देवदार के जंगलों में विराजते हैं सैमज्यू, जानिए झंकार सैम देवता मंदिर की रहस्यमयी कहानी
उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में सैम देवता (सैम ज्यू) को भगवान शिव का ही एक अंशावतार और प्रमुख लोक देवता के रूप में पूजा जाता है. लोककथाओं के अनुसार इनका उद्गम नेपाल के डोटी क्षेत्र से माना जाता है.
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देवभूमि उत्तराखंड के हरे-भरे पहाड़, वन और असीम वादियां में लोकदेवताओं की कहानी कहते हैं. ऐसा ही एक पवित्र और रहस्यमयी धाम है सैम देवता मंदिर (सैमज्यू). मान्यता है कि सैम देवता सभी देवी-देवताओं के गुरु और मामा हैं, जो अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं.
कौन हैं सैम देवता?
'सैम' शब्द का अर्थ स्वयंभू होता है. इन्हें न्यायकारी और कल्याणकारी देवता माना जाता है जो भक्तों की रक्षा करते हैं और बुराई का नाश करते हैं.
शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता पर जोर देते हुए सभी से मंदिर दर्शन करने की अपील की थी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, "अल्मोड़ा जिले में स्थित झंकार सैम देवता मंदिर आस्था और पौराणिक मान्यताओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है. ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने इस पवित्र जगह पर तपस्या की थी. प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरे इस मंदिर में सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है. अल्मोड़ा आने पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें."
देवदार के जंगलों के बीच बसा है पवित्र धाम
अल्मोड़ा से लगभग 40 किलोमीटर दूर, जागेश्वर धाम से 4 किलोमीटर की दूरी पर दारुक वन में देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर भगवान शिव के अंशावतार सैम देवता को समर्पित है. स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान इस मंदिर का इतिहास पौराणिक कथाओं और लोक-गाथाओं से जुड़ा है, जहां आज भी एक चमत्कारी देवदार के पेड़ में गणेश जी की आकृति और कभी दूध निकलने की कथा प्रचलित है.
गांव के हर शुभ आयोजन में सबसे पहले सैमज्यू को भोग
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गांव में जब भी कोई अनुष्ठान या भंडारा (बेसी) होता है, तो सबसे पहला भोग इन्हें ही लगाया जाता है.
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उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में सैम देवता (सैम ज्यू) को भगवान शिव का ही एक अंशावतार और प्रमुख लोक देवता के रूप में पूजा जाता है. लोककथाओं के अनुसार इनका उद्गम नेपाल के डोटी क्षेत्र से माना जाता है. एक समय पर देवदार के पेड़ से दूध निकलना और अपनी शक्ति से भक्तों के कष्ट दूर करना जैसी कई चमत्कारिक कथाएं प्रचलित हैं.