पत्नी के काला-मोटा कहने से था आहत, शख्स ने कोर्ट में दी तलाक की अर्जी, फिर अदालत ने जो फैसला सुनाया…
पति का आरोप था कि पत्नी उसके सांवले रंग और मोटा होने पर ताने मारती थी. कोर्ट में पेश रिकॉर्ड के मुताबिक, आकाश और पूजा की शादी साल 2019 को हुई थी.
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छत्तीसगढ़ में एक शख्स ने पत्नी के तानों से परेशान होकर कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर कर दी. शख्स का कहना है कि उसकी पत्नी उसे काला और मोटा कहकर परेशान करती थी. पति ने पत्नी के खिलाफ क्रूरता का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपील की.
हालांकि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तलाक के लिए इस आधार को खारिज कर दिया. कोर्ट ने साफ किया कि काला या मोटा कहना तलाक का आधार नहीं हो सकता. अदालत ने ये भी कहा है कि बिना सबूत क्रूरता का आरोप लगाने भर से तलाक नहीं मिल सकता.
क्या है पूरा मामला?
इस मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने की. कोर्ट ने जांजगीर चंपा की फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा. दरअसल,
अकाश घोष ने पत्नी से पूजा सीत से तलाक की मांग की थी. पति का आरोप था कि पत्नी उसके सांवले रंग और मोटा होने पर ताने मारती थी, लेकिन कोर्ट ने इसे तलाक का पर्याप्त आधार न मानते हुए खारिज कर दिया.
कोर्ट में पेश रिकॉर्ड के मुताबिक, आकाश और पूजा की शादी साल 2019 को हुई थी. शादी के बाद पूजा केवल कुछ महीने ही ससुराल में रही. कोर्ट में पति ने बताया कि पत्नी उसके साथ रूखा व्यवहार करती थी और झूठे केस में फंसाने की धमकी देती थी. पति ने यह भी कहा कि पत्नी ने उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी थी और बिना बताए मायके चली जाती थी. कोर्ट में महिला के खिलाफ जुड़वां बच्चों का जबरन गर्भपात के आरोप भी लगे. तलाक की याचिका में पति आकाश ने इस बात को भी आधार बनाया था.
कोर्ट ने कहा- यह केवल आरोप
हालांकि कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शादी तोड़ने के लिए केवल आरोप लगाना काफी नहीं है. इसके लिए पीछे ठोस और विश्वसनीय सबूत होने चाहिए. आरोप साबित भी होने चाहिए. अदालत में पति इन आरोपों को सही साबित नहीं कर पाया. इसके बाद कोर्ट ने इसे पत्नी की क्रूरता का केस मानने से इंकार कर दिया.
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पत्नी ने भी दिया जवाब
वहीं, पति आकाश घोष के आरोपों का पत्नी ने भी जवाब दिया. महिला ने आरोपों को गलत बताते हुए पति और ससुराल पर ही गंभीर आरोप लगाए. महिला का कहना है कि ससुराल वालों ने उसे जबरन घर से बाहर निकाला, उसने पति पर भी अफेयर के आरोप लगाए. उसने जब विरोध किया तो पति ने उसके साथ मारपीट की. जब वो गर्भवती थी तब भी उसकी देखभाल नहीं की गई.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
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हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जजों ने सुप्रीम कोर्ट के 2007 के ‘समर घोष बनाम जया घोष’ केस का हवाला दिया. जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि मानसिक क्रूरता को नापने का कोई एक तय पैमाना नहीं है. इससे पहले जांजगीर फैमिली कोर्ट ने भी साल 2024 में आकाश की याचिका खारिज कर दी थी.