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लखनऊ में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का लोकार्पण, यातायात, पर्यावरण और समग्र विकास में नई पहल

राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ की तहजीब और संस्कृति की पहचान पूरी दुनिया में है और अब शहर के विकास की चर्चा भी वैश्विक स्तर पर हो रही है. उन्होंने कहा कि यूनेस्को द्वारा लखनऊ को ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ की सूची में शामिल किया जाना शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और खान-पान की परंपरा का सम्मान है.

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13 Mar 2026
( Updated: 13 Mar 2026
07:22 PM )
लखनऊ में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का लोकार्पण, यातायात, पर्यावरण और समग्र विकास में नई पहल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ लखनऊ में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि यह परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और समेकित शहरी विकास का महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगी. लोकार्पण समारोह शहर के झूलेलाल में आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे.

ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का महत्व

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि डालीगंज पुल से समतामूलक चौक तक करीब सात किलोमीटर लंबाई वाले ग्रीन कॉरिडोर को आज लखनऊ की जनता को समर्पित किया जा रहा है. इसके शुरू होने से लगभग 15 लाख की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और शहर में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी. रक्षा मंत्री ने कहा कि इस परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें सिविल और डिफेंस सेक्टर दोनों ने मिलकर काम किया है. परियोजना में रक्षा भूमि का भी प्रभावी उपयोग किया गया है और भूमि आवंटन से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद रक्षा विभाग ने पूरा सहयोग दिया.

परियोजना का विस्तार और पर्यावरण संरक्षण

उन्होंने कहा कि जब सिविल और डिफेंस सेक्टर आपसी तालमेल से काम करते हैं तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है और यह परियोजना उसका उदाहरण है. उन्होंने बताया कि ग्रीन कॉरिडोर के अगले चरण में समतामूलक चौक से शहीद पथ तक लगभग 10 किलोमीटर तक इसका विस्तार किया जाएगा. यह कॉरिडोर शहीद पथ और किसान पथ जैसे रिंग रोड को आपस में जोड़ेगा, जिससे शहर में जाम की समस्या कम होगी और लोगों का यात्रा समय भी बचेगा.

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. निर्माण कार्य के दौरान यदि कोई पेड़ बाधा बना तो उसे काटने के बजाय सावधानीपूर्वक दूसरी जगह प्रत्यारोपित किया गया.

उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ सौ से अधिक पेड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास के साथ-साथ स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. घर-घर से कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं.

लखनऊ का समग्र विकास

उन्होंने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 में मिलियन प्लस शहरों की श्रेणी में लखनऊ को देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है. रक्षा मंत्री ने कहा कि शहर के समग्र और वैज्ञानिक विकास के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर और लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया जा रहा है. इसका उद्देश्य लखनऊ के विकास का दीर्घकालिक मास्टरप्लान तैयार करना है, जिससे शहर का विकास सुनियोजित और संतुलित तरीके से हो सके.

उन्होंने कहा कि लखनऊ में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है. शहर के पार्कों में ओपन जिम लगाए गए हैं ताकि बुजुर्ग और महिलाएं टहलने के साथ-साथ व्यायाम भी कर सकें. इसके अलावा, स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के लिए विश्राम सदन जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं.

तकनीकी और रोजगार के अवसर

रक्षा मंत्री ने कहा कि लखनऊ देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उन्होंने बताया कि शहर में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की इंटीग्रेशन और टेस्टिंग सुविधा स्थापित की गई है, जिससे युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर मिल रहे हैं और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिल रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना और सरोजिनी नगर क्षेत्र में अशोक लीलैंड के इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र के शुरू होने से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं. इसके साथ ही मेट्रो विस्तार, रिंग रोड और फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं से लखनऊ का बुनियादी ढांचा तेजी से मजबूत हुआ है.

लखनऊ की संस्कृति और वैश्विक पहचान

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राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ की तहजीब और संस्कृति की पहचान पूरी दुनिया में है और अब शहर के विकास की चर्चा भी वैश्विक स्तर पर हो रही है. उन्होंने कहा कि यूनेस्को द्वारा लखनऊ को ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ की सूची में शामिल किया जाना शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और खान-पान की परंपरा का सम्मान है.

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