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चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सामने महिला ने पूछा ऐसा सवाल, भड़क गया भारतीय उच्चायोग, जमकर सुनाया

CJI सूर्यकांत ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के बिर्कबेक कॉलेज में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतर्राष्ट्रीय कानून’ विषय पर लेक्चर देने पहुंचे थे.

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06 Jun 2026
( Updated: 06 Jun 2026
11:39 AM )
चीफ जस्टिस सूर्यकांत के सामने महिला ने पूछा ऐसा सवाल, भड़क गया भारतीय उच्चायोग, जमकर सुनाया
Source- IANS/Supreme Court of India
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी बन गई. उनके बयान पर कई रिएक्शन आए, बाद में CJI ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया, लेकिन अभी भी कॉकरोच का मुद्दा ज्वलंत है और चीफ जस्टिस से सवालों का सिलसिला भी जारी है. इस बार विदेश में एक कार्यक्रम के दौरान चीफ जस्टिस को कॉकरोच वाले बयान से जुड़े सवाल का सामना करना पड़ा. 

दरअसल, CJI सूर्यकांत ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के बिर्कबेक कॉलेज में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतर्राष्ट्रीय कानून’ विषय पर लेक्चर देने पहुंचे थे. इस दौरान कुछ लोगों ने भारत के लोकतांत्रिक माहौल का मुद्दा उठाया. कुछ लोगों ने कथित असहमति की आवाजों को दबाने का आरोप लगाया. यहां एक महिला ने चीफ जस्टिस से कुछ ऐसा पूछ लिया, जिस पर भारतीय उच्चायोग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे मर्यादा के खिलाफ बताया. 

महिला ने CJI से क्या पूछा कि भारत ने जताई नाराजगी? 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत का यह सेशन ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय कानून’ पर था. इसमें सवाल जवाब का भी एक सेशन रखा गया था. इस दौरान एक शख्स ने भारत में कथित असहिष्णुता का मुद्दा उठाया. एक महिला ने कहा, इस मुद्दे पर कई कानूनी पर्यवेक्षकों ने असहमति के लिए बढ़ते रोष पर चिंता जताई. महिला ने इस दौरान कहा कि यह रुख चीफ जस्टिस की टिप्पणियों में भी झलकता है. 

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महिला ने मुख्य न्यायाधीश से उनके हालिया ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ वाले बयान पर भी सवाल पूछने की कोशिश की, हालांकि चीफ जस्टिस की टीम और आयोजकों ने महिला को टोकते हुए कहा कि कार्यक्रम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित है, इसलिए उन प्रश्नों को शामिल नहीं किया जा सकता, जो इस विषय से जुड़े हुए नहीं हैं. 

भारतीय उच्चायोग ने जताई नाराजगी

CJI के कार्यक्रम में हुए इस घटनाक्रम पर भारतीय उच्चायोग ने नाराजगी जताई. इंडियन हाई कमीशन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. जिसमें लिखा, किसी भी व्यक्ति की ओर से कार्यक्रम में व्यवधान डालने की कोशिश करना अस्वीकार्य है. लोकतांत्रिक समाज में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें सभ्य और सम्मानजनक तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए.

भारतीय उच्चायोग ने आगे कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक मंचों पर संवाद की गरिमा बनाए रखना जरूरी है. असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी कार्यक्रम को बाधित करना स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा नहीं माना जा सकता.’

लंदन में CJI के कार्यक्रम में यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर में लोकतंत्र, विरोध की आवाजों को दबाने और AI के प्रभाव पर बहस छिड़ी हुई है. 

चीफ जस्टिस ने AI पर क्या कहा? 

‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ पर अपने विचार साझा करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा, तकनीक न तो स्वाभाविक रूप से लाभकारी होती है और न ही हानिकारक. इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि समाज, कानून और राजनीतिक संस्थाएं उसका इस्तेमाल किस तरह से करती हैं. 

यह भी पढ़ें- गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव का खेल, भारत ने पाकिस्तान की खोल दी पोल, सुनाई खरी-खरी

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उन्होंने आगे कहा, कानून का काम तकनीकी प्रगति का विरोध करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी शक्ति संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक वैधता और मानवीय गरिमा के प्रति जवाबदेह बनी रहे. CJI ने जोर देकर कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भी मानवता को उन सिद्धांतों पर नियंत्रण बनाए रखना होगा, जिनके आधार पर समाज संचालित होता है.

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टिप्पणियाँ 1
G
Guest (अतिथि)
S
Sanjay Naik
1 month ago

Ye pappu ne kiya huaa ek or karasthan hai

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