CM योगी की पहल से यूपी के गांव बने हाईटेक, प्लास्टिक कचरे से बनी 75 किलोमीटर सड़क

CM Yogi: प्लास्टिक कचरे से सड़कें बन रही हैं, घर-घर से कूड़ा इकट्ठा कर उससे खाद तैयार की जा रही है और इससे पंचायतों की आमदनी भी बढ़ रही है. इन प्रयासों से ग्रामीण इलाकों की तस्वीर तेजी से बदल रही है और गांव हाईटेक व आत्मनिर्भर बनते जा रहे हैं.

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06 Feb 2026
( Updated: 06 Feb 2026
08:44 AM )
CM योगी की पहल से यूपी के गांव बने हाईटेक, प्लास्टिक कचरे से बनी 75 किलोमीटर सड़क
Image Source: Social Media

UP 75 km Road Built from Plastic Waste: उत्तर प्रदेश के गांव अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि स्वच्छता, तकनीक और नवाचार के नए उदाहरण पेश कर रहे हैं. गांवों में फैले कचरे को अब बेकार नहीं बल्कि कमाई और विकास का साधन बनाया जा रहा है.
प्लास्टिक कचरे से सड़कें बन रही हैं, घर-घर से कूड़ा इकट्ठा कर उससे खाद तैयार की जा रही है और इससे पंचायतों की आमदनी भी बढ़ रही है. इन प्रयासों से ग्रामीण इलाकों की तस्वीर तेजी से बदल रही है और गांव हाईटेक व आत्मनिर्भर बनते जा रहे हैं.

प्लास्टिक कचरे से बन रही मजबूत सड़कें

प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत रामपुर, अमेठी, ललितपुर और एटा जैसे जिलों में प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर अब तक लगभग 75 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जा चुकी हैं. पहले जो प्लास्टिक नालियों, खेतों और सड़कों के किनारे गंदगी फैलाता था, वही अब सड़क निर्माण में काम आ रहा है. इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान कम हो रहा है, बल्कि सड़कें भी ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बन रही हैं. यह तरीका विकास के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा का भी बेहतरीन उदाहरण बन रहा है.

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घर-घर से कूड़ा संग्रहण और खाद निर्माण की पहल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पंचायती राज विभाग ने पूरे प्रदेश के लिए वेस्ट मैनेजमेंट का एक ठोस प्लान तैयार किया है. इसके तहत गांवों में घर-घर जाकर कूड़ा इकट्ठा किया जा रहा है. जैविक कचरे से वर्मी खाद बनाई जा रही है, जिसे किसान खेतों में इस्तेमाल कर रहे हैं. इस खाद की बिक्री से पंचायतों को अच्छी आमदनी भी हो रही है, जिससे गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है.

‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल से बढ़ रही गांवों की आय

पंचायती राज विभाग ‘वेस्ट टू वेल्थ’ यानी कचरे से कमाई के मॉडल पर काम कर रहा है. इस पहल के जरिए अब तक 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की आय पैदा की जा चुकी है. इसके अलावा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों से लगभग 29 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई हुई है. इससे यह साफ है कि अगर कचरे का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो वही कचरा गांवों की तरक्की की नींव बन सकता है.

स्वच्छ गांव महाभियान से बदलेगा हर गांव

स्वच्छ गांव महाभियान के तहत पंचायती राज विभाग कूड़े को बोझ नहीं बल्कि संसाधन मानकर उसका सही इस्तेमाल कर रहा है. प्लास्टिक कचरे से सड़क निर्माण, जैविक कचरे से खाद उत्पादन और इनसे होने वाली कमाई से पंचायतें पहले से ज्यादा सक्षम बन रही हैं. इस योजना का मकसद है कि प्रदेश का हर गांव साफ-सुथरा, आत्मनिर्भर और मजबूत बने.

हर गांव में होंगे नए और अनोखे प्रयोग

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पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह के अनुसार, विभाग गांवों को नवाचार के जरिए सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. गांव-गांव स्वच्छता अभियान और प्लास्टिक वेस्ट के बेहतर उपयोग से न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है, बल्कि करोड़ों रुपये की आय भी पैदा हो रही है. आने वाले समय में प्रदेश के हर गांव में ऐसे ही नए और अनोखे प्रयोग किए जाएंगे, जिससे उत्तर प्रदेश के गांव विकास की नई कहानी लिखेंगे.

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