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कहां है धर्मेश्वर महादेव मंदिर, मरने के बाद इस मंदिर में लगती है यमराज की अदालत, होता है कर्मों का हिसाब

र्मेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में मटके के आकार के शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं, जिन्हें यमराज का ही रूप माना जाता है. स्थानीय मान्यता है कि जो भी मंदिर में जीते-जी दर्शन के लिए नहीं आता, उसे मरने के बाद इसी स्थल पर आकर भगवान धर्मेश्वर महादेव का सामना करना पड़ता है.

कहां है धर्मेश्वर महादेव मंदिर, मरने के बाद इस मंदिर में लगती है यमराज की अदालत, होता है कर्मों का हिसाब
Image Credits: Dharmeshwar Mahadev temple/facebook/Shivansh Sharma
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कहते हैं कि मृत्यु के बाद हर मनुष्य को अपने कर्मों का हिसाब देना होता है. जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर ही मनुष्यों को अगला जन्म मिलता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मृत्यु के बाद कहां पर कर्मों का हिसाब-किताब किया जाता है? 

इस मंदिर में मनुष्यों को अपने सभी कर्मों का हिसाब देना होता

उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जहां मनुष्यों को अपने सभी कर्मों का हिसाब देना होता है. माना जाता है कि अगर जीते-जी इस मंदिर के दर्शन कर लिए जाएं तो कर्मों से हिसाब से मुक्ति मिलती है. हम बात कर रहे हैं धर्मेश्वर महादेव की.

मंदिर में लगती है यमराज की अदालत 

धर्मेश्वर महादेव उत्तराखंड में मौजूद चौरासी मंदिर परिसर के अंदर स्थित एक चमत्कारी मंदिर है. माना जाता है कि मनुष्यों के कर्मों के हिसाब के लिए यहां यमराज की अदालत भी लगती है. धर्मेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में मटके के आकार के शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं, जिन्हें यमराज का ही रूप माना जाता है. स्थानीय मान्यता है कि जो भी मंदिर में जीते-जी दर्शन के लिए नहीं आता, उसे मरने के बाद इसी स्थल पर आकर भगवान धर्मेश्वर महादेव का सामना करना पड़ता है. भाई-दूज के मौके पर मंदिर में विशेष भीड़ लगती है. बहनें अपने भाईयों की लंबी उम्र की कामना के लिए मंदिर में विशेष दर्शन के लिए आती हैं.

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कौनसा तरीका तय करता है कि मनुष्य स्वर्ग जाएगा या नर्क

साक्षात यमराज के रूप में विराजित भगवान शिव, चित्रगुप्त की सहायता से मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं. मंदिर के पीछे की तरफ एक स्थान चित्रगुप्त को दिया गया है. जमीन पर आपको एक काली शिला और पट्टी दिखने को मिलेगी, जिस पर पत्थर से कुछ लकीरें बनाई गई हैं. माना जाता है कि यह तरीका ही तय करता है कि मनुष्य स्वर्ग जाएगा या नर्क.

मंदिर की कुछ दूरी पर ढाई पौड़ी नाम का स्थान बना है

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इतना ही नहीं, मंदिर की कुछ दूरी पर ढाई पौड़ी नाम का स्थान बना है. ढाई पौड़ी एक ऐसी जगह है जहां अकाल मृत्यु से मरे लोगों को अपना बाकी समय काटना होता है. जो भी भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आता है, उसे इन तीनों स्थानों के दर्शन करना जरूरी माना गया है. मंदिर के इतिहास की बात करें तो माना जाता है कि इसी स्थल पर महाराज कृष्ण गिरि ने साधना की थी और स्थान को पवित्रस्थली बनाया था.

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