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कोर्ट ने खत्म की 50 साल की शादी… 72 का पति तो 70 साल की पत्नी ने लिया तलाक, कूलिंग ऑफ पीरियड भी माफ, जानें वजह
साल 1972 में दोनों की शादी हुई थी लेकिन अब दोनों ने आपसी सहमति से तलाक का फैसला लिया है. जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी, आखिर क्या वजह रही कि कोर्ट ने इस केस में कूलिंग ऑफ पीरियड भी माफ कर दिया.
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जिंदगी के ऐसे पड़ाव पर जहां साथी की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस होती है उस मोड़ पर पांच दशक का साथ छोड़कर एक कपल ने तलाक लिया. ये साथ 54 साल का था, पति-पत्नी दोनों बुजुर्ग हैं लेकिन साथ नहीं रहना चाहते ऐसे में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने दोनों को तलाक की मंजूरी दे दी.
दिलचस्प बात ये है कि इस केस में कोर्ट ने कूलिंग ऑफ पीरियड भी नहीं दिया. तलाक लेने वाले पति की 72 साल और पत्नी की उम्र 70 साल है. साल 1972 में दोनों की शादी हुई थी लेकिन अब दोनों ने आपसी सहमति से तलाक का फैसला लिया था.
कोर्ट ने क्यों माफ किया कूलिंग ऑफ पीरियड?
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कहने को तो ये शादी 54 साल तक चली लेकिन पति-पत्नी कुछ साल बाद ही अलग रहने लगे थे. यह रिश्ता कई साल पहले ही खत्म हो चुका था ऐसे में कपल ने कानूनी रूप से भी इसे खत्म करने का फैसला लिया. बुजुर्ग दंपत्ति ने तलाक की याचिका लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
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कोर्ट तलाक के केस में पति-पत्नी को 6 महीने की कूलिंग ऑफ की अवधि देता है. इसका मकसद दोनों के बीच सुलह की गुंजाइश को तलाशना और फिर से रिश्ते को एक मौका देना होता है. यानी साथ रहने की जरा भी उम्मीद हो तो कपल अपनी अर्जी वापस ले सकता है, लेकिन इस केस में कोर्ट ने बुजुर्ग दंपत्ति का तलाक बिना कूलिंग ऑफ पीरियड के ही मंजूर कर लिया.
कोर्ट ने तलाक के लिए क्या आधार माना?
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इस केस में कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे अलगाव को की-फैक्टर माना. एक लंबे अर्से से अलग रह रहे पति-पत्नी में कोर्ट को सुलह की कोई संभावना नजर नहीं आई. ऐसे में जज ने इस जबरदस्ती के रिश्ते को खत्म करने की मंजूरी देने के फैसले को ही सही माना.
कोर्ट ने माना कि इस केस में तलाक की प्रक्रिया में 6 महीने की कूलिंग अवधि बाधा नहीं बन सकती. क्योंकि इस रिश्ते को अब आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं जब पति-पत्नी पहले से अलग हो चुके हैं.
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हालांकि तलाक के सभी केस में कूलिंग ऑफ पीरियड अनिवार्य नहीं है. यह मामले की गंभीरता पर निर्भर करता है. बुजुर्ग दंपत्ति के तलाक के केस में भी छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि इसी आधार पर माफ की गई है. हालांकि ऐसा भी नहीं है कि लंबे समय से अलग रह रहे हर कपल के तलाक के केस में ये छूट दी जाए. धारा 13-B के तहत हर एक मामले में दोनों पक्षों की सहमति, सुलह की संभावना और विवादों की स्थिति को देखा जाता है.