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चार साल तक अटकी रही, अब रिलीज होते ही हो गई बैन, दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ पर क्यों मचा बवाल?

कई अड़चनों के बाद आखिरकार 'सतलुज' फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म Z5 पर अनकट रिलीज किया गया था, लेकिन दो दिन बाद ही हटा दिया गया. इससे पहले 7 फरवरी 2025 को इसे रिलीज किया जाना था.

चार साल तक अटकी रही, अब रिलीज होते ही हो गई बैन, दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ पर क्यों मचा बवाल?
Image Source- Screengrab/X/@diljitdosanjh
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Diljit Dosanjh's Movie Satluj Controversy: दिलजीत दोसांझ कि फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद शुरू हो गया. बड़ी मुश्किलों के बाद रिलीज हुई ये फिल्म OTT पर आते ही हटानी पड़ी. फिल्म को पहले 4 साल तक CBFC से सर्टिफिकेट नहीं मिला था. 

कई अड़चनों के बाद आखिरकार फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म Z5 पर अनकट रिलीज किया गया था, लेकिन दो दिन बाद ही हटा दिया गया. 

Z5 ने ‘सतलुज’ को हटाने पर क्या कहा? 

Z5 ने फिल्म हटाने को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है. जिसमें कहा गया है, ‘सतलुज' भले ही थम गई हो, लेकिन उसने जो चर्चा छेड़ी थी, वो अब भी जारी है. आपके अपार प्यार के लिए दिल से धन्यवाद. हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इसे फिर से आपके बीच लेकर आएंगे.’ 

बयान में ये भी कहा गया कि रिलीज के बाद से 'सतलुज' को दर्शकों का ज़बरदस्त प्यार और समर्थन मिला है. हम सतलुज और उससे जुड़े रचनात्मक नज़रिये के साथ मज़बूती से खड़े हैं.’
Z5 ने कहा है, ‘अगले आदेश तक 'सतलुज' भारत में उपलब्ध नहीं होगी. फ़िल्म को जल्द से जल्द दोबारा उपलब्ध कराने के लिए सभी उचित विकल्पों पर काम किया जाएगा.’

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दिलजीत ने नाराजगी जताते हुए क्या कहा? 

फिल्म के लीड एक्टर दिलजीत ने ‘सतलुज’ को हटाने के फैसले पर नाराजगी जताई है. उन्होंने एक वीडियो शेयर किया. जिसमें पंजाब के लोग बड़ी स्क्रीन पर नीचे बैठकर फिल्म देख रहे थे. इसके साथ दिलजीत ने लिखा, अब फिल्म नहीं रुकेगी. खालरा साब की आवाज को कोई नहीं दबा सकता.’ इंस्टाग्राम पर लोगों के सवालों का जवाब देते हुए दिलजीत ने कहा,

'अब कोई टेंशन नहीं है. कोई बात नहीं, एक बार जो चीज आ गई वो नहीं जाती. पहले दिन मुझे बस चिंता थी. अब मेरी चिंता खत्म है भाई, मैं अब टेंशन फ्री बैठा हूं. सब देखकर अब हम टेंशन फ्री होकर बैठे हैं. अब हमें कोई टेंशन नहीं है.'

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दिलजीत के अलावा इस फिल्म में अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान अलग-अलग रोल में हैं. इसे हनी त्रेहान ने डायरेक्ट किया है. 

फरवरी 2025 में रिलीज होनी थी ‘सतलुज’

‘सतलुज’ का पहले नाम पंजाब95 था. इसे 7 फ़रवरी 2025 को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ किया जाना था, लेकिन पहले फिल्म में 21 कट लगाने के लिए कहा गया, इसके बाद ये बढ़कर 121 हो गए. जिस पर निर्देशक ने नाराजगी जताई. एक साल तक फिल्म को रिलीज करने का रास्ता साफ नहीं हुआ. अब रिलीज के दो दिन बाद ही जब फिल्म को हटा लिया गया तो लोगों में गुस्सा है. 

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सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा? 

फिल्म को हटाने के बाद सोशल मीडिया पर अच्छा खासा विरोध देखने को मिल रहा है. एक यूजर ने लिखा, ‘फिल्म हट गई, लेकिन राजनीति नहीं. Z5 से ‘सतलुज’ के हटने से सभी पक्षों को राजनीति का एक नया मौका मिल गया है.’

एक ने लिखा,’यह अजीब बात है कि उन्होंने ‘सतलुज’ पर इसलिए रोक लगा दी क्योंकि इसने कुछ ऐसी सच्चाइयां सामने ला दीं जो उन्हें पसंद नहीं थीं. इसमें पुलिस का भ्रष्टाचार, फ़र्ज़ी एनकाउंटर, सत्ता का दुरुपयोग और यह दिखाया गया था कि कैसे आम आदमी सिस्टम के नीचे कुचला जाता है. सभी राजनीतिक पार्टियां एक जैसी हैं; वे पूरी तरह से भ्रष्ट हैं.’

कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा? जिन पर बनी सतलुज

यह फिल्म मशहूर सिख मानवाधिकार और शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, संघर्ष और उनके क्रांतिकारी कदम पर आधारित है. 

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एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने बताया, 'फिल्म को साल 2022 में सेंसर बोर्ड के पास भेजा गया था और इसमें दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाई है.
यह फिल्म उस समय के पंजाब की परिस्थितियों को दिखाने का प्रयास करती है, जब राज्य एक कठिन दौर से गुजर रहा था। उन्होंने कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और लापता लोगों के मामलों को उजागर करने के लिए लंबा संघर्ष किया था और यह फिल्म उसी संघर्ष को पर्दे पर लाने की कोशिश है.’

एसजीपीसी के मुख्य सचिव ने कहा, 'उस दौर में कई ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया के गायब कर दिया जाता था या उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती थी. जसवंत सिंह खालड़ा ने इन घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाई और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. फिल्म में इन्हीं घटनाओं और उनके संघर्ष को विस्तार से दिखाया गया है.’

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उन्होंने बताया, 'यह फिल्म नई पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है, जिससे वे पंजाब के इतिहास और उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों को समझ सकें. मेरी युवाओं से अपील है कि वे यह फिल्म जरूर देखें, ताकि उन्हें अपने इतिहास और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी मिल सके.’

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