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अमेरिकी अटैक में जान गंवाने वाले आदित्य को अंतिम विदाई, पिता ने मुखाग्नि से पहले पहनाया सेहरा, हर आंख हुई नम

23 साल के मर्चेंट नेवी ऑफिसर आदित्य शर्मा ने 9 महीने ही नौकरी जॉइन की थी. पिछले हफ्ते होर्मुज के पास जहाज पर अमेरिकी मिसाइल अटैक में आदित्य मारे गए.

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18 Jun 2026
( Updated: 18 Jun 2026
06:32 PM )
अमेरिकी अटैक में जान गंवाने वाले आदित्य को अंतिम विदाई, पिता ने मुखाग्नि से पहले पहनाया सेहरा, हर आंख हुई नम
Image Source- Screengrab/Social Media
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चीख, चीत्कार, मातम और बार-बार आता एक डरावना ख्याल… कि अब वो कभी नहीं लौट कर आएगा, वो कभी बात नहीं कर पाएगा, वो कभी कहीं भी नजर नहीं आएगा. इसलिए आखिरी बार जी भर कर गले लगाने की बैचेनी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. ये नजारा था हिमाचल प्रदेश के नौजवान मर्चैंट नेवी ऑफिसर आदित्य शर्मा के घर का, जिन्होंने होर्मुज में जहाज पर हुए अमेरिकी हमले में अपनी जान गंवा दी. 

23 साल के आदित्य शर्मा हमीरपुर के राजेश शर्मा की इकलौती संतान थे. ईरान और अमेरिका की जंग तो खत्म हो गई, लेकिन इस जंग के घाव आदित्य शर्मा के माता-पिता को ताउम्र दर्द देते रहेंगे. हमले के 9 दिन बाद आदित्य शर्मा का शव उनके घर हमीरपुर पहुंचा तो पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई, मां बार-बार आदित्य को गले लगाने आगे बढ़ती लेकिन वही बेसुध होकर गिर जाती, पिता राजेश शर्मा के आंसू नहीं थम रहे थे. 

मुखाग्नि से पहले बेटे को सेहरा बांधा

दरअसल, अमेरिका ने एक जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर हमला किया था और इसमे आदित्य समेत तीन भारतीयों की मौत हो गई थी. इनमें से दो भारतीयों के शव बुधवार को भेजे गए थे. इसके बाद हमीरपुर के भालू गांव में आदित्य का अंतिम संस्कार किया गया. 
 
वहीं, नजारा उस वक्त और भावुक हो गया जब पिता राजेश शर्मा ने बेटे आदित्य को सेहरा बांधा. जिस जवान बेटे की बारात निकालने का सपना देखा था उसका जनाजा निकालना एक पिता के लिए कितना बोझिल होगा. 

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बताया जा रहा है आदित्य 9 महीने पहले ही नौकरी करने गया था. वह राजेश शर्मा की इकलौती संतान था. आदित्य की डेडबॉडी भी परिवार को कई दिनों की जद्दोजहद के बाद मिली. 

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वहीं, इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कूटनीतिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बात कर इस हमले पर विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कहा था कि नागरिक जहाजों पर इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया था कि उसने उस जहाज को निशाना बनाया था, क्योंकि वह ईरान से तेल ले जाने और अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप था. 

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