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भारतीय नाविकों की मौत पर भड़का भारत... जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को फोन पर जमकर सुनाई खरी-खोटी

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारतीय जहाजों को निशाना बनाए जाने पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात कर स्पष्ट किया कि कमर्शियल जहाजों पर हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते. भारत ने समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता भी जताई है.

भारतीय नाविकों की मौत पर भड़का भारत... जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को फोन पर जमकर सुनाई खरी-खोटी
Image Source: X/ @DrSJaishankar
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता का माहौल पैदा कर दिया है. इस संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और कई देशों की सुरक्षा पर पड़ता दिखाई दे रहा है. इसी बीच समुद्री मार्गों पर भारतीय हितों को लेकर भारत ने भी कड़ा रुख अपनाया है. 

दरअसल, भारतीय टैंकरों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की और जमकर खरी खोटी सुनाई है. भारत ने साफ संदेश दिया है कि समुद्र में भारतीय कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि कमर्शियल जहाजों पर हमले जैसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और इन्हें किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता. 

विदेश मंत्री जयशंकर ने दी जानकारी 

इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने पोस्ट में लिखा कि 'आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई. मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के उन हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति दोहराई, जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे. कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ़ इस तरह की जानलेवा कार्रवाई उचित नहीं है.' जानकारी देते चलें इससे पहले कमर्शियल जहाजों पर ओमान के तट पर हुए हमलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिकी राजनयिक को दूसरी बार तलब किया था.  

तेल टैंकर पर बनाया था निशाना 

हाल ही में ओमान की खाड़ी में भारतीय चालक दल वाले एक तेल टैंकर को निशाना बनाए जाने की घटना ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी. इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी, जिसके बाद नई दिल्ली ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया. भारत ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों और समुद्री हितों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है. वहीं, कुछ दिन पहले फिनलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी नीतियों पर भी सवाल खड़े किए थे. रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में कई बार अमेरिका का रुख असंगत दिखाई देता है और उसकी नीतियों में अचानक बदलाव देखने को मिलते हैं. जयशंकर ने संकेत दिया था कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेता है और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों के अनुरूप रूस से तेल आयात जारी रखेगा.

भारत ने स्पष्ट किया अपना रूख 

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सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार सुबह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की गंभीर चिंता जाहिर की. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को किसी भी संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और समुद्री वाणिज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है. इस घटना के बाद भारतीय चालक दल के तीन सदस्य लापता बताए गए थे. बाद में उनकी मृत्यु की पुष्टि हुई. केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वालों में डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पट्नाला सुरेश शामिल हैं. इस घटना के बाद भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है.

अमेरिका ने स्वीकार की थी हमले की बात 

रिपोर्ट्स के अनुसार, ओमान की खाड़ी में पलाऊ के झंडे के तहत संचालित एक तेल टैंकर हमले की चपेट में आया था. जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय नागरिक शामिल थे. इसके अलावा चालक दल में दो पाकिस्तानी, एक रूसी और एक यूक्रेनी नागरिक भी मौजूद थे. घटना के बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया, जिसके तहत 21 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. हालांकि, लापता हुए तीन भारतीयों के निधन की पुष्टि बाद में की गई. इस घटना के बाद अमेरिका ने स्वीकार किया था कि उसकी सेना ने संबंधित टैंकर के खिलाफ कार्रवाई की थी. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, जहाज को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि चालक दल कथित तौर पर अमेरिकी नौसैनिकों के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था. वहीं, इस कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठे.

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गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास का क्षेत्र पहले से ही भारी तनाव के दौर से गुजर रहा है, जिसका असर वैश्विक समुद्री व्यापार और शिपिंग गतिविधियों पर भी देखने को मिल रहा है.

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