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'इस वक्‍त वो कौन कुत्ते हैं जिनके मुंह में हड्डी है?', पीयूष मिश्रा ने JPSC Protest पर नसीरुद्दीन शाह को घेरा

Piyush Mishra: पीयूष मिश्रा ने छात्रों से बातचीत के दौरान नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनसे सवाल पूछना जरूरी है. उनके बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि सामाजिक और छात्र आंदोलनों के दौरान फिल्मी सितारों और कलाकारों को अपनी आवाज किस तरह उठानी चाहिए.

'इस वक्‍त वो कौन कुत्ते हैं जिनके मुंह में हड्डी है?', पीयूष मिश्रा ने JPSC Protest पर नसीरुद्दीन शाह को घेरा
Image Source: Instagram/IANS
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Piyush Mishra: अभिनेता और सिंगर पीयूष मिश्रा एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह पर सवाल उठाए हैं. दरअसल, NEET पेपर लीक के बाद अब झारखंड के रांची में JPSC और JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों की आवाज को समर्थन देने के लिए पीयूष मिश्रा रांची पहुंचे और उनके बीच अपनी बात रखी. इसी दौरान उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान का जिक्र करते हुए उनकी चुप्पी पर सवाल खड़ा कर दिया.

पीयूष मिश्रा ने छात्रों से बातचीत के दौरान नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनसे सवाल पूछना जरूरी है. उनके बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि सामाजिक और छात्र आंदोलनों के दौरान फिल्मी सितारों और कलाकारों को अपनी आवाज किस तरह उठानी चाहिए.

आखिर नसीरुद्दीन शाह पर ही क्यों साधा निशाना?

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दरअसल, NEET पेपर लीक के खिलाफ देश में जब छात्रों का आंदोलन चल रहा था, तब नसीरुद्दीन शाह ने उन सेलिब्रिटीज की चुप्पी पर सवाल उठाया था, जो ऐसे मुद्दों पर कुछ नहीं बोल रहे थे. उन्होंने उस समय ‘जिनके मुंह में हड्डी होती है, वे बोलते नहीं हैं’ जैसी टिप्पणी की थी. उनका इशारा उन लोगों की ओर था, जो अपनी सुविधा के हिसाब से गंभीर मुद्दों पर बोलने से बचते हैं.
अब रांची में छात्रों के प्रदर्शन के बीच पीयूष मिश्रा ने उसी बयान को याद किया. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उस समय चुप रहने वाले लोगों को लेकर यह बात कही गई थी, तो आज जब झारखंड में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, तब कौन लोग चुप हैं. पीयूष मिश्रा ने इसी अंदाज में नसीरुद्दीन शाह से पूछा कि इस वक्त आखिर ‘किसके मुंह में हड्डियां हैं?’

छात्रों से बोले- अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखें

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जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों और मीडिया को संबोधित करते हुए पीयूष मिश्रा ने सिर्फ अपनी नाराजगी जाहिर नहीं की, बल्कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों को भी कुछ सलाह दी. उन्होंने कहा कि सरकार को शासन चलाना होता है और इसलिए सरकार कई मामलों में सावधानी से आगे बढ़ती है. उन्होंने छात्रों से भी शांति बनाए रखने और अपनी मांगों को सही तरीके से सामने रखने की अपील की.
पीयूष मिश्रा ने कहा कि उन्हें गाली-गलौज बिल्कुल पसंद नहीं है और वह इस मामले में थोड़े पुराने विचारों वाले हैं. उन्होंने कहा कि उनके दो बेटे हैं, जो Gen Z पीढ़ी से हैं और राजनीति को लेकर काफी जागरूक हैं. उनके मुताबिक, आज के युवा अपने अधिकारों और देश में होने वाली राजनीतिक घटनाओं को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग हैं. ऐसे में अपनी आवाज उठाना उनका अधिकार है, लेकिन इसके लिए शांतिपूर्ण तरीका अपनाना जरूरी है.

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दिल्ली-मुंबई के आंदोलनों से रांची के प्रदर्शन की तुलना

पीयूष मिश्रा ने रांची में चल रहे छात्र आंदोलन की तुलना दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों से भी की. उन्होंने साफ कहा कि वह दिल्ली में हुए आंदोलन के खिलाफ नहीं हैं, क्योंकि वहां भी प्रदर्शन करने वाले लोग छात्र ही थे. लेकिन उनका मानना है कि वहां जो कुछ हुआ, उस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.
इसी संदर्भ में उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान को फिर से सामने रखा. पीयूष मिश्रा ने कहा कि वह नसीर साहब से माफी मांगते हुए और पूरे सम्मान के साथ यह सवाल पूछ रहे हैं कि अगर पहले चुप रहने वाले लोगों के लिए ‘मुंह में हड्डी’ वाली बात कही गई थी, तो आज छात्रों के इस आंदोलन के बीच कौन लोग चुप हैं। उनके मुताबिक, सवाल किसी व्यक्ति का अपमान करने के लिए नहीं, बल्कि यह जानने के लिए है कि मौजूदा हालात में कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों की भूमिका क्या होनी चाहिए.

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‘इन छात्रों ने पिज्जा-बर्गर नहीं, दाल-भात खाया’

पीयूष मिश्रा ने रांची के छात्रों के संघर्ष को खास अंदाज में बयान किया. उन्होंने कहा कि यहां प्रदर्शन कर रहे छात्रों और दिल्ली-मुंबई के कुछ आंदोलनों के बीच एक फर्क नजर आता है. उनके मुताबिक, रांची के इन छात्रों ने अपने संघर्ष के दौरान पिज्जा या बर्गर नहीं खाया, बल्कि दाल-भात खाकर अपनी लड़ाई जारी रखी.
उन्होंने इसी बात के जरिए सवाल उठाया कि क्या कुछ लोग इसलिए चुप रहे क्योंकि उन्हें पिज्जा और बर्गर की तलब थी, या फिर इसलिए कि जिस भीड़ का वे हिस्सा थे, वह एक खास तरह की भीड़ थी. पीयूष मिश्रा का यह बयान सीधे तौर पर नसीरुद्दीन शाह और उनके पुराने बयान पर तंज माना जा रहा है.

‘नसीर साहब, मैं आपका सम्मान करता हूं, लेकिन अब डरता नहीं’

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अपनी बात के आखिर में पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह के लिए सम्मान भी जताया. उन्होंने कहा कि वह नसीर साहब का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन अब उन्हें उनसे डर नहीं लगता. इस बयान के जरिए उन्होंने साफ कर दिया कि वह अपने सवालों से पीछे हटने वाले नहीं हैं.

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पीयूष मिश्रा की बातों में एक तरफ नसीरुद्दीन शाह के प्रति सम्मान दिखाई दिया, तो दूसरी तरफ उनकी चुप्पी को लेकर नाराजगी भी साफ नजर आई. उन्होंने छात्रों के आदोलन को समर्थन देने के साथ यह सवाल भी खड़ा किया कि जब युवा अपने भविष्य और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तब समाज और खासकर सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए. फिलहाल, पीयूष मिश्रा का यह बयान सोशल मीडिया और फिल्म जगत में चर्चा का विषय बन गया है. नसीरुद्दीन शाह की ओर से इस टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा.

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