देश के प्रमुख विश्वकर्मा मंदिर, जहां कारीगर और इंजीनियर मांगते हैं आशीर्वाद
भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है. देशभर में भगवान विश्वकर्मा के कई मंदिर हैं. इस खास दिन पर पूजा करने के लिए मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.
Follow Us:
देशभर में गुरुवार को धूमधाम से भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाएगी. विश्वकर्मा जयंती मनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है. इस दिन कारखानों, दफ्तरों और घरों में मशीनों, औजारों व वाहनों की पूजा की जाती है. भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है. देशभर में भगवान विश्वकर्मा के कई मंदिर हैं. इस खास दिन पर पूजा करने के लिए मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.
कई राज्यों में भगवान विश्वकर्मा के प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं
भारत के कई राज्यों में भगवान विश्वकर्मा के प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं. इनमें सबसे प्रमुख मंदिर असम के गुवाहाटी में है, जिसे दुनियाभर में भगवान विश्वकर्मा का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है. यह मां कामाख्या देवी मंदिर के तल भाग में बना हुआ है. इस मंदिर का वर्ष 1965 में कामाख्या मंदिर के पुजारियों ने महावीर प्रसाद के सहयोग से कराया था. इस मंदिर में हर वर्ष 17 सितंबर को बड़ी संख्या में श्रद्धालु विश्वकर्मा की पूजा करने आते हैं. यह दिन विशेष रूप से देश के पूर्वी राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है.
पंजाब का विश्वकर्मा मंदिर
पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा (बंगा रोड, गोंसपुर) में सफेद संगमरमर से बना बेहद भव्य और बड़ा विश्वकर्मा मंदिर स्थित है. इसको सर्वशक्तिमान विश्वकर्मा मंदिर कहा जाता है. इस ऐतिहासिक मंदिर के निर्माण की शुरुआत सन 1909 में पंडित नत्थू राम धीमान मंढाली वालों ने की थी. कपूरथला के महाराजा ने इस मंदिर के निर्माण के लिए जमीन दान की थी. सन 1911 में इस पवित्र स्थान पर भगवान श्री विश्वकर्मा जी की मूर्ति की स्थापना की गई. इस मंदिर में पंजाब के ही नहीं देश विदेश से भी कारीगर, इंजीनियर, शिल्प कला के विशेषज्ञ आकर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं.
भगवान विश्वकर्मा का सबसे लोकप्रिय मंदिर स्थित है
देश की राजधानी नई दिल्ली के पहाड़गंज में भगवान विश्वकर्मा का सबसे लोकप्रिय मंदिर स्थित है. माना जाता है कि इस मंदिर की नींव पांडवों ने बनाई गई थी. महाभारत काल में जब युधिष्ठिर के आग्रह पर इंद्रप्रस्थ का निर्माण हुआ था, तब इस स्थान का उपयोग मय दानव (जो विश्वकर्मा के पुत्र माने जाते हैं) द्वारा निर्माण कार्य के लिए किया गया था. इस मंदिर परिसर में एक बहुत पुराना और गहरा कुआं है, जिसका पानी आज भी उपयोग किया जाता है. इसके अलावा यहां एक पुराना पीपल का पेड़ भी मौजूद है. विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर श्रद्धालुओं की यहां विशेष भीड़ रहती है.
पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर
राजस्थान के जोधपुर के डांगियावास क्षेत्र में पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर स्थित है. भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का आदि आचार्य, दिव्य वास्तुकार और सृजनकर्ता माना जाता है. पंचमुखी विश्वकर्मा जी का अर्थ उनके पांच दिव्य रूपों व मुखों से है, जिसका अर्थ सृजन, कला और निर्माण के विभिन्न आयामों से है. इस मंदिर में श्रद्धालु भगवान विश्वकर्मा को परिश्रम, ईमानदारी और हस्तकला का प्रेरणास्त्रोत मानकर अपने व्यवसाय में तरक्की और सफलता के लिए उनकी पूजा करते हैं.
घर खरीदने या मकान बनवाने की मन्नत मांगते हैं
मुंबई के कांदिवली ईस्ट (हनुमान नगर, शिवाजी नगर रोड) में स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर स्थानीय निवासियों, शिल्पकारों और कारीगरों के बीच गहरी धार्मिक आस्था और मान्यता का केंद्र है. जो लोग मुंबई में किराए के घरों में रह रहे हैं. वे यहां आकर अपना खुद का घर खरीदने या मकान बनवाने की मन्नत मांगते हैं. वहीं स्थानीय कारीगर, लोहार, बढ़ई, इंजीनियर और अपनी कला व टूल्स (औजारों) से जीविका चलाने वाले लोग यहां विशेष रूप से आशीर्वाद लेने आते हैं.
भगवान विश्वकर्मा का एक बहुत ही अनोखा मंदिर
यह भी पढ़ें
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में भगवान विश्वकर्मा का एक बहुत ही अनोखा मंदिर है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां साल में दो बार भगवान विश्वकर्मा का जन्मोत्सव मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माघ माह की त्रयोदशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा प्रकट हुए थे, इसलिए समाज के लोग यहां विशेष उत्सव मनाते हैं. वहीं, मध्य प्रदेश के सागर जिले के सदर क्षेत्र में श्री भगवान विश्वकर्मा का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है.