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‘मेरा नाम वोटर लिस्ट से काट दिया’…प्रकाश राज के दावे की खुली पोल! बेंगलुरु वाले पते पर नहीं रहते एक्टर, जांच में सामने आई सच्चाई
Prakash Raj: प्रकाश राज के आरोप सामने आने के बाद मामला सिर्फ सोशल मीडिया की बहस तक सीमित नही रहा. उनके पुराने पते को लेकर स्थानीय स्तर पर सत्यापन कराया गया. अधिकारियों की टीम उस पते पर पहुंची, जो रिकॉर्ड में प्रकाश राज के निवास के तौर पर दर्ज था. वहां प्रकाश राज मौजूद नहीं मिले.
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Prakash Raj: ऐक्टर प्रकाश राज एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा मे हैं. इस बार मामला उनकी फिल्मो या अभिनय से नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट और SIR यानी मतदाता सूची के सत्यापन से जुड़ा है. दरअसल, 11 अगस्त 2026 को प्रकाश राज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था. इस वीडियो में उन्होंने दावा किया कि वह बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं. उन्होंने यह भी बताया कि उनका जन्म बेंगलुरु में हुआ, उन्होंने वहीं पढ़ाई की और थिएटर की शुरुआत भी इसी शहर से की. ऐसे में उनका कहना था कि इसके बावजूद SIR की प्रक्रिया के बाद उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया.
प्रकाश राज ने अपने वीडियो के जरिए चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाया और कहा कि अगर वह खुद बेंगलुरु से चुनाव लड़ चुके हैं और इतने लंबे समय से इस शहर से जुड़े रहे हैं, तो फिर आज उनका नाम मतदाता सूची में क्यों नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अब वह देखेंगे कि दोबारा वोटर बनने या अपना नाम जुड़वाने के लिए उनसे कौन-कौन से दस्तावेज मांगे जाते हैं. उनका अंदाज काफी तीखा था और उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए.
लेकिन कहानी में आया नया मोड़
प्रकाश राज के आरोप सामने आने के बाद मामला सिर्फ सोशल मीडिया की बहस तक सीमित नही रहा. उनके पुराने पते को लेकर स्थानीय स्तर पर सत्यापन कराया गया. अधिकारियों की टीम उस पते पर पहुंची, जो रिकॉर्ड में प्रकाश राज के निवास के तौर पर दर्ज था. वहां प्रकाश राज मौजूद नहीं मिले. इसके बाद अधिकारियों ने आसपास रहने वाले लोगों से भी जानकारी ली कि क्या प्रकाश राज अभी भी उस घर में रहते हैं.
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रकाश राज पहले इस पते पर रहते थे, लेकिन काफी समय पहले वहां से दूसरी जगह चले गए थे. बताया गया कि यह घर पिछले करीब चार साल से खाली पड़ा है और प्रकाश राज भी लंबे समय से वहां नहीं आए हैं. यानी जांच के दौरान अधिकारियों को यह जानकारी मिली कि जिस पते को प्रकाश राज अपने बेंगलुरु वाले निवास के तौर पर बता रहे थे, वह उनका मौजूदा निवास नही है.
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अधिकारियों ने मौके पर जाकर किया सत्यापन
इस मामले में सबसे अहम बात यह रही कि अधिकारियों ने सिर्फ कागजों के आधार पर जवाब नहीं दिया, बल्कि मौके पर जाकर स्थिति की जांच की. बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO और दूसरे अधिकारियों ने पुराने पते का दौरा किया. आसपास रहने वाले लोगों से बातचीत की गई और यह पता लगाने की कोशिश की गई कि प्रकाश राज वास्तव में वहां रह रहे हैं या नहीं.
जांच के दौरान पड़ोसियों ने अधिकारियों को बताया कि प्रकाश राज पहले यहां रहते थे, लेकिन अब कई साल से इस घर में नहीं रह रहे हैं. अधिकारियों ने इस बातचीत को रिकॉर्ड भी किया.इसके बाद प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि वोटर रिकॉर्ड में बदलाव का कारण किसी व्यक्ति को मनमाने तरीके से वोटर लिस्ट से हटाना नहीं, बल्कि उसके पुराने पते पर अब नहीं रहने से जुड़ा सत्यापन है.
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क्या प्रकाश राज का नाम बिना जांच के काट दिया गया?
यहीं से पूरा विवाद और दिलचस्प हो जाता है. प्रकाश राज का आरोप था कि SIR के बाद उनका नाम भी उन लाखों मतदाताओं की सूची में शामिल हो गया, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. उनके मुताबिक, वह खुद इसका उदाहरण हैं और इसी वजह से उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाया.
लेकिन अधिकारियों की ओर से सामने आई जानकारी इस दावे की एक अलग तस्वीर पेश करती है. सत्यापन के मुताबिक, प्रकाश राज जिस पुराने पते पर दर्ज थे, वहां वह लंबे समय से नहीं रह रहे थे. इसी आधार पर उनके रिकॉर्ड को ‘Shifted’ यानी दूसरी जगह चले गए व्यक्ति के तौर पर देखा गया. इसका मतलब यह है कि प्रशासन के मुताबिक कार्रवाई बिना किसी जांच के नहीं हुई थी, बल्कि पुराने पते पर किए गए सत्यापन के बाद रिकॉर्ड में बदलाव किया गया.
सोशल मीडिया पर आरोप, मौके पर जांच से आया जवाब
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प्रकाश राज ने अपने वीडियो में जिस मामले को चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के लिए उदाहरण के तौर पर सामने रखा था, उसी मामले में अब प्रशासन ने अपना पक्ष रख दिया है. यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मामला किसी आम शिकायत की तरह बंद नहीं हुआ. प्रकाश राज के आरोप सामने आने के बाद अधिकारियों ने उनके पुराने पते का सत्यापन किया और आसपास के लोगों से बात करके स्थिति की जानकारी जुटाई.
यानी एक तरफ प्रकाश राज का कहना था कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया और इसके जरिए SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठता है. दूसरी तरफ अधिकारियों का कहना है कि पुराने पते पर उनके नहीं रहने की पुष्टि होने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव किया गया. दोनों पक्षों के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रकाश राज ने जिस पुराने पते को आधार बनाकर अपनी शिकायत रखी, क्या वह उस समय उनका वास्तविक और मौजूदा निवास था या नहीं.
इस विवाद से क्या समझ आता है?
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पूरे मामले को सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट या एक बयान तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा. वोटर लिस्ट में नाम होना किसी व्यक्ति के मौजूदा निवास से भी जुड़ा होता है. अगर कोई व्यक्ति एक पते से दूसरे पते पर शिफ्ट हो जाता है, तो मतदाता रिकॉर्ड को भी उसी के अनुसार अपडेट करना पड़ता है. अधिकारियों की जांच में प्रकाश राज के पुराने पते पर उनके नहीं रहने की बात सामने आई है और इसी को उनके रिकॉर्ड में बदलाव का आधार बताया गया है.
प्रकाश राज ने जिस अंदाज में यह मुद्दा उठाया था, उससे सोशल मीडिया पर यह संदेश गया कि उनका नाम बिना किसी वजह के वोटर लिस्ट से हटा दिया गया. लेकिन अब स्थानीय सत्यापन के बाद चुनाव अधिकारियों ने इस दावे को चुनौती दी है. ऐसे में इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि प्रकाश राज के आरोप और प्रशासन की जांच दोनों को सामने रखकर ही पूरी तस्वीर को समझा जा सकता है.