17 साल का लंबा संघर्ष… अब सेना में बनेंगे ब्रिगेडियर, मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी हुए कर्नल पुरोहित को मिला प्रमोशन
कर्नल पुरोहित ने AFT में अपील करते हुए कहा था कि न्याय प्रक्रिया में देरी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा और उन्हें प्रमोशन का मौका नहीं मिल पाया, जबकि वे इसके हकदार हैं.
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मुंबई मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी हुए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित अब सेना में ब्रिगेडियर बनेंगे. उन्हें प्रमोशन के लिए मंजूरी मिल गई है. साल 2025 में ही कर्नल पुरोहित मालेगांव केस में बरी हुए थे. उनके साथ 6 अन्य लोगों को भी बरी किया गया था.
मालेगांव केस से बरी होने के बाद कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित ने AFT (आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल) का रुख किया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि मालेगांव केस की वजह से उनका करियर बुरी तरह प्रभावित हुआ है. न्याय प्रक्रिया में देरी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा और उन्हें प्रमोशन और सेवा का मौका नहीं मिल पाया, जबकि वे इसके हकदार हैं.
कर्नल पुरोहित के रिटायरमेंट पर लगी थी रोक
श्रीकांत पुरोहित की इस अपील के बाद AFT ने उनके रिटायरमेंट पर रोक लगा दी थी. इसके बाद उनके प्रमोशन पर फैसला विचाराधीन था. दरअसल, 31 मार्च को कर्नल पुरोहित का रिटायरमेंट था, लेकिन अंतिम निर्णय तक इस पर रोक लगा दी गई. इसके लिए रक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिए गए थे. अब आखिरकार कर्नल पुरोहित को न केवल प्रमोशन मिला बल्कि ब्रिगेडियर का पदभार संभालेंगे.
कर्नल पुरोहित के साथ जिन 6 आरोपियों को बरी किया गया था उनमें ये नाम शामिल थे.
- पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा
- मेजर रमेश उपाध्याय
- सुधाकर चतुर्वेदी
- अजय राहिरकर
- सुधाकर धर द्विवेदी
- समीर कुलकर्णी
मालेगांव ब्लास्ट केस में कोर्ट से बरी होने के बाद सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित पर पिछले 17 साल से लगा डिसिप्लिन एंड विजिलेंस (DV) बैन हटा दिया था. केस में आरोपी बनने और गिरफ्तारी के बाद उन पर DV बैन लगाया गया था, जिससे उनका पूरा मिलिट्री करियर थम गया था.
क्या है मालेगांव ब्लास्ट मामला
2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाके ने पूरे देश को हिला दिया था. इस धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी और करीब 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. शुरुआती जांच में यह एक आतंकी हमला माना गया था. लेकिन बाद में इसमें हिंदू संगठनों के कुछ सदस्यों के नाम सामने आए, जिसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित, सुनील जोशी समेत कुल 7 लोगों को आरोपी बनाया गया, बाद में इन्हें बरी कर दिया गया.
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एक दशक से ज्यादा समय तक चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 323 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से 34 अपने बयान से पलट गए. शुरुआत में, इस मामले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने की थी. हालांकि, 2011 में NIA को जांच सौंप दी गई. साल 2008 में गिरफ्तारी के समय कर्नल पुरोहित मिलिट्री इंटेलिजेंस में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर तैनात थे. यह देश में पहला ऐसा मामला था जब सेना का कोई सेवारत अधिकारी आतंकवाद से जुड़े किसी मामले में फंसा हो. उन्होंने 9 साल हिरासत में बिताए, सितंबर 2017 में उन्हें कोर्ट से जमानत मिली. जुलाई 2025 में 7 आरोपियों को इस केस से दोषमुक्त किया गया था.
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