई.
किन्हें-किन्हें वापस लाया गया?
वापस लाए गए भगोड़ों में टेररिस्ट, गैंगस्टर, फाइनेंशियल ऑफेंडर्स, नार्कोटिक्स आरोपी, मर्डर, रेप और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं. भगोड़ों को वापस लाने का यह अभियान टेररिज्म, प्रो-खालिस्ता एक्सट्रीमिज्म, गैंगस्टर-टेरर कन्वर्जेंस, नार्कोटिक्स, साइबर फ्रॉड और फेक करेंसी तक फैला है.
प्रत्यर्पित होने वाले में तहव्वुर हुसैन राणा एक बड़ा नाम!
तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भारत के संकल्प और जटिल टेरर मामलों में धैर्यपूर्ण लीगल-डिप्लोमैटिक प्रयास का बड़ा उदाहरण है. जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग टेरर, नार्को-टेरर और क्रॉस-बॉर्डर सपोर्ट नेटवर्क को चलाने में हो रहा था.
मेहुल चोकसी-नीरव मोदी, माल्या का अगला नंबर!
देश के अंदर समन्वय में आईबी, सीबीआई, रॉ, एनआईए, ईडी, एमईए, एनसीबी, डीजीजीआई और राज्य पुलिस की साझा भूमिका है. जनवरी 2026 में आईबी के मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है.
गृह मंत्री अमित शाह ने मल्टी एजेंसी एप्रोच और कोऑर्डिनेशन को किया एक्टिवेट
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण (Extradition) अनुरोधों को अधिक पेशेवर और मानक प्रारूप में तैयार करना शुरू किया गया है. इसके साथ ही हर देश की दस्तावेज़ आवश्यकताओं और कानूनी अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर लिखित आश्वासन दिए गए.
वापस लाए गए भगोड़ों में टेररिस्ट, गैंगस्टर, फाइनेंशियल ऑफेंडर्स, नारकोटिक्स आरोपी, मर्डर, रेप और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं. भगोड़ों को वापस लाने का यह अभियान टेररिज़्म, प्रो-खालिस्तान एक्सट्रीमिज़्म, गैंगस्टर-टेरर कन्वर्जेंस, नारकोटिक्स, साइबर फ्रॉड और फेक करेंसी तक फैला है.
तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भारत के संकल्प और जटिल टेरर मामलों में धैर्यपूर्ण लीगल-डिप्लोमैटिक प्रयास का बड़ा उदाहरण है. जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग टेरर, नार्को-टेरर और क्रॉस-बॉर्डर सपोर्ट नेटवर्क को चलाने में हो रहा था.
किन-किन एजेंसियों का रहा कमाल?
भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सफलता का आधार केवल संयोग नहीं, बल्कि विश्वसनीयता, लीगल तैयारी, डिप्लोमैटिक पर्सिस्टेंस (निरंतरता) और सतत फॉलो-अप है. देश के अंदर समन्वय में IB, CBI, R&AW, NIA, ED, MEA, NCB, DGGI और राज्य पुलिस की साझा भूमिका रही है. यह मॉडल "Whole of Government" को दर्शाता है, जहाँ केंद्र और राज्य एजेंसियाँ मिलकर पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही हैं.
जनवरी 2026 में IB के मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत 'स्टैंडिंग फोकस ग्रुप' का गठन एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है. यह समूह फ्यूजिटिव प्रायोरिटी, डोजियर मानकीकरण (Standardization), सूचना गैप हटाने, विदेशी पार्टनर्स से फॉलो-अप और राज्य मामलों को राष्ट्रीय समर्थन देता है.
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कुल मिलाकर कहें तो विदेशों में बैठे भगोड़े केवल निष्क्रिय केस-फाइलें नहीं हैं, बल्कि वे लाइव ऑपरेशनल थ्रेट्स (Operational Threats) हैं, जिन पर भारत सरकार लगातार कड़ा प्रहार कर रही है.